Pt Rama ji Shukl

Pt Rama ji Shukl

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08/08/2025

“तानपुरे की धुन में रमे, सुरों के साधक—ठुमरी सम्राट पं. रामाजी शुक्ल जी।” - बनारस घराने के एक प्रमुख गायक थे। उनकी संगीत साधना और ठुमरी शैली में योगदान को आज भी संगीत प्रेमी सम्मानपूर्वक याद करते हैं।
उनकी एक पुरानी तस्वीर, जिसमें वे भूमि पर बैठकर तानपुरा बजा रहे हैं, उनकी संगीत में गहराई और समर्पण को दर्शाती है।

Photos from Pt Rama ji Shukl's post 28/07/2025

स्वर, साधना और सन्यास की स्मृति को समर्पित — पं. रामाजी शुक्ल जी का श्रद्धांजलि समारोह।
ठुमरी सम्राट की — 53वीं पुण्य स्मृति पर एक संगीतमय समर्पण।
"53 वर्षों बाद भी गूंजता है स्वरयोगी का आलाप
"स्वरों की समाधि में लीन साधक पं. रामाजी शुक्ल को सुरों की वंदना समर्पित —
कल 27-07-2025 रामा जी शुक्ल स्मृति न्यास एवं भाव प्रभा पद्म संस्थान क़े संयुक्त तत्त्वावधान मे *रामा स्मृति* कार्यक्रम का आयोजन भदैनी स्थित भाव प्रभा पद्म संस्थान क़े प्रथमेश सभागार मे किया गया। आयोजन का विधिवत शुभारम्भ मुख्य अतिथि ख्यात चिकित्स्क *डॉ रमेश कुमार भाटिया एवं* पद्मश्री पं डॉ राजेश्वर आचार्य क़े करकमलो द्वारा दीप आलोकन कर किया गया.।अतिथियों का माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र प्रदान कर स्वागत किया पं रामा जी शुक्ल क़े प्रपौत्रद्वय पं चंद्र कृष्ण शुक्ल एवं श्री संजीव शुक्ल तथा प्रपौत्र वधू श्रीमती गौरी शुक्ला द्वारा। संयोजन रहा पं रामा जी क़े प्रपौत्र श्री श्रीश शुक्ला का। इस अवसर पर डॉ रमेश भाटिया ने पं रामा जी क़े कृतित्व को वर्तमान पीढ़ी क़े लिए प्रेरणा स्रोत और अनुकरणीय बताते हुए आयोजन समिति की सराहना की. पद्मश्री पं राजेश्वर आचार्य ने पं रामा जी ने अपनी बाल अवस्था मे पं रामाजी क़े समक्ष अपने गायन का स्मरण करते हुए उन्हें आत्माभिव्यक्ति का पथिक कहा। प्रथम प्रस्तुति रही लोकप्रिय कलाकार श्रीमती चंदारानी द्वारा गायन की आपके साथ तबला संगति रही श्री अशेष नारायण मिश्र की एवं संवादिनी पर साथ दिया श्री राघवेन्द्र शर्मा ने एवं वायलिन पर साथ दिया श्री हेमंत कुमार ने। गायन मे सहभागिता रही आपकी शिष्या सुश्री श्रेया सोनकर ने.। गायन का आरम्भ हुआ राग मारु बिहाग मे विलंबित एकताल मे निबद्ध बंदिश से बोल थे *रसिया म्हारा*। इसके उपरांत द्रुत तीन ताल मे निबद्ध बंदिश से रससिक्त किया बोल थे *प्रीतम मोरा साँवरा*। साथ ही तीनताल मे निबद्ध एक और बंदिश से आनंदित किया बोल थे *जागु मै सारी रैन बलमा*।समापन हुआ कजरी से बोल थे बदरिया रूम झूम क़े. अगली प्रस्तुति रही *डॉ चारुचंद्र क़े* गायन की आपके साथ सभी संगत कलाकारों ने पुनः सधी संगति प्रदान की। डॉ चारुचंद्र क़े गायन का आरम्भ हुआ राग मारवा मे मध्यतीन ताल मे निबद्ध बंदिश से हर्षित किया बोल थे *सुघर सुघर बैठे सब गुणीजन।* धन्यवाद ज्ञापित किया पं रामा जी शुक्ल स्मृति न्यास की अध्यक्षा डॉ शिवानी शुक्ला आचार्य ने । इस अवसर पर कलाकार श्री नागेंद्र शर्मा कलाधर्मी श्री पीयूष आचार्य आदि सुधीजन उपस्थित रहे. संचालन किया गया डॉ प्रीतेश आचार्य द्वारा।

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