Dhoomil

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यदि कबीर ने तत्कालीन समाज व्यवस्था एवं धर्म के आडंबर को चुनौती दी तो धूमिल लोकतंत्र से मोहभंग पर कविता करते हुए सीधे संसद से प्रश्न करते रहे, ‘एक आदमी रोटी खाता है/ एक आदमी रोटी बेलता है/ एक तीसरा आदमी भी है/ जो न रोटी बेलता है/ न रोटी खाता है/ वह सिर्फ रोटियों से खेलता है/ मैं पूछता हूं/ यह तीसरा आदमी कौन है/ मेरे देश की संसद मौन है।’ संसद से केवल प्रश्न ही नहीं पूछते उस पर प्रहार भी करते हैं, ‘म

08/02/2026

पुण्यतिथि विशेष

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