Simple Road
08/03/2026
इतिहास फिर से दोहराया गया! लगातार दूसरी बार T20 वर्ल्ड चैंपियन। गर्व है अपनी टीम इंडिया पर! साल बदलते गए, पर दुनिया ने देखा कि हर बार इतिहास के पन्नों पर इंडिया का ही नाम लिखा गया। 2007, 2024 और अब 2026 में भी T20 विश्व चैंपियन 🏆 🏏 बनी। बैक-टू-बैक वर्ल्ड चैंपियन बनना कोई इत्तेफाक नहीं, हमारी मेहनत का जवाब है। ये सिर्फ एक टीम नहीं, करोड़ों भारतीयों का गर्व है। पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने अच्छा प्रदर्शन दिखाया। 🇮🇳❤️
05/03/2026
शानदार खेल, जानदार जीत यही है हमारी टीम इंडिया की असली पहचान। 💥🏏 चक दे इंडिया! 🇮🇳❤️ शानदार खेल, अटूट जज्बा और एक और फाइनल का टिकट! यह सिर्फ क्रिकेट नहीं, यह करोड़ों का जुनून है, और इस जीत में छिपा देश का सुकून है। हमारी टीम ने दिखा दिया कि असली चैंपियन कौन है। अब बस एक कदम और.... ट्रॉफी घर लानी है! बहुत-बहुत बधाई टीम इंडिया!
सत्य तो यह है कि बाहरी दिखावे से अंतर्मन की वास्तविक परिस्थितियों का अनुमान लगाना असंभव है। कभी-कभी एक अत्यंत व्यथित व्यक्ति भी अपनों के संतोष और प्रसन्नता की वेदी पर अपनी पीड़ा की बलि चढ़ा देता है और मुख पर एक बनावटी मुस्कान सजाए रखता है। हम अपनी वेदनाओं को अपने भीतर इस प्रकार संजो लेते हैं, मानो वे हमारे अस्तित्व का ही एक अभिन्न अंग हों और हमें उनसे कोई विशेष अंतर न पड़ता हो। किंतु यह केवल एक छलावा है। वह व्यक्ति स्वयं भली-भांति परिचित है कि वह भीतर से कितना टूटा हुआ हो चुका है। उसकी आत्मा के कोनों में बिखरे हुए उन कांच के टुकड़ों की चुभन केवल वही अनुभव कर सकता है। अब उसने अपनी पीड़ा का प्रदर्शन करना त्याग दिया है। उसने संसार की सहानुभूति से स्वयं को अलग कर लिया है और अपने अश्रुओं को पलकों की ओट में छिपाना सीख लिया है। यह मौन किसी अभाव की निशानी नहीं, बल्कि उस पराकाष्ठा का प्रमाण है जहाँ शब्द भी अपनी सार्थकता खो देते हैं और व्यक्ति स्वयं की पीड़ा का स्वयं ही संरक्षक बन जाता है....!!!!!
जिन्दगी बहुत उथल-पुथल सी हो गई है। ना जाने किस मोड पर आ खड़ा हूं मुझे खुद भी नही मालूम। हर रोज बस इसी उम्मीद में सुबह से रात हो जाती है, शायद कल आज से कुछ अच्छा होगा लेकिन अगले दिन ठीक इसका उल्टा हो रहा है। दिमाग मे अनेक तरह की बातें चलती रहती है। करता कुछ हूं, हो कुछ और जाता है। एक समय के बाद हम समझ जाते है कि शिकायतों का भी कोई मतलब नहीं जब कोई आपको सुनना और समझना ना चाहे पर जो मन में इतनी सारी बातों का बोझ होता है उसका क्या करना चाहिए अपने मन को कितना बहलाते रहे कभी ये भी तो अपनी जिद्द पर अड़ा रहता है.....!!!!!
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