Tree Foundation
05/06/2026
शीशम,,,,,, महिलाओं के लिए अमृत से कम नहीं है।।
शीशम का पेड़ काफी बड़ा वृक्ष होता है, जो औषधीय गुणों का भंडार है, इस पौधे में कई ऐसे पोषण तत्व होते हैं, जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते हैं,इस पेड़ मे कई औषधीय गुण पाए जाते हैं।
हमारे आसपास ऐसे कई प्रकार के औषधीय पेड़ और झाड़ियां हैं, जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते हैं,यह हमारे स्वास्थ्य को ठीक करने में अपना एक अहम योगदान रखते हैं, क्योंकि इन औषधीयों का आयुर्वेद में काफी बड़ा महत्व है।
जो पेड़ आसानी से हर जगह आपको देखने के लिए मिल जाएगा। इस पेड़ के फल, फूल, छाल और पत्तियां, हर चीज काफी महत्व है।
अगर पेट में जलन हो रही हो, तो शीशम के पत्तों का रस या काढ़ा पीना बहुत लाभदायक होता है।
और इसके पत्तों का शरबत पीने से सेहत को कई लाभ होते हैं, शीशम के पत्तों का शरबत बनाकर पीने से पाचन शक्ति बेहतर होती है, इसके साथ ही नियमित रूप से इसका सेवन करने से गैस, अपच और एसिडिटी में आराम मिलता है।
इसका रस पीने से ओरल हेल्थ में सुधार होता है और जिन लोगों को मुंह से बदबू आती है या दांतों का दर्द व मसूड़ों में तकलीफ होती है, तो वो लोग भी इसके पत्तों को चबाकर समस्या ठीक कर सकते हैं।
आंखों की बीमारी जैसे आंखों में होने वाली जलन , सूजन आंखो का लाल होना इन सबमें में शीशम का इस्तेमाल फायदा पहुंचाता है। शीशम के पत्ते के रस में मधु मिलाकर 1-2 बूंदें आंखों में डालने से आंखों के रोग में आराम मिलता है।
शीशम का तेल चर्म रोगों पर लगाने से लाभ पहुँचता है। इससे खुजली भी ठीक हो जाती है।
शीशम के पत्तों के लुआब को तिल के तेल में मिला लें। इसे त्वचा पर लगाने से त्वचा की बीमारियों में लाभ होता है।
महिलाएं स्तनों में सूजन की बीमारी में भी शीशम का इस्तेमाल कर सकती हैं। शीशम के पत्तों को गर्म कर स्तनों पर बांधें। इससे और इसके काढ़े से स्तनों को धोने से स्तनों की सूजन मिट जाती है।
हैजा के इलाज के लिए 5 ग्राम शीशम के पत्ते में 1 ग्राम पिप्पली, 1 ग्राम मरिच तथा 500 मिग्रा इलायची मिलाएं। इसे पीसकर 500 मिग्रा की गोली बना लें। 2-2 गोली सुबह और शाम देने से हैजा में लाभ होता है।
आप दस्त को रोकने के लिए भी शीशम का उपयोग कर सकते हैं। शीशम के पत्ते, कचनार के पत्ते तथा जौ लें। तीनों को मिलाकर काढ़ा बनाएं।
अब 10-20 मिली काढ़ा में मात्रानुसार घी तथा दूध मिला लें। इसे मथकर पिच्छावस्ति देने से दस्त पर रोक लगती है।
मूत्र रोग जैसे पेशाब का रुक-रुक कर आना, पेशाब में जलन होना, पेशाब में दर्द होना आदि में भी शीशम उपयोगी साबित होता है। 20-40 मिली शीशम के पत्ते का काढ़ा बनाएं। इसे दिन में 3 बार पिलाएं। इससे पेशाब का रुक-रुक कर आना, पेशाब में जलन होना, पेशाब में दर्द होना आदि में लाभ होता है। इसके साथ ही 10-20 मिली पत्ते काढ़ा का सेवन करने से वसामेह में लाभ होता है।
रक्त संचार को सही रखने में भी शीशम का प्रयोग करना अच्छा रहता है। 5 मिली शीशम के पत्ते के रस में 10 ग्राम चीनी तथा 100 मिली दही मिलाकर सेवन करने से रक्त संचार या ब्लड शर्कुलेशन ठीक रहता है।
