Dr. Rahul Rajbhar
13/03/2026
मेरे एक प्रिय साथी ने बोला आप इतने समय से राजनीति कर रहे हैं उससे क्या हासिल किया
अपना जवाब था ~~~
#राजनीति कोई ऐसी मुकाम नहीं है जिसे आपको पाना है
या जहां आपको जाना है
बल्कि यह एक प्रक्रिया है - जिने का, रहने का और काम करने का ढंग है
जिससे आप आए दिन बदलाव करते हैं - सोच के स्तर पर, बोध के स्तर पर और चेतना के स्तर पर
जिसका ठोस परिणाम हासिल होना ही है
राजनीति ~ शिक्षण ~ का काम है जिसे हम रोज करते हैं
27/02/2026
भारत स्वाधीन गाँवों का स्वाधीन देश था !
मुगलों के बाद स्वाधीन गाँवों का गुलाम देश हो गया !
अंग्रेजों के बाद गुलाम गांव का गुलाम देश हो गया !
आजादी के बाद गुलाम गांव का आजाद देश है !
23/02/2026
एक ब्राम्हण परिवार में पैदा हुए उच्च शिक्षित व्यक्ति ने लोगों से पैसे, जमीन और दूसरी आवश्यक चीजें मांगकर उच्च शिक्षा के लिए एक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय बनवाया। उन्हें महामना कहा जाता है। आज पूरे बनारस में जो सम्मान और श्रद्धा महामना मदन मोहन मालवीय के प्रति है, शायद ही किसी और के प्रति हो।
एक गरीब धोबी परिवार में पैदा हुआ व्यक्ति, जिसे पढ़ने का अवसर बिलकुल नहीं मिला। उसने समाज भी समाज के विभिन्न लोगों से धन, जमीन और अन्य जरुरत की वस्तुएं मांगकर कई स्कूल बनवाये। आज हमारे उस पुरखे संत गाडगे का परिनिर्वाण दिवस है।
संत गाडगे की नजर में शिक्षा का क्या स्थान था, इसे उनकी इन बातों से समझा जा सकता है, जब वो कहते हैं कि एक जून खाओ, बर्तन न हो तो हाथ में लेकर खाओ, फटे कपड़े पहनो किन्तु अपने बच्चों को किसी भी कीमत पर पढ़ाओ।
यह बिडंबना ही है कि, मालवीय जी के बारे में कहा गया कि उन्होंने दान लेकर बीएचयू बनवाया और गाडगे बाबा को कहा गया कि, उन्होंने भीख मांगकर स्कूल बनवाये। यह भारतीय समाज के विभिन्न जातियो में जन्में और कलम के माध्यम से समाज के विभिन्न इदारों की व्याख्या और विश्लेषण करने वालों की दृष्टि है। यह भी कहा जा सकता था कि इन लोगों ने जनसहयोग से ये संस्थान बनवाये।
महाराष्ट्र आज शिक्षा और तद्जनित रोजगार, जागरूकता, उद्योग, अधिकार आदि के मामले में यूपी से कितना बेहतर है तो इसकी नींव में फुले के सत्यशोधक समाज, शाहूजी महाराज तथा गाडगे बाबा जैसे लोगों का होना है।
उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा में से एक का चयन करना पड़े तो कोई भी संवेदनशील और जागरूक इंसान स्कूली शिक्षा को ही बेहतर और विस्तृत करना चाहेगा। यह नजीर हमें जोतीराव फुले, सावित्रीबाई फुले और फ़ातिमा शेख़ से लेकर शाहूजी महराज और गाडगे बाबा में बख़ूबी दिखती है। शाहूजी ने तो बाकायदे डिग्री कॉलेजों और स्कूलों में से स्कूलों को अधिक सरकारी सहायता और सुविधा देने तथा अधिक से अधिक स्कूल खोले जाने की बाक़ायदा नीति भी बनाई थी।
जन्मदिवस पर फुले और फ़ातिमा के विचारों के सच्चे वारिस और हमारे महान पुरखे गाडगे बाबा को नमन।
Vikash Anand
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