Geography
अभी तक हमनें जाना भूगोल क्या है उसके अंदर किन-किन विषयों को पढ़ते है ।
आज इसके पाठ्यक्रम के विभाजन को पढ़ेंगे
भूगोल (Geography)" शब्द दो ग्रीक शब्दों से मिलकर बना है –
Geo (जियो) → जिसका अर्थ है पृथ्वी
Graphy (ग्राफी) → जिसका अर्थ है वर्णन या लेखन
👉 इस प्रकार "Geography" का शाब्दिक अर्थ है – पृथ्वी का वर्णन या पृथ्वी का लेखन। अर्थात पृथ्वी के वर्णन या अध्ययन से सम्बंधित विषय को भूगोल कहा जाता है।
सरल शब्दों में – भूगोल वह शास्त्र है जिसमें पृथ्वी की सतह, उसकी प्राकृतिक एवं मानवीय विशेषताओं, स्थान, पर्यावरण तथा उनके पारस्परिक संबंधों का अध्ययन किया जाता है।
वर्तमान में भूगोलवेत्ताओं द्वारा भूगोल को परिभाषित करते हुए लिखा गया है, कि मानव एवं प्रकृति के मध्य के अंतर्संबंधों के अध्ययन को भूगोल कहा जाता है।
* भूगोलवेत्ताओं के अनुसार भूपृष्ठ के उन विविध उच्चावच्चों का अध्ययन भूगोल में किया जाता है, जहाँ मानव जाति निवास करते हुए जीवन यापन करते है या भू-पृष्ठ का वह भाग जो मानव जाति के लिए उपयोगी है।
भूगोल का पाठ्यक्रम सामान्यतः दो भागों में विभाजित है:
1. भौतिक भूगोल: इसमें विभिन्न प्राकृतिक घटकों का अध्ययन किया जाता है।
भौतिक भूगोल में भू-आकृतिक विज्ञान, जलवायु विज्ञान, समुद्र विज्ञान तथा जैव-पर्यावरण विज्ञान को शामिल किया जाता है।मानव भूगोल में विश्व प्रादेशिक भूगोल को शामिल किया जाता है।
2 .मानव भूगोल: इसमें मानव तथा मानवीय क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।
उपर्युक्त विषय बिंदु का अध्ययन हम दो सन्दर्भों में करते हैं:
1. विश्व भूगोल: इसमें विश्व के भौतिक तथा मानव भूगोल का अध्ययन किया जाता है।
2 .भारत का भूगोल: इसमें भारत के भौतिक विन्यास तथा मानव भूगोल का अध्ययन किया जाता है।
भौतिक विन्यास के अंतर्गत भारत के भू-आकृतिक प्रदेश, अपवाह तंत्र, जलवायु, मृदा तंत्र और वनस्पति तंत्र का अध्ययन किया जाता है।
मानव भूगोल के अंतर्गत कृषि भूगोल, संसाधन भूगोल, उद्योग एवं विनिर्माण तथा परिवहन तंत्र को शामिल किया जाता है। इसके अतिरिक्त जनसंख्या, अधिवास तथा समाज एवं संस्कृति का अध्ययन भी किया जाता है।
भू.आकृति विज्ञानः
इसके अंतर्गत भू-पृष्ठ पर विद्यमान विभिन्न स्थलाकृतियों का अध्ययन, उनकी उत्पत्ति, अवस्थिति एवं प्रभाव के सन्दर्भ में किया जाता है।
सैलिसबरी के अनुसार स्थलाकृतियों के तीन प्रकार –
1. युवा अवस्था की स्थलाकृतियाँ (Youth Stage Landforms)
*गहरी घाटियाँ, खड़ी ढालें, झरने, तीव्र बहाव वाली नदियाँ।
*यहाँ अपरदन (erosion) की गति बहुत तेज़ होती है।
2. परिपक्व अवस्था की स्थलाकृतियाँ (Mature Stage Landforms)
*विस्तृत घाटियाँ, समतल मैदान, नदी की धाराएँ कुछ स्थिर रूप लेने लगती हैं।
*अपरदन और निक्षेपण (erosion & deposition) में संतुलन होने लगता है।
3 . प्रौढ़ या वृद्धावस्था की स्थलाकृतियाँ (Old Stage Landforms)
*बहुत समतल मैदान (पेडीप्लेन), धीमी गति से बहती नदियाँ, दलदली क्षेत्र।
*यहाँ स्थलाकृति लगभग समतल हो जाती है और अपरदन की शक्ति बहुत कम हो जाती है।
आगे भी इसी तरह से प्रकरण बढ़ते रहेगा आप लोगों लाइक शेयर एवं फॉलो करते रहे कैसा लग रहा है ये कॉमेंट करके बताए कुछ सुधार की आवश्यकता है तो वो भी बताए ।।धन्यवाद।।
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