Pyar Ek Eahsas
चिराग़-ए-दिल बुझाना चाहता था,
वो मुझको भूल जाना चाहता था !
मुझे वो छोड़ जाना चाहता था,
मगर कोई बहाना चाहता था !
सफ़ेदी आ गई बालों पे उसके,
वो बाइज़्ज़त घराना चाहता था !
उसे नफ़रत थी अपने आपसे भी,
मगर उसको ज़माना चाहता था !
तमन्ना दिल की जानिब बढ़ रही थी,
परिन्दा आशियाना चाहता था !
बहुत ज़ख्मी थे उसके होंठ लेकिन,
वो बच्चा मुस्कुराना चाहता था !
ज़बाँ ख़ामोश थी उसकी मगर वो,
मुझे वापस बुलाना चाह
ख्वाइशें तमाम पिघलने लगी हैं,
फिर से एक और शाम ढलने लगी है,
उनसे मुलाकात के इंतज़ार में बैठे हैं,
अब ये जिद भी तो हद से गुजर ने लगी है।
10/05/2020
Happy Mother's Day
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