Jain Stavan
जिनशासन का एक अजीब सा किस्सा:
सूरत के एक ३० साल के अविवाहित लड़के को छत्तीसगढ़ की एक लड़की का रिश्ता आया, दोनों श्वेताम्बर मूर्तिपूजक ही थे मगर लड़का तपागच्छ को मानता था और लड़की खतरगच्छ को मानती थी | लड़की अपने पिछले जीवन में मुमुक्षु रही थी (वर्तमान में लड़की का कोई दीक्षा का विचार नहीं है) तो उसने अपने गुरु भगवंत श्री जो पायधुनी खरतरगच्छ जैन संघ - मुंबई में चातुर्मास कर रहे थे उनसे सलाह ली, गुरुश्री के मन में कहीना कही आज भी एक आस थी की ये लड़की भविष्य में मेरे पास दीक्षा लेगी | और ये भाव होना गलत नहीं है मगर इसलिए उन्होंने ये बताया की लड़का तपागच्छ का है तो उनके गुरु ही आपके गुरु बनेगे - शायद भविष्य में भाव हुए दीक्षा के तो भी तपागच्छ में ही लेनी पड़ेगी | लड़का अच्छा था मगर लड़की और उनके परिवार सूरत उनके निवासस्थान से दूर होने के कारण विचार कर रहे थे - मगर साध्वी भगवंत श्री की ये बात सुनकर लड़की ने लड़के को सम्पूर्ण तरह से मना कर दिया |
जिनशासन में जैन बेटे-बेटिया की इंटरकास्ट विवाह बढ़ रहे है, तब ऐसे गच्छवाद को बढ़ावा देने की नीति कितनी योग्य पूर्ण है वो एक बड़ा सवाल है |
मेरी करबद्ध विनंती है खतरगच्छ के गच्छाधिपति और साध्वी भगवंत श्री जो पायधुनी खरतरगच्छ जैन संघ - मुंबई में चातुर्मास कर रहे है, और ऐसे विचार रखने वाले सारे व्यक्तिगण को की आज जिनशासन में जितने विकट परिस्थिया और आक्रमण है - हमे गच्छवाद को भूलकर साथ में आगे बढ़ना है तो ऐसे सुझाव देने से पहले इतना जरूर सोचे की जिस इंसानके लिए ऐसा बोला जा रहा है वो गच्छवाद को मानता है? ऐसे सुझाव हम जैनो को पास लाएंगे या दूर लेके जायेगे?
जिनेश्वर भगवंत की आज्ञा के विरोध में कुछ भी लिखा गया हो तो त्रिविधे - त्रिविधे मिच्छामि दुक्कडम |
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