Arbind pandey

Arbind pandey

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Photos from Arbind pandey's post 18/04/2026

"नारी सब भूल जाती है, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती। इसलिए संसद में कांग्रेस और उसके सहयोगियों के व्यवहार की कसक हर नारी के मन में हमेशा रहेगी। संसद में नारीशक्ति वंदन संशोधन का जिन भी दलों ने विरोध किया है, वे लोग नारी शक्ति को for granted ले रहे हैं।"
आज आदरणीय प्रधानमंत्री जी का राष्ट के नाम सम्बोधन को आदरणीय अरविंद मिश्रा जी मीडिया प्रभारी भाजपा व अमित जी हिमांशु जी के साथ सुना

13/04/2026

"भगवान परशुराम जी की तरह धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर अडिग रहना ही हमारा संकल्प है।
अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और धर्म की रक्षा ही सच्चा जीवन है।"

"परशुराम की परंपरा है—
अन्याय के सामने झुकना नहीं,
और धर्म के लिए रुकना नहीं!"

Photos from Arbind pandey's post 12/04/2026

आज कृष्णा वाटिका लॉन में शिवपुर विधानसभा के लमही मंडल द्वारा आयोजित “पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान–2026” के अंतर्गत उपस्थित सभी सम्मानित कार्यकर्ताओं को संबोधित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर आयोजित अंतिम सत्र में “सोशल मीडिया, AI, नमो ऐप एवं सरल ऐप” विषय पर कार्यकर्ताओं के साथ सार्थक संवाद हुआ और संगठन को सशक्त बनाने हेतु महत्वपूर्ण विचार साझा किए गए।

निवर्तमान मंडल अध्यक्ष, वर्तमान मंडल अध्यक्ष एवं समस्त टीम द्वारा दिए गए स्नेह, सम्मान एवं सहयोग के लिए आप सभी का हृदय से आभार।

आपका स्नेह ही हमारी शक्ति है।

#सनातनी

09/04/2026

सोचा याद दिला दूँ
सपा के पाले हुए गुंडों ने कितने ब्राह्मणों को मारा

वाराणसी के नरिया में गरजी AK- 47..

छात्र राजनीति का 29 वर्ष पुराना बनारस का काला अध्याय है नरिया हत्या कांड।विद्यापीठ छात्र संघ अध्यक्ष और उनके तीन साथियों की हुई थी निर्मम हत्या। 6 अप्रैल 1997 लंका इलाके के नरिया तिराहे पर शाम ढल चुकी थी।मारुति कार धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के नवनिर्वाचित छात्रसंघ अध्यक्ष रामप्रकाश पांडेय, पूर्व अध्यक्ष सुनील राय, भोनू मल्लाह और मुन्ना राय उसमें सवार थे। कार बीएचयू अस्पताल से लौट रही थी, जहां पूर्व विधायक सत्यप्रकाश सोनकर भर्ती थे। गाड़ी में उनके साथ थे आचार्य राजेंद्र त्रिवेदी—सुनील राय के साथी और घटना के एकमात्र जीवित चश्मदीद।

अचानक एक वैन ने कार को घेर लिया। उसके अंदर से एके-47 की ताबड़तोड़ गोलियां बरसने लगीं। करीब 150 गोलियां चलीं। धमाकों की गूंज पूरे इलाके में गूंज उठी। रामप्रकाश पांडेय, जिन्होंने अभी छात्रसंघ अध्यक्ष की शपथ भी नहीं ली थी, मौके पर ही ढेर हो गए। सुनील राय,भोनू मल्लाह और मुन्ना राय भी वहीं प्राण त्याग गए। चार युवा छात्र नेता एक ही झटके में काल के गाल में समा गए।

राजेंद्र त्रिवेदी को लगभग 15 गोलियां लगीं। मारुति कार खून से लथपथ हो गई। इलाके में दहशत फैल गई।यह हत्याकांड वाराणसी के छात्र राजनीति के इतिहास में सबसे काला दिन बन गया

मुन्ना बजरंगी-जो उस समय पूर्वांचल के उभरते गैंगस्टर के रूप में जाना जा रहा था-इस वारदात का मास्टरमाइंड था।

कुछ लोग कहते है उसके गुर्गों ने हमला किया, जबकि कई प्रत्यक्षदर्शी और पुलिस सूत्रों ने उसे सीधे एके-47 चलाते बताया। यह पूर्वांचल में एके-47 का पहला खुला इस्तेमाल था। उस समय पुलिस के पास भी इतना आधुनिक हथियार सीमित संख्या में था।

मुन्ना बजरंगी ने इसे अपराध की दुनिया में नया हथियार बनाया और डर का माहौल पैदा किया।

राजेंद्र त्रिवेदी, जो पेशे से वकील हैं, एक महीने तक सर सुंदरलाल अस्पताल में जिंदगी-मौत की जंग लड़ने के बाद वे बच गए। लेकिन उनके शरीर में आज भी कई गोलियां दबी हैं—याद दिलाती हुईं उस बर्बर हमले की।यह हत्याकांड महज एक अपराध नहीं था। यह काशी विद्यापीठ की छात्र राजनीति में गहरी साजिश और प्रतिशोध का नतीजा था।

बाद में 2002 में मुन्ना के गुर्गों ने अनिल राय की भी हत्या कर दी—उसी एके-47 से।

29 साल बीत गए,लेकिन नरिया हत्याकांड की यादें आज भी वाराणसी की छात्र राजनीति को झकझोरती हैं। चार युवा सपनों को गोलियों ने कुचल दिया। राजेंद्र त्रिवेदी जैसे गवाह आज भी जीवित हैं—सबूत के तौर पर कि अपराध कभी पूरी तरह मिटता नहीं। यह घटना सिर्फ एक हत्याकांड नहीं, बल्कि यूपी की आपराधिक राजनीति का आईना है, जहां छात्र संघ से शुरू होकर विधानसभा तक हिंसा का सिलसिला चला आ रहा था।

नोट: मुन्ना बजरंगी फाइल फोटो..

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