रक्त विकार को ठीक करने के लिए शीशम के 3-6 ग्राम सूखे चूर्ण का शरबत बनाकर पिलाएं। इससे रक्त विकार का ठीक होता है।
त्वचा रोगों के लिए फायदेमंद है,शीशम के पत्तों का पेस्ट त्वचा पर लगाने से फोड़े, मुंहासे और फुंसियां दूर होती हैं। साथ ही यह त्वचा की रंगत को भी सुधारता है
इंफेक्शन से बचाव में मददगार है,शीशम के पत्तों में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण शरीर को इंफेक्शन से बचाने में मदद करते हैं। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने का काम करते हैं।
शीशम का रस शरीर को अंदर से साफ करने यानी डिटॉक्स करने में मदद करता है। इससे शरीर हल्का महसूस होता है और त्वचा भी साफ दिखाई देती है।
अर्थराइटिस के दर्द में आराम जोड़ों के दर्द और सूजन में शीशम के पत्तों का काढ़ा पीने से राहत मिलती है। पत्तों का पेस्ट सीधे जोड़ों पर लगाना भी असरदार होता है।
चोट और घाव में राहत चोट लगने या घाव होने पर शीशम के पत्तों का पेस्ट लगाने से दर्द कम होता है और घाव जल्दी भरता है। यह प्राकृतिक हीलिंग में मददगार है।
महिलाओं के लिए शीशम बेहद गुणकारी है इसके 20 पत्ते लेकर मिश्री मिलाकर पीस लें और पी जाएं तो लिकोरिया सफेद पानी को खत्म कर देगा
अधिक माहवारी आती है तो भी यही प्रयोग करें लाभ होगा
उसी तरह से पुरुषों के लिए काम करता है विधि वही है जो ऊपर वर्णित है
ये पोस्ट सिर्फ जानकारी देती है शीशम का सेवन किसी आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही करें 🙏,,,
05/06/2026
अश्वगंधा एक महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका उपयोग प्राचीन काल से शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए किया जा रहा है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, लीवर टॉनिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल जैसे गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को रोगों से बचाने के साथ-साथ ऊर्जा और प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं। इसे आयुर्वेद में "इंडियन जिनसेंग" भी कहा जाता है क्योंकि यह शरीर को पुनर्जीवित करने की क्षमता रखता है।
🌿 अश्वगंधा के प्रमुख औषधीय फायदे जानिए —
1️⃣ शक्ति बढ़ाने में मददगार :-
अश्वगंधा शरीर की ताकत और सहनशक्ति को बढ़ाने में सहायक है। यह थकान और कमजोरी को दूर कर शरीर को मजबूत और ऊर्जावान बनाता है।
2️⃣ ब्लड प्रेशर और तनाव पर नियंत्रण :-
अश्वगंधा का नियमित सेवन ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करता है। यह मानसिक तनाव, चिंता और थकान को कम करके मन को शांत रखता है।
3️⃣ पुरुषों के लिए लाभदायक :-
अश्वगंधा पुरुषों में हार्मोनल संतुलन बनाने, शुक्राणु की गुणवत्ता सुधारने और टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। यह समग्र पुरुष स्वास्थ्य के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक है।
4️⃣ जोड़ों के दर्द से राहत :-
अश्वगंधा का तेल जोड़ो के दर्द और सूजन को कम करने में बहुत उपयोगी है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर के दर्द और अकड़न से राहत दिलाते हैं।
5️⃣ नींद की गुणवत्ता में सुधार :-
