Atul Rai

Atul Rai

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03/06/2026

जब से अनिल अग्रवाल जी IPL में बिहार की टीम होनी चाहिए तब से केंद्र सरकार को मिर्ची लगी है की बिहार और वहां के बिजनेस मैन कैसे आगे बढ़ सकता है बाद बाकी अंबानी और अडानी तो दूध के धुले हैं l

22/05/2026

मैं इस पर पहले भी में लिख चुका हूँ, फिर भी दोबारा कह रहा हूँ। बहुत से राजपूत युवा ये बात कमेंट मे लिख के ऑर्गज्म का प्राप्ति करता है शुक्ला परिवार के कारण आनंद मोहन जेल गए , लेकिन सच्चाई यही है कि Anand Mohan के कारण ही Munna Shukla को जेल जाना पड़ा। यह बात पूरा बिहार जानता है कि शुक्ला परिवार आनंद मोहन की राजनीति के कारण बर्बाद हुआ। दो दो सहादत हुआ
छोटन शुक्ला या उनका परिवार कोसी क्षेत्र में लड़ाई करने नहीं गया था। आनंद मोहन अपने राजनीतिक विस्तार और संघर्ष के कारण तिरहुत पहुँचे। जमुना यादव से उनका टकराव हुआ, गाली-गलौज और तनाव बढ़ा तब उन्होंने छोटन शुक्ला को केशरिया भेजा बताया जाता है कि वे केसरिया उस रूट से जाना नहीं चाहते थे,वो लालगंज या कुढ़नी से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन आनंद मोहन अपना बेइज्जती का बदला लेने के लिए केशरिया भेजे लेकिन उन्हें उसी रास्ते से भेजा गया और उसी क्रम में उनकी हत्या हुई। अगर वे उस रास्ते से नहीं गए होते, तो शायद हत्या भी नहीं होती।
छोटन शुक्ला और भूटकुन शुक्ला के मौत के बाद मुजफ्फरपुर छोड़कर भाग गए आंनद मोहन , और जी कृष्णईया कांड मुजफ्फरपुर के भूमिहार को बर्बाद कर गया सैकड़ो लोग केस से परेशान हो गए दर्जनों लोग उसके आग मे झूलस गए चाहे वो प्रोफेसर अरुण कुमार हो या पूर्व मंत्री अख़लाख़ अहमद सभी का परिवार बर्बाद हुआ और बेहद बुरा तरिके से इन्हे पीटा गया था क्या इस्थिति था उस समय मुजफ्फरपुर का डीएम के हत्या के बाद का सब भूमिहार ही झेला आनंद मोहन तो उसके बाद राजनितिक गोटी फिट करने लगे आनंद मोहन की लड़ाई के कारण पूरे मुजफ्फरपुर-दियारा क्षेत्र में भूमिहार बनाम लालू &रामविचार राय गुट के बीच लंबे समय तक संघर्ष चला। इसमें दर्जनों भूमिहार मारे गए और राजनीतिक रूप से भारी नुकसान हुआ।
साहेबगंज, पारू और बरुराज जैसे इलाकों में भूमिहार राजनीति कमजोर हुई, और ये घटना के बाद से वहाँ राजपूत नेताओं का उभार शुरू हुआ। तब तक वहाँ भूमिहार ही विधायक बनते थे थे फिर भूमिहार लड़ने लगे और राजपूत नेता बनने लगे दूसरी ओर आनंद मोहन 1998 में लालू यादव से मेलमिलाप कर लिए सैकड़ो भूमिहार का कुर्बानी पे मिट्टी लगा दिये राजनीति में समीकरण बदलते रहे, लेकिन नुकसान झेलने वाले लोग अलग थे।
जब आनंद मोहन यहाँ आए थे, तब वे थ्रीनॉट रायफल के साथ आए थे, लेकिन बाद 47 जैसी ताकत लेकर गए। इसलिए शुक्ला परिवार को लेकर यह कहना कि “आनंद मोहन उनके कारण जेल गए ये चुतियापा है , आनंद मोहन के कारण तिरहुत के भूमिहार ने खून से लेकर राजनितिक जमीन तक खोया तुमने क्या खोया आनंद मोहन जेल मे भी सुविधाएं के साथ थे लेकिन शुक्ला परिवार दो दो मर्द का मौत झेल रहा था
अगर अभी मुन्ना शुक्ला जेल गए तो क्या आनंद मोहन के कारण गए हकीकत ये है की राजनितिक लड़ाई के कारण आनंद मोहन जेल गए इसलिए जो लड़का सब लिखता है वो गलत लिखकर ऑर्गज्म का प्राप्ति मत करो । लेकिन यह भी उतना ही सच है कि उस दौर की लड़ाइयों में कई साधारण भूमिहार परिवार बर्बाद हुए, कई लोग मारे गए। पारू, साहेबगंज और आसपास के इलाकों में 1994 के बाद जो संघर्ष हुआ, उसका दर्द आज भी बहुत लोग जानते हैं।

नोट -बिहार का कोई ऐसा डॉन नहीं था जो नया टोला जाकर छोटन शुक्ला से आशीर्वाद न लिया है
न इन जैसा कोई न पहले आया न इनके बाद आएगा
ऐसा ऐसा समांग हम खो दिये और हमपर एहसान जताते हो अरे
.प्यासा है तभी समुन्द्र का वजूद है
मेरे किरादार से ही तो तेरी कहानी मज़बूत है...

20/05/2026

अंकित बैयानपुरिया जो कि कुम्हार जाति से आते हैं और 75 दिन फिटनेस चैलेंज से फेमस हुए फिर प्रधानमंत्री स्वयं उनसे मिले थे। हाल में ही उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा के अखाड़ों में भयंकर जातिवाद है और एक जाति (इशारों में जाट) किसी और को बर्दाश्त नहीं करते।

आरक्षण आंदोलन के बाद उगे हरियाणा के नास्तिक जाट , जाट नस्ल वाले जाट, जाट धर्म वाले जाट , जातिवाद से लड़ने वाले जाट , पाखंड से लड़ने वाले जाट क्रांतिकारी हैं। सभी के सभी अंकित बैयानपुरिया के पीड़ा पर चुप हैं या विरोध में बोल रहे हैं।

क्रांतिकारी नकुल ढुल , क्रांतिकारी हर्ष चिंकारा , क्रांतिकारी बिजेंद्र सिंह , क्रांतिकारी मनप्रीत सिंह व अन्य किसान व पहलवान आंदोलन के सारे क्रांतिकारी चुप हैं या प्रश्न पूछ रहे हैं कि अंकित बैयानपुरिया उस अखाड़े का नाम बता दे जहां उस से भेदभाव हुआ है। कुछ तो सीधे बता रहे हैं कि वो तो पहलवान ही नहीं रहा है।

अभी अगर यहीं बैयानपुरिया बयान दे दिया रहता कि उसे मंदिर मे प्रवेश से पहले जाति पूछी गई थी तो सब उसे कंधे पर बिठा चुके होते। धर्म का विनाश करने अपनी बुग्गी लेकर निकल चुके होते।

इस देश में जातिवाद का आरोप तभी सच लगता है जब सामने ब्राह्मण या ठाकुर हो।

बाक़ी सभी जातियों का जातिवाद दूध-भात होता है। भले वो EBC/दलित जातियों को मारपीटें कुछ भी करें।

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