Gaurav Tutorials
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कल नींद तो वैसे आई थी,
सपनों में बेटी आई थी।
दिन भर फिर आँख बरसती रही,
जाने कैसा बादल लाई थी।
बोली, "तुम ऐसा क्यों करते हो?
मैं तेरा ही तो हिस्सा थी।
बाबा! मुझसे क्यों डरते हो?"
मैंने कहा, "डरता नहीं, पर,
समाज की ये रीत बुरी,
बोझ समझ बैठा था तुझको,
बेटा पाने की थी आस पूरी।"
वो बोली, "कैसा बोझ थी मैं,
बस एक गुड़िया ही तो चाहती थी?
प्यार की भूखी थी, मैं बाबा,
तेरी ऊँगली पकड़ना चाहती थी।"
उसकी बात चुभी तीर बनकर,
और अश्रुओं का बाँध टूट गया।
"माफ़ कर दे मेरी बच्ची," मैंने कहा,
जब अहसास हुआ, सब कुछ छूट गया।
वो फिर हँसी, पर उदासी थी,
और आँखें उसकी भी नम थीं।
बोली, "हर बेटी का सम्मान करो,
हम भी तो दुनिया में कम नहीं।"
पल भर में ही वो ख़्वाब बिखर गया,
मैं तन्हाई में उतर गया।
कैसे माँगू अपने गुनाहों की माफ़ी,
पाप ये कैसा मैं कर गुज़र गया।
HUMAN EXCRETORY SYSTEM.
The structure of human excretory system.
Chemical Reactions and Equations || Introduction ||
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