अगर आपको नींद न आने की समस्या है, तो अश्वगंधा एक बेहतरीन उपाय है। यह तनाव और चिंता को कम करके मन को शांत करता है, जिससे नींद गहरी और सुकूनभरी आती है।
🌿 अश्वगंधा उपयोग करने का तरीका —
अश्वगंधा का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है। इसकी जड़ों को सुखाकर पाउडर बनाएं और दूध या गुनगुने पानी के साथ लें। इसके पत्तों से बना पाउडर भी स्वास्थ्यवर्धक होता है। अश्वगंधा का तेल शरीर की मालिश में उपयोग किया जा सकता है, जिससे मांसपेशियों को आराम और जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।
🌿 सावधानियां —
अश्वगंधा भले ही प्राकृतिक और आयुर्वेदिक औषधि हो, लेकिन किसी भी हर्बल सप्लीमेंट की तरह इसे भी सीमित मात्रा में लेना जरूरी है।
✨ अगर यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो पोस्ट को लाइक करें और हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें ताकि आप रोजाना ऐसे ही उपयोगी पौधों और गार्डनिंग टिप्स की जानकारी पा सकें, धन्यवाद 🌿
#अश्वगंधा
03/06/2026
आयुर्वेद में कई जड़ी-बूटियां ऐसी हैं, जिनका सदियों से इस्तेमाल कई गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है। ऐसी ही एक प्रभावी जड़ी-बूटी है गोखरू (Tribulus Terrestris)। आयुर्वेद में गोखरू का फल, पत्ता और तना औषधि के रूप में इस्तेमाल किए जाते है। यह वात, पित्त और कफ दोष को संतुलित करने में मदद करती है और शरीर की कई समस्याओं को दूर करने में असरदार मानी जाती है।
✅️ गोखरू के प्रमुख औषधीय उपयोग —
1️⃣ किडनी स्टोन से राहत :-
गोखरू में मूत्रवर्धक गुण पाए जाते हैं। यह पेशाब बढ़ाने में मदद करता है और नियमित सेवन से किडनी की पथरी को बाहर निकालने में सहायक हो सकता है। आयुर्वेद में सदियों से इसे किडनी स्टोन के इलाज में प्रयोग किया जाता रहा है। 5 ग्राम गोखरू चूर्ण को 1 चम्मच शहद के साथ दिन में तीन बार दूध या गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से पथरी टूटकर बाहर निकलने में मदद मिल सकती है।
2️⃣ डायबिटीज में फायदेमंद :-
डायबिटीज के मरीजों के लिए गोखरू का सेवन लाभकारी हो सकता है। इसमें मौजूद सैपोनिन ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है और शुगर को संतुलित रखने में सहायक माना जाता है।
3️⃣ सिरदर्द में राहत :-
कुछ लोगों में पित्त की अधिकता के कारण बार-बार सिरदर्द की समस्या होती है। गोखरू का सेवन पित्त को संतुलित करने में मदद करता है और इससे लगातार होने वाले सिरदर्द में राहत मिल सकती है।
4️⃣ स्पर्म काउंट बढ़ाए :-
आजकल खराब खानपान और जीवनशैली की वजह से पुरुषों में लो स्पर्म काउंट और फर्टिलिटी की समस्या आम हो गई है। गोखरू का नियमित सेवन स्पर्म उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता और गतिशीलता सुधारने में भी मदद करता है। गोखरू के 20 ग्राम फलों को 250 ml दूध में उबालकर सुबह-शाम पिलाने से स्पर्म संबंधी समस्याओं में फायदा मिलता है।
5️⃣ यूरिन इन्फेक्शन से राहत :-
