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यह धार्मिक संस्थान है। अतः धार्मिक अनुशासन और शिष्टाचार को बनाये रखते हुये इसका लाभ लिया जा सकता है।

Photos from 1008.Guru's post 01/07/2026

गविष्टि (गोरक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा

आज 01 जुलाई 2026 के दिन भर के कार्यक्रम का विवरण 🙏🙏

लोकसभा - पीलीभीत
मण्डल - बरेली मण्डल
आँचल - पश्चिमांचल

Missed Call - 8448531008

#गविष्टि_यात्रा

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यात्रा का विवरण
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जिला - पीलीभीत

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• जतीपुर स्वागत
• टाइगर तिराहा स्वागत
• जेपी निकट

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1. पूरनपुर विधानसभा

• राम होटल, पूरनपुर
(वाया पीलीभीत, टाइगर तिराहा से होते हुए ओवरब्रिज से मार्ग)
आचार्य श्री अनिल पाण्डेय जी महाराज - 9758673439

• वाया माधोटांडा
जमुनियां
राम गोपाल वर्मा जी - 9758550330

• चिरोंजी लाल विद्या मंदिर
पंकज शर्मा जी - 8006680001

• गजरौला (मुख्य मार्ग)
गुरुद्वारा के सामने स्वागत
धनपति वर्मा जी - 9548987074

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2. पीलीभीत शहर विधानसभा
आशीर्वचन
के० के० पुरम कॉलोनी प्रांगण
राजीव अग्रवाल 'टी.टी.' जी - 9412741400

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3. बरखेड़ा विधानसभा
TVS एजेंसी बरखेड़ा के सामने ,स्वागत
धनपति वर्मा जी - 9548987074

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4. बीसलपुर विधानसभा
अग्रवाल धर्मशाला - रात्रि विश्राम
दिव्या पी गंगवार - 9927020695

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यात्रा के सभी फोटो इस लिंक से प्राप्त करें - https://1008.guru/resources/chitra-sevalaya

यात्रा सम्बन्धित जानकारी के लिए सम्पर्क करें ।
यात्रा सह-संयोजक
श्री पंकज पाण्डेय जी - 9711999799

शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना से जुडें -
https://share.google/kG9I6FYLosoJT0lx9

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Photos from 1008.Guru's post 30/06/2026

प्रेस विज्ञप्ति: गोप्रतिष्ठा (गौ-रक्षार्थ धर्मयुद्ध)

*बरेली में जगद्गुरु शंकराचार्य जी का हुआ भव्य स्वागत*

*‘पहली रोटी गाय की ही है — हिन्दू के लिए यह भगवान और गुरु से भी ऊपर’*

*‘एक गाय को प्रसन्न करने से 33 कोटि देवी-देवता सम्मिलित रूप में प्रसन्न’*

*‘गाय न मांस का लोथड़ा है, न दूध का डब्बा — वह आशीर्वाद का पिटारा है’*

*‘गाय और पृथ्वी एक हैं — गाय बचेगी तो पृथ्वी बचेगी’*

*‘गाय और गवय एक नहीं — विज्ञान भी कहता है: Bos indicus और Bos ta**us A1 और A2 दूध’*

*‘जैसे गाय-गवय में भ्रम, वैसे असली-नकली हिन्दू में — वेश देखकर भरोसा मत करो’*

*‘बीफ का खुला प्रचार कर रही सरकार — और गोरक्षा कानून हटाने वाली एकमात्र party’*

ज़िला: बरेली, उत्तरप्रदेश
मूल मंत्र: "अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ"

*"गाय न मांस का लोथड़ा है, न दूध का डब्बा — वह आशीर्वाद का पिटारा है, और स्वयं पृथ्वी का चल रूप है। गाय बचेगी तो पृथ्वी बचेगी; गाय गई तो पृथ्वी भी समाप्त हो जाएगी।" ‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘१००८’*

