Prayas Rang Samooh - Theater Group
19/03/2026
लगभग पैंतालीस वर्षों से सांस्कृतिक सरोकारों और सृजनात्मक गतिविधियों के लिए पहचानी जाने वाली इस संस्था ने इस प्रस्तुति में सर्वथा नए कलाकारों को मंच देकर रंगकर्म की परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान करने का कार्य किया है।
Rewa
नाटक मध्यम वर्गीय जीवन की उस मौन पीड़ा को उजागर करता है जो रोजमर्रा की भागदौड़ में अनकही रह जाती है। जैसे किसी थके हुए पथिक को छायादार वृक्ष के नीचे कुछ क्षणों का विश्राम मिल जाए, वैसे ही इस कथा का नायक खुली खिड़की के पास बैठकर एक प्याली चाय के साथ सुकून के कुछ पल तलाशता है, परंतु विडंबना यह है कि अपनों से घिरे रहने के बावजूद वह अपने ही घर में अजनबी-सा महसूस करता है।
10/02/2026
रीवा प्रयास संस्था के कार्यालय में संगीतकार भुवन राजन् अजयगढ़ से पधारे संस्था के ग्राम्यांचल शाखा बढै़या भगवान सिंह जिला मऊगंज में स्थित कार्यालय में भी जा कर सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए अपने अमूल्य विचार प्रदान किए। राजा जी राव संस्था के स्थापना वर्षों के वरिष्ठ रंगकर्मी, रेडियो ड्रामा आर्टिस्ट की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण रही। 1985 में प्रोफेसर राजीव त्रिवेदी और राजा जी राव साहब ने रीवा शहर में सबसे पहले पांच दिवसीय रंग महोत्सव किया था।
इस फेस्टिवल में प्रयास संस्था द्वारा बादल सरकार द्वारा लिखित मशहूर नाटक पगला घोड़ा का बेहद सफल मंचन किया गया था। 🌺🙏
24/12/2025
*अब कभी मिलना नहीं होगा*
श्रद्धेय विनोद कुमार शुक्ल हमारी माटी के कवि उपन्यासकार हम सब के प्रिय कवि की ये पंक्तियां जाग उठी हैं... एक आत्मीय धवल रोशनी का जाना तय था और रह रह कर उनकी अप्रतिम सादगीपूर्ण सौम्य जीवन की दृश्य श्रंखलाओं का याद आना भी।
हम अपने जिन प्रियजनों को खो देने के डर से घिरे रहते हैं उनमें से विनोद कुमार शुक्ल जी ने हम सब को उस डर से राहत दे दी है। और यह बता गए हैं कि
अपने सृजन में वे सदैव तत्पर हैं कि उनके लिखे को पढ़ा जाए। उनकी साधना और उसमें अनूदित होकर बहती तल्लीनता जंगल, ज़मीन, जल में कल-कल करती प्रवाहित है।
किसी सच्चे लेखक से मिलने पर एक विस्तृत संसार में प्रवेश करना होता है जो बहुत छोटे-छोटे दृश्यों से, ध्वनियों से, उष्मा और नमी से मिल कर आत्मा को आलोकित करने वाले आप के भीतर की एकांतिकता में हस्तक्षेप करता है। आपको सृजनात्मक रूप से सक्रिय करता है।
यह उन सभी का सौभाग्य है जो उनसे मिलने पर उन्हें जान पाए, कि जो दिखते हैं वही लिखते हैं। उन्होंने बच्चों के लिए बहुत सी कहानियां रची हैं। एक सोची-समझी ज़िम्मेदारी ली और उस उम्र में पहुंच कर उनसे बतियाते हुए दाईत्व का निर्वहन करते रहे। हम में से बहुत जन यह जानते हैं कि उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार दे कर ज्ञानपीठ ने अपनी साख बचाई है। *हमें अपने लेखकों को, सृजन करने वालों को सेलीब्रेट करना चाहिए* मानव कौल के इस कथन को सराहनीय माना जाएगा। कोई लेखक अपने पाठकों तक कैसे पहुंचे। यह सुसंस्कृत समाज का दाईत्व है।
हम संस्था प्रयास में लेखकों और उनकी रचनाओं पर विमर्श करते रहे हैं।
हम उनके पुत्र शाश्वत शुक्ल जी और उनके परिवार के सभी सदस्यों के साथ हैं वे जानते हैं दादा (विनोद कुमार शुक्ल जी) का पाठकों का परिवार बहुत आत्मीयता से उनका आभार व्यक्त कर रहा है। विनोद कुमार शुक्ल जी की प्रासंगिकता बनी हुई है... बनी रहेगी....
हीरेन्द्र सिंह
प्रयास द्वारा - नाट्य अभ्यास , जिसकी प्रस्तुति की कुछ क्लिप |
सूचित किया जाता है कि इस दिसम्बर २०२५ इसका मंचन प्रस्तावित है |
तैयारियां ज़ोर शोर से सभी सदस्यगण द्वारा की जा रही है |
Hirendra Singh Rajan Shukla Ramjan Khan Satyendr Sengar Rajendra Ramgopal Virendra Sharma Vivan Karan Singh Shalivahan Singh Sengar Deepeshwar Singh Prashant