गोखरू में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-माइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं। ये गुण यूरिन इन्फेक्शन को दूर करने में मदद करते हैं। साथ ही इसमें मूत्रवर्धक गुण होने के कारण बैक्टीरिया पेशाब के जरिए बाहर निकल जाते हैं, जिससे संक्रमण कम होता है। 20-30 ml गोखरू काढ़े में एक चम्मच शहद डालकर दिन में दो बार पिलाने से यूरिन इन्फेक्शन से राहत मिलती है।
✅️ गोखरू इस्तेमाल करने का तरीका —
1) चूर्ण के रूप में:- रोजाना 3–6 ग्राम गोखरू चूर्ण को दूध या गुनगुने पानी के साथ ले सकते है।
2) काढ़ा के रूप में:- गोखरू को काढ़े के रूप में 20–40 ml सेवन कर सकते हैं।
🌿 गोखरू आयुर्वेद की एक ऐसी जड़ी-बूटी है, जो किडनी, यूरिन, ब्लड शुगर और पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। इसे सही मात्रा और आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के अनुसार लेने से शरीर को कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।
27/05/2026
फिटकरी का पानी पौधों में डालने को लेकर सोशल मीडिया पर बहुत दावे किए जाते हैं—“100 से ज्यादा फल-फूल मिलेंगे”, “पौधा रॉकेट की तरह बढ़ेगा”—लेकिन सच यह है कि फिटकरी (Alum) कोई खाद नहीं है, बल्कि यह एक soil-corrector और disinfectant की तरह काम करती है।
सही तरह और सही पौधों पर इस्तेमाल करने से फायदा होता है, लेकिन गलत इस्तेमाल पौधे को नुकसान भी पहुँचा सकता है।
नीचे पूरी सच्चाई और सही तरीका दिया है 👇
🌿✨ फिटकरी का पानी पौधों में डालने के असली फायदे
✅ 1. मिट्टी का pH संतुलित करता है (slightly acidic बनाता है)
फिटकरी मिट्टी को हल्का अम्लीय बनाती है, जो इन पौधों को बहुत पसंद है:
गुलाब
हिबिस्कस (गुड़हल)
ब्लू अपराजिता
लेमन ग्रास
हाइड्रेंजिया
बेरीज़
साइट्रस पौधे
pH सही होते ही इन पौधों में
✔ फूल बढ़ते हैं
✔ कलियाँ जल्दी बनती हैं
✔ पत्तियाँ चमकदार होती हैं
✅ 2. मिट्टी में मौजूद फंगस और कीटाणुओं को कम करता है
फिटकरी में anti-fungal और anti-bacterial गुण होते हैं जिससे—
✔ जड़ों में सड़न कम होती है
✔ कीटाणु कम होते हैं
✔ मिट्टी हल्की व साफ रहती है
✅ 3. जड़ों की मजबूती और नमी पकड़ने की क्षमता बढ़ती है
इसके बाद पौधा
✔ ज्यादा फूल
✔ ज्यादा फल
✔ और तेज़ ग्रोथ
दिखाता है।
यही कारण है कि लोग कहते हैं—
“गमले में 100 की जगह 200 फूल आने लगे…”
(असल में पौधा स्वस्थ हो जाता है, इसीलिए फूल/फल खुद-ब-खुद बढ़ जाते हैं)
⚠️ लेकिन ध्यान रखें
फिटकरी को खाद समझकर ज़्यादा डालना पौधे को जला सकता है।
यह नाइट्रोजन-फॉस्फोरस-पोटैशियम (NPK) नहीं देता,
इसलिए इसे साथ में खाद देना जरूरी है।
🧴 फिटकरी का सही उपयोग तरीका
👉 तरीका 1: फिटकरी पानी बनाकर डालें
1 लीटर पानी
उसमें 2 ग्राम फिटकरी (एक मटर के दाने जितनी)
रातभर छोड़ दें
अगले दिन पौधे में डालें
⏰ हर 20–25 दिन में सिर्फ 1 बार डालें।
👉 तरीका 2: स्प्रे
1 लीटर पानी
1 ग्राम फिटकरी
पत्तियों और मिट्टी पर हल्का स्प्रे
⏰ महीने में 1 बार
❌ किन पौधों में कभी न डालें
फिटकरी मिट्टी को acidic करती है, इसलिए ये पौधे खराब हो सकते हैं:
मनी प्लांट
स्नेक प्लांट
पोथोस
एरिका पाम
ZZ प्लांट
पीस लिली
सक्यूलेंट्स
एलोवेरा
🌸 अगर फिटकरी के साथ यह 2 चीज़ें जोड़ दें → फूल दोगुने
फिटकरी पानी
सरसों खली / वर्मी कम्पोस्ट
गुड़ का पानी महीने में 1 बार
यह कॉम्बिनेशन मिट्टी को
