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दोस्तो, यह 28 बर्षीय विधवा,सुमित्रा देवी, अंधी है ...
सुमित्रा के पति की मौत अढ़ाई साल पहले हो चुकी है ,घर पर 4 बच्चे हैं जिसमे सबसे बड़ा बेटा 13 साल का ओर बाकी 3 उससे छोटे,, सुमित्रा का घर मुख्य सड़क से सड़क से लगभग 12 किलोमिटर की सीधी चढ़ाई चढ़ने के बाद गाँब विगरोली,जोकीं पंचयात बौर, तहसील नेरवा, विधानसभा चौपाल,,में आता है सुमित्रा देवी आंखों से पूरी तरह अंधी हैं ,ओर इनका घर पहाड़ की ऐसी ढलान पर बना है जंहा रास्ते से अगर एक इंच भी पांव बाहर निकला तो नीचे गहरी खाई आपका इंतजार कर रही होती है आपके प्राण लेने के लिये !
सुमित्रा,का बड़ा बेटा जो 13 साल का है अपनी अंधी माँ व 3 भाई बहनों का पेट पालने के लिये स्कूल छोड़ कर शिमला में किसी ढाबे पे 3000 की नोकरी कर रहा है ,,प्रशासन या शासन इसलिये अंधा किउंकि ,सुमित्रा के पास ना तो मकान है ,ओर ना ही बिजली है और नाही शौचालय ,नाही पानी ,हाँ गृहणी सुविधा योजना के अंतर्गत कुछ समय पहले उसे गैस सिलेंडर ओर चूल्हा तो दे दिया गया है पर वो भी घर से 12 किलोमीटर दूर किसी घर पर पड़ा हुआ है वजह सुमित्रा खुद सिलेंडर को घर तक लाने में असमर्थ है ,ओर से लाने के पैसे उसके पास हैं नही,पंचयात बोलती है कि उसे घर के लिये धन राशि उपलब्ध करवाई है लेकिन सुमित्रा बताती हैं ,की उसे कोई सहायता नहो मिली,ओर उसका घर देख कर लगता भी नही की उसे कोई सहायता मिली हो , दोस्तो सुमित्रा के भाग्य ने उसे जम कर दुख दिए हैं ,अगर थोड़े दुख बाकी रह गए थे वो प्रशासन ने पूरे कर दिये, हालांकि ऐसा नही है कि स्थानीय विधायक की जानकारी में यह मामला नही है ,उन्हें सुमित्रा की पूरी जानकारी है ,व उन्होंने गाँब के ही एक युवक के माध्यम से सुमित्रा की थोड़ी आर्थिक मदद भी की है ,दोस्तो आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि सड़क से 12 किलोमीटर दूर,,घोर गरीबी में जंगली पौधों की सब्जी बना कर सुमित्रा कैसे अपना ओर अपने 4 बच्चों का गुजारा कर रही होगी ,सुमित्रा को किसी जंगली झाड़ी पर लगी एक बांस नुमा चीज की सब्जी बनाते हमने खुद देखा है ,वो भी बिना तेल या घी के ,,सरकार जी आपसे तो उम्मीद करना ही बेकार है ,आप जब 70 सालों में कुछ नही कर पाए तो अब क्या करेंगे ,सरकार जी हमसे जितना ही सका हमने कर दिया है जैसे ,सुमित्रा के घर पर स्थानीय युवकों की मदद से 2 दिन में पानी उसके घर तक पहुंचाने का व 15 दिनों के अंदर घर पर बिजली लगने का, दोस्तो सुमित्रा मरना चाहती है ,पर उसके रास्ते मे उसके छोटे छोटे बच्चे ,आ जाते हैं ,ओर आएं भी किउं नही एक मां जो ठहरी,, दोस्तो अब आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि अंधी सुमित्रा है या प्रशासन,,,,,?,,,,
05/10/2018
कहीं ऐसा न हो कि ये बेटी धूप में जलती रहे और आप चाईना के दीये ले आएँ 👇👇🙏🏼 अगर इसे किसी ने शेयर नहीं किया तो फेसबुक चलाना छोड़ देना🙏🏼
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