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26/12/2025

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(Hindi me)
Maths, science
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25/12/2025

Horror stories

रात के ठीक 2:17 बजे आरव की नींद खुली।
कमरे में अजीब सी ठंड थी। पंखा बंद था, खिड़की बंद थी, फिर भी ऐसा लग रहा था जैसे कोई बर्फीली साँस उसकी गर्दन पर पड़ रही हो। वह उठकर बैठ गया।
तभी उसे महसूस हुआ—
कमरे में वह अकेला नहीं था।
दीवार के पास… कुछ खड़ा था।
न पूरी तरह इंसान, न पूरी तरह परछाई।
उसका शरीर टेढ़ा था, गर्दन असामान्य रूप से लंबी, और आँखें…
आँखें नहीं थीं। बस दो काले गड्ढे।
आरव की आवाज़ गले में ही अटक गई।
वह चीज़ धीरे-धीरे बोली—
“भागने की कोशिश मत करना…”
आरव ने चीखना चाहा, लेकिन मुँह से आवाज़ नहीं निकली। तभी अचानक सब गायब हो गया।
कमरा फिर से सामान्य।
“सपना था…”
उसने खुद से कहा।
लेकिन तभी उसने देखा—
उसके मोबाइल पर 17 मिस्ड कॉल थे…
उसी समय के। 2:17 AM।
और कॉल करने वाला नंबर…
उसका अपना।
डर के मारे उसने लाइट जलाई और दरवाज़े की तरफ बढ़ा। जैसे ही उसने हैंडल पकड़ा, दरवाज़ा अपने-आप खुल गया।
बाहर उसका घर नहीं था।
वह किसी लंबे, अंधेरे कॉरिडोर में खड़ा था। दीवारों से पानी टपक रहा था। फर्श पर काले हाथों के निशान थे, जैसे किसी ने घिसटते हुए निकलने की कोशिश की हो।
पीछे से किसी ने फुसफुसाया—
“यहाँ से कोई बाहर नहीं गया…”
आरव भागा।
भागते-भागते उसने एक दरवाज़ा खोला।
अंदर…
वह खुद बैठा था।
चेहरा नीचे झुकाए।
आरव ने काँपती आवाज़ में कहा,
“तू… तू कौन है?”
वह दूसरा आरव धीरे-धीरे सिर उठाकर मुस्कुराया।
उसके दाँत इंसानी नहीं थे।
“मैं वो हूँ जो भाग नहीं पाया।”
तभी पीछे से तेज़ क़दमों की आवाज़ आई।
कॉरिडोर में वही चीज़ आ रही थी—
लंबी गर्दन, उलटी टाँगें, और ज़मीन पर घिसटता हुआ शरीर।
आरव ने दरवाज़ा बंद किया।
कमरे की दीवारों पर अब शब्द उभर रहे थे—
खून से नहीं…
अंदर से रिसते हुए।
“यह जगह तुम्हारे डर से बनी है।”
“हर बार जब तुम बचने की सोचोगे…”
“हम और पास आएँगे।”
आरव रोने लगा।
अचानक ज़मीन धँस गई।
वह नीचे गिरता चला गया…
गिरता… गिरता…
और एक कमरे में आ गिरा।
वहाँ 12 लोग बैठे थे।
सबके चेहरे एक जैसे थे—
उसके।
सब एक साथ बोले—
“हम सबने भागने की कोशिश की।”
आरव चिल्लाया,
“बाहर का रास्ता कहाँ है??”
सब हँस पड़े।
एक ने अपनी गर्दन घुमाई—180 डिग्री—और बोला,
“यही तो मज़ाक है… बाहर कभी था ही नहीं।”
तभी लाइट बंद।
अंधेरे में किसी ने उसका हाथ पकड़ा।
हाथ ठंडा था…
हड्डियों जैसा।
वही आवाज़ फिर आई—
“अब तुम भी यहीं रहोगे।”
अचानक आरव की आँख खुली।
वह अपने बिस्तर पर था।
सुबह हो चुकी थी।
वह हँसने लगा—
“सपना था… बस सपना…”
लेकिन तभी उसने देखा—
उसकी परछाई…
दीवार पर नहीं थी।
वह उसके पीछे खड़ी थी।
और मुस्कुरा रही थी।
゚viralシfypシ゚viralシalシ

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