बरेली। ऐतिहासिक 81 दिवसीय 'गोप्रतिष्ठा (गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध)' (3 मई – 24 जुलाई 2026) के क्रम में ‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘१००८’ का बरेली जनपद में, बरेली सदर विधानसभा सहित, जगह-जगह भव्य किया गया।
प्रत्येक स्थान पर उपस्थित जनसमुदाय ने वैदिक मंत्र "अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ" के साथ गो रक्षा का सामूहिक संकल्प लिया।
‘पहली रोटी गाय की ही है — हिन्दू के लिए यह भगवान और गुरु से भी ऊपर; एक गाय से 33 कोटि देवी-देवता सम्मिलित रूप में प्रसन्न’
महाराजश्री ने कहा कि हिन्दू के घर की पहली रोटी गाय को समर्पित होती है — न गुरु को, न भगवान को, न घर के बड़े-बच्चों को — और यह दैनिक तौर पर घोषित करता है कि हिन्दू के लिए गाय सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिससे ऊपर कुछ नहीं।
उन्होंने कहा, सशरीर में होते हुए भी, गाय के गुण ऐसे हैं जिनसे समस्त मानव का कल्याण होता है; भौतिक दृष्टि वालों के लिए वह अपार लाभ देती है और आध्यात्मिक दृष्टि वालों के लिए परमात्मा-स्वरूपा उपासनीय है।
उसमें 33 कोटि देवताओं का निवास है, इसलिए एक गाय को प्रसन्न करना 33 कोटि देवताओं को एक साथ — और सम्मिलित रूप में — प्रसन्न करना है।
जैसे किसी तत्व की कमी से और अधिकता से, दोनों से शरीर रोगी होता है, वैसे ही सब कल्याण संतुलन में है; और जहाँ एक देवता की उपासना एक ही वरदान देती है, वहीं गाय की उपासना सभी देवताओं का आशीर्वाद उचित अनुपात में एक साथ देती है — मानो एक ही गोली में सब का तत्व सम्मिलित रूप में।
‘गाय न मांस का लोथड़ा है, न दूध का डब्बा — वह आशीर्वाद का पिटारा है’
महाराजश्री ने मार्कण्डेय पुराण के राजा पृथु का प्रसंग सुनाया — वह राजा जिनके कारण इस धरती का नाम पृथ्वी पड़ा, जिन्होंने सबसे पहले सड़कें, नगर, गाँव, खेत और घर स्थापित किए।
जब पृथु ने अपनी प्रजा को क्षीण पाया, तो जाना कि पूर्व के दुराचारी राजा के कारण पृथ्वी ने अन्न रोक लिया था; प्रेम से आह्वान करने पर वह न मिली, और भागवत में वर्णित है कि सबने उससे जो चाहा वह लिया — सोना, हीरे-मोती, वस्त्र, अन्न, यहाँ तक कि विष और अमृत भी।
आज संसार में उपलब्ध हर वस्तु, महाराजश्री ने कहा, गोमाता से निकला प्रसाद है; गाय में केवल दूध देखना तुच्छ दृष्टि है, और केवल मांस देखना उससे भी तुच्छ — क्योंकि वास्तव में वह न मांस का लोथड़ा है, न दूध का डब्बा, बल्कि आशीर्वाद और वरदान का पिटारा है, और यात्रा का उद्देश्य उस वरदान रूप को जन-सामान्य के सामने लाना है।
‘गाय और पृथ्वी एक हैं — गाय बचेगी तो पृथ्वी बचेगी’
गाय और पृथ्वी, महाराजश्री ने समझाया, एक स्वभाव वाली हैं क्योंकि वास्तव में एक ही हैं: अचल रूप में वह पृथ्वी के रूप में रहती हैं और चल रूप में गाय के रूप में प्रकट हो जाती हैं।
शास्त्र कहता है, उन्होंने बताया, कि सात शक्तियाँ इस पृथ्वी को वैसे ही धारण किए हुए हैं जैसे खंभे छत को थामे रहते हैं, और इनमें सबसे पहली है गो; पृथ्वी गाय पर ही टिकी है।
इसलिए, उन्होंने कहा, गाय को बचाना पृथ्वी को बचाना है — गाय समाप्त होगी तो पृथ्वी भी समाप्त हो जाएगी, और जब तक गाय है तब तक पृथ्वी है।
‘गाय और गवय एक नहीं — विज्ञान भी कहता है: Bos indicus और Bos ta**us A1 और A2 दूध’
महाराजश्री ने कहा कि गाय की पहचान ही मिटा दी गई है, असली गाय और गाय जैसी ‘गवय’ को एक मान लिया गया है।
शास्त्र ने बहुत पहले गाय के लक्षण बताए — गले में लटकता सास्ना (गलकम्बल) और कंधे पर उठा ककुद — और कहा "गो सदृशो गवयः" (गाय के सदृश गवय)।
विज्ञान भी, उन्होंने कहा, इस भेद तक पहुँचा है, हमारी गाय को Bos indicus और गाय जैसी को Bos ta**us नाम देकर, और दूध को भी A1 तथा A2 में बाँटकर, जो अब बाज़ार में अलग-अलग मिलता है।
