Govind Kumar Sah

Govind Kumar Sah

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05/09/2021

#शिक्षा_का_उद्देश्य
1- आज शिक्षा का लक्ष्य है नौकरी पाने की सम्भावना लेकिन गाँव के लोगों को यह पता नहीं कि उनके बच्चों में क्या बनने की प्रतिभा है और उसकी प्राप्ति के लिए क्या किया जा सकता है। अंग्रेजों के जमाने में मैकाले को पता था वह क्लर्क पैदा करना चाहता था। क्या हमारे अध्यापकों और सरकार को पता है उन्हें किस प्रकार के नागरिक चाहिए।

2- स्वस्थ शरीर में स्वस्थ दिमाग के लिए कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को पढ़ाई के साथ खेलना भी जरूरी है लेकिन ग्राम प्रधानों ने स्कूलों में खेलने के लिये जगह ही नहीं बनवाई और बेसिक शिक्षा अधिकारी ने खेलकूद के टूर्नामेन्ट भी बन्द करा दिए। खलिहान, चरागाह और तालाब तथा खेल के मैदानों को भूमाफिया कब्जाए हैं।

3- दृश्य श्रव्य यानी टीवी, रेडियो, अखबार के माध्यम से अध्यापकों और छात्रों को दिशा मिल सकती है लेकिन इनकी कोई व्यवस्था देखने में नहीं आती। पढ़ाई, खेलकूद और व्यक्तित्व विकास पर न तो ध्यान दिया जाता है और न कोई निरीक्षण करने आता है।

4-पुराने समय में प्रायोगिक कार्य कराए जाते थे जिनमें मिट्टी का काम, लकड़ी, सींक, फूल पत्तों का प्रयोग करके विविध क्राफ्ट के काम सिखाए जाते थे। उनका विकल्प खोजने के बजाय उन्हें समाप्त ही कर दिया।

#अध्यापक-
1- प्राथमिक शिक्षा में अध्यापकों की नियुक्ति के लिए चयन बोर्ड नहीं है और पिछले वर्षों में कैसे नियुक्तियां होती रही हैं यह शिक्षा विभाग के अधिकारियों को खूब पता है। अध्यापकों की अनुशासनहीनता का एक कारण हो सकता है नियुक्तियों में भ्रष्टाचार।

2-आए दिन अध्यापक हड़ताल करते हैं मजदूरों की तरह सामूहिक सौदेबाजी के लिए। इनकी सेवा शर्तों में होना चाहिए कि हड़ताल करने पर सेवाएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी। अध्यापकों की देखा देखी शिक्षामित्र भी लामबन्द होकर हड़ताल करने लगे हैं।

3-अध्यापकों की नियुक्ति 5 वर्ष के लिए हो और उसके बाद नवीकरण के लिए बाहरी एजेंसी से परीक्षा ली जाए। सच यह है कि अध्यापक स्वयं ठीक प्रकार से हिंदी अंग्रेजी नहीं लिख पाते।

4- अध्यापकों की नियुक्ति में पारदर्शिता होनी चाहिए और यदि कम्प्यूटर, विज्ञान और गणित के अध्यापक नहीं मिल पाते तो खानापूरी नहीं होनी चाहिए। संस्कृत और संस्कृति का ज्ञान देने वाले अध्यापक वांछनीय हैं।

5-प्राइमरी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए राष्ट्रीय रोजगार गारन्टी अधिनियम 2005 और शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2005 से जोड़ा जा सकता है। इस प्रकार शिक्षित बेरोजगार भी काम पा जाएंगे।

पढ़ाई के दिन-
1-सब कुछ ठीक रहे फिर भी यदि पढ़ाने के दिन ही न मिले तो शिक्षा में गुणवत्ता नहीं आएगी। आजकल 54 सार्वजनिक अवकाश, 48 रविवार, 40 दिन ग्रीष्मावकाश, प्रवेश और परीक्षा में 20 दिन, अतिवृष्टि और शीतलहर में 15 दिन, वार्षिकोत्सव, हड़तालें, कंडोलेंस आदि में 10 दिन तथा रबी और खरीफ में 20 दिन खेतों में। इस प्रकार पढ़ाई के लिए केवल 158 दिन बचते हैं।

2-सत्र की अवधि और उसका आदि अन्त कुछ पता नहीं रहता। कभी सत्र का आरम्भ अप्रैल से होगा तो कभी 1 जुलाई से। कभी स्कूल 30 जून को बन्द होंगे तो कभी 31 मार्च को। सत्र का अन्तराल निश्चित होना चाहिए और अवधि तर्कसंगत।

3-अनिश्चय और अनिर्णय का यह हाल है कि कभी तो कहते हैं कि कक्षा 5 की बोर्ड परीक्षा होगी तो कभी कहते हैं कक्षा 10 तक कोई फेल नहीं किया जाएगा। इस ढुलमुल यकीनी का परिणाम यह है कि शिक्षा को न तो शिक्षा विभाग गभ्भीरता से लेता है और न छात्र और अध्यापक।

4-आजकल अध्यापक राजनीति में सक्रिय हो गए हैं और मोटी तनव्वाह के बावजूद वे अपना व्यवसाय करते हैं, कोचिंग चलाते हैं, खेती करते हैं और हड़ताल करते हैं और इन सब से समय बचा तो स्कूल चले जाते हैं । उनकी उपस्थिति का सत्यापन हो ही नहीं सकता ।

02/09/2021

आपका साथ हमारा प्रयास,
हम सब मिलकर करेंगे पंचायत का विकास ।
🙏🙏🙏
#सबकासाथसबकाविकास
#रतनपुरपंचायत #आदर्श_पंचायत
#मुखिया_प्रत्याशी_रतनपुर_पंचायत

30/08/2021

विगत कई दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण अपने पंचायत में कई घरों के गिरने की सूचना मिली है। वहां पर अपने साथियों को भेज कर स्तिथि का भी जायजा लिए है। कई लोगो को अभी रहने के लिए घर नहीं है, घर में रखे हुए सामान सब भी उसी में दब गया है। उनके मदद के लिए अनुमंडल पदाधिकारी एवम विधायक महोदय से बात भी किया गया है। उनके द्वारा पूरी मदद की आश्वासन दिया गया है। जल्द ही सभी को लाभ दिलाने का प्रयास जारी रहेगा। आप सब से भी आग्रह है कि अभी ऐसे भवन में न रहे जिस से कुछ अनहोनी होने की खतरा हो। भगवान श्री कृष्ण जी से जल्द ही सब कुछ ठीक होने की कामना करते हैं।
ये हमारे लिए बहुत ही शर्म की बात है की इतने सालो बाद भी अपने पंचायत में अधिकांस लोगो को पक्का घर भी नही मिल पाया है। लोग झोपड़ियों में ही रहने के लिए बाध्य है और इस बारिश के मौसम में उनके घर गिरने और जान माल की खतरा बनी रहती है। आइए मिल कर सबको अपना हक दिलाए । अपने पंचायत को आदर्श बनाए ।
- गोविन्द कुमार साह
(समाजिक कार्यकर्ता)
रतनपुर पंचायत
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#आदर्श_पंचायत
#सबकासाथसबकाविकास

26/08/2021

महिला समानता दिवस एवं मदर टेरेसा जयंती पर नारी शक्ति को नमन।

25/08/2021

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रतनपुर पंचायत
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