✔ nutrients देता है
✔ acidity balance करता है
✔ सूक्ष्म पोषक तत्व उपलब्ध कराता है
जिससे गमले में फूल और फल वाकई काफी बढ़ जाते हैं।
अगर चाहें तो मैं आपको “कौन-कौन से पौधों में फिटकरी सबसे ज्यादा असर दिखाती है” या “फिटकरी + सरसों खली का फूल बढ़ाने वाला स्पेशल फॉर्मूला” भी बता सकता हूँ।
27/05/2026
बहेड़ा (Terminalia bellirica) आयुर्वेद की एक अत्यंत महत्वपूर्ण औषधीय जड़ी-बूटी है। इसे "त्रिफला" के तीन प्रमुख फलों — हरड़, बहेड़ा और आंवला में से एक माना जाता है। बहेड़ा का पेड़ भारत के कई हिस्सों में पाया जाता है और इसके फल, बीज, छाल और पत्तियों में अनेक औषधीय गुण मौजूद होते हैं।
✅️ बहेड़ा के प्रमुख औषधीय उपयोग —
1️⃣ पाचन तंत्र के लिए लाभकारी :-
बहेड़ा पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसका सेवन कब्ज, गैस, अपच और पेट की गड़बड़ी जैसी समस्याओं में राहत देने में सहायक माना जाता है। यह पेट को साफ रखने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है।
2️⃣ खांसी, जुकाम और गले की समस्या में उपयोगी :-
बहेड़ा में कफ को कम करने वाले गुण पाए जाते हैं। इसलिए आयुर्वेद में इसका उपयोग खांसी, जुकाम, गले की खराश और कफ की समस्या में किया जाता है। इससे गले को आराम मिलता है और बलगम को बाहर निकालने में मदद मिलती है।
3️⃣ बालों के लिए फायदेमंद :-
बहेड़ा का उपयोग कई आयुर्वेदिक हेयर ऑयल और हर्बल हेयर पाउडर में किया जाता है। यह बालों को मजबूत बनाने, बालों का झड़ना कम करने और समय से पहले सफेद होने की समस्या को कम करने में सहायक माना जाता है।
4️⃣ त्वचा के लिए लाभकारी :-
बहेड़ा में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो त्वचा के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं। यह त्वचा को साफ रखने और कुछ त्वचा समस्याओं में सहायक हो सकता है।
5️⃣ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक :-
बहेड़ा में एंटीऑक्सीडेंट और कई औषधीय तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं। नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बेहतर हो सकती है।
✅️ बहेड़ा उपयोग करने का तरीका —
■ बहेड़ा चूर्ण :-
बहेड़ा के सूखे फल का चूर्ण बनाकर आधा से एक चम्मच गुनगुने पानी या शहद के साथ लिया जा सकता है।
■ खांसी में :-
बहेड़ा के छोटे टुकड़े को मुंह में रखकर धीरे-धीरे चूसने से गले को आराम मिल सकता है।
■ बालों के लिए :-
बहेड़ा पाउडर को आंवला और रीठा के साथ मिलाकर हेयर पैक या हर्बल हेयर वॉश के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
■ त्रिफला के रूप में :-
आंवला और हरड़ के साथ मिलाकर त्रिफला चूर्ण के रूप में इसका सेवन किया जाता है, जो पाचन और शरीर की सफाई के लिए लाभकारी माना जाता है।
🌿 बहेड़ा एक प्राकृतिक औषधि है, जिसका सही तरीके से उपयोग करने पर कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। अगर यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो पोस्ट को लाइक करें और हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें, धन्यवाद 🙏
#बहेड़ा
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