भारत ने कभी हर वस्तु को एक ही भाव में नहीं तौला, उन्होंने कहा; हर चीज़ अपने गुण से जानी और मूल्यवान होती रही है, और गाय भी वैसी ही है।
केवल शुद्ध देशी गाय का गोबर और गोमूत्र पवित्र है और उसमें रोगकारक कीटाणुओं को नष्ट करने की शक्ति है — जो गवय में नहीं है — और इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता, उन्होंने कहा, यह पहचानना है कि कौन गाय है और कौन गवय, क्योंकि दोनों को एक मानने से जनता को सही लाभ नहीं मिलता।
‘जैसे गाय-गवय में भ्रम, वैसे असली-नकली हिन्दू में — वेश देखकर भरोसा मत करो’
जैसे गाय और गवय में भ्रम हुआ, महाराजश्री ने कहा, वैसे ही मनुष्य में नकली हिन्दू और असली हिन्दू मिल गए हैं, अब पहचान ही नहीं होती — माथे का तिलक और गेरुआ वस्त्र ही प्रमाण मान लिया जाता है।
उन्होंने स्मरण कराया कि माता सीता ने रावण पर इसलिए भरोसा किया, क्योंकि वह संन्यासी के वेश में आया और लक्ष्मण-रेखा से बाहर निकल गईं; रामायण, उन्होंने कहा, यह सिखाती है कि केवल वेश देखकर भरोसा मत करो, अन्यथा सीता माता की भाँति जीवनभर दुःख रहेगा।
यह लक्ष्मण-रेखा शास्त्र है — कम से कम जहाँ आत्मबल और गुरु न हों, वहाँ शास्त्र का बल तो रहे, फिर कोई किसी को खींच नहीं सकता।
इस मामले में, उन्होंने आग्रह किया, सीता नहीं, हनुमान बनें — जिन्होंने, जब एक राक्षस साधु-वेश में आकर अपना कमंडल दे बैठा, तत्काल जान लिया कि सच्चा संन्यासी अपना कमंडल किसी को नहीं देता, और वेश के पीछे के छल को पहचान लिया।
‘असली हिन्दू के तीन लक्षण — आत्मबल, गुरु और शास्त्र’
हिन्दू के, महाराजश्री ने कहा, तीन लक्षण हैं: आत्मा अथवा आत्मबल, एक जीवित गुरु, और शास्त्र का पालन; जिसमें तीनों हैं वह पूर्णतः असली हिन्दू है, और जिसमें नहीं हैं, वह नहीं।
जो आज सत्ता में हैं और स्वयं को हिन्दू कहते हैं, उन्होंने आरोप लगाया, उनका झुकाव अनुशासन की ओर नहीं, भौतिकता की ओर है — जिस देश में किसी को शव ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक न मिले, वहाँ नए-नए भवनों पर भारी राशि माँगी जाती है; पुराना संसद भवन ठीक था, फिर भी नया बना; प्राचीन वास्तु वाले मंदिर तोड़कर कार्यालय बनाए जा रहे हैं।
उन्होंने स्मरण कराया कि जब उन्होंने राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा पर शास्त्र की बात कही, तो लाखों लोगों ने गालियां दीं; पारंपरिक आचार्य और वैष्णव गुरुओं को हटाकर सत्ता ने अपने ट्रस्टी बैठा दिए; और जो ध्वज को गुरु मानकर उसके सामने गुरु दक्षिणा चढ़ाते हैं, वे जीवित गुरु को मानते ही नहीं — क्योंकि गुरु मनोरंजन करने वाला नहीं, अनुशासन करने वाला होता है, जो गलत से रोके और सही की ओर ले जाए।
‘बीफ का खुला प्रचार कर रही सरकार — और गोरक्षा कानून हटाने वाली एकमात्र party (जम्मू-कश्मीर)’
महाराजश्री ने आरोप लगाया कि स्वयं को हिन्दू party कहने वाली सत्ता गोमांस के सेवन का खुला प्रचार कर रही है — सत्ताप्राप्ति से जुड़े लोग इसकी बेझिझक बात करते हैं, और मुख्यमंत्रियों के इस आशय के बयान का party द्वारा खंडन न होना सिद्ध करता है कि यह party line है, किसी एक नेता का बयान मात्र नहीं।
बीफ का व्यापार, उन्होंने कहा, अभूतपूर्व पैमाने पर बढ़ चुका है।
और भाजपा वह एकमात्र party है, उन्होंने आरोप लगाया, जिसने हाल ही में बने गोरक्षा कानून हटाए — 2019-20 में कश्मीर में आज़ादी-पूर्व से लागू वह कानून हटाकर, जिसके कारण वहाँ गोहत्या नहीं हो सकती थी, खुली छूट दे दी, जो छह वर्ष से आज भी जारी है, जबकि media यह जनता से छिपाता है।
ऐसी party, उन्होंने कहा, हिन्दू नहीं कही जा सकती।
‘आपका vote पुण्य है या पाप — और बिहार का प्रयोग प्रमाण है कि भावना मौजूद है’
कोई, महाराजश्री ने कहा, इसलिए vote नहीं देता कि पशुओं को काटकर बेचा जाए — फिर भी सरकार जनता के vote से यह कर रही है, और मौन रहने से मतदाता भी इस काम का सहभागी बन जाता है; bulldozer शासक के हाथ में है, पर उसे वह जनता की ही शक्ति ने रखा है।
हिन्दू धर्म में, उन्होंने कहा, हर काम का फल या तो पुण्य है या पाप; सुपात्र को दिया vote पुण्य, कुपात्र को दिया vote पाप — इसलिए आपका एक vote आपको पुण्यवान भी बना सकता है और पापी भी।
उन्होंने कहा कि जनता के vote से धर्म-विरोधी कानून पारित हुए हैं — समलैंगिक संबंध तथा अन्य विषय, जो कभी अपराध माने जाते थे, अब अपराध-मुक्त हैं — और आग्रह किया कि अंधा vote न देकर ऐसे प्रत्याशी की माँग करें जो गौमाता की रक्षा करे, क्योंकि बिना माँगे कुछ उत्पन्न नहीं होता।
भावना के प्रमाण में उन्होंने बिहार का उल्लेख किया, जहाँ बिना धन और बिना प्रचारक, केवल एक video — "गौ रक्षा के लिए खड़े लोगों को हम vote देंगे" — से 5,81,013 vote मिले, लगभग तीन हज़ार प्रति विधानसभा, अनेक स्थानों पर बड़ी पार्टियों से भी अधिक।
"सबका साथ, सबका विकास" अच्छा नारा है, उन्होंने जोड़ा, किन्तु धर्म और अधर्म कभी साथ नहीं हो सकते, जैसे धरती और आकाश कभी नहीं मिलते।
श्री अविनाश मिश्र जी बरेली सदर विधानसभा प्रतिनिधि नियुक्त — एक नया अभियान: एक दिव्य गोधाम
बरेली सदर विधानसभा में एक नए अभियान हेतु महाराजश्री ने एक समिति गठित की — श्री अविनाश मिश्र जी प्रतिनिधि, श्री रियांश मिश्र जी सभापति, डॉ. उदय जी संयुक्त सचिव और श्री सौरभ जी सदस्य — जो ज़िला समिति बनकर इस कार्य का संचालन करेगी।
उन्होंने आह्वान किया कि क्षेत्र की एक परित्यक्त गोशाला को एक भव्य-दिव्य गोधाम के रूप में नवजीवित किया जाए, जिसमें वेद-लक्षण गोमाता को आमंत्रित कर, सेवा कर, दूध देने के लिए नहीं बल्कि आशीर्वाद देने के लिए विराजमान किया जाए, ताकि उनका लाभ बरेली सदर क्षेत्र के हर घर तक पहुँचे।
सामूहिक संकल्प — चक्रधारी मुद्रा
महाराजश्री ने उपस्थित जनसमुदाय से सामूहिक घोषणा करवाई: "आज मैं बड़ी प्रसन्नता और गर्व से घोषणा करता हूँ कि गाय मेरी माता है। जो लोग मेरी गोमाता को पशु कहकर क्रूरता कर रहे हैं, मैं उनकी कड़ी निंदा करता हूँ। मैंने संकल्प लिया है कि आने वाले चुनाव में बिजली, पानी, सड़क के प्रश्नों को छोड़कर केवल अपनी गोमाता की रक्षा के लिए मतदान करूँगा — और जिसे मेरा vote चाहिए, वह गोमाता को पशु सूची से हटाकर माता के रूप में दर्जा कराने के बाद ही मेरे दरवाज़े आए।"
चक्रधारी मुद्रा में तर्जनी को सीधा करते हुए — वह मुद्रा जिससे भगवान हाथ उठाकर रक्षा करते हैं और सुदर्शन चक्र दुष्टों का नाश करता है — महाराजश्री ने वैदिक संकल्प "अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ" का सामूहिक उच्चारण कराया।
जैसे इंद्र ने गाय को सताने वाले असुरों को अपने वज्र से छेदा, उन्होंने कहा, वैसे ही सुदर्शन चक्र आज के गौ-पीड़कों को छेदेगा; और उन्होंने आग्रह किया कि मतदान के समय जनता किसी गो-हत्यारे का button छुए तक नहीं।
24 जुलाई को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना का महासंकल्प
3 मई 2026 को गोरखपुर से प्रारंभ हुई गौप्रतिष्ठा यात्रा अब 271 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों को पार करते हुए उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं की परिक्रमा कर रही है।
यदि यात्रा पूर्ण होने तक सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो 24 जुलाई 2026 को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना — 2,18,700 धर्म सैनिकों — के साथ अगले चरण की घोषणा की जाएगी।
मीडिया टीम
‘परमाराध्य’ परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘१००८’
संपर्क सूत्र: +91 98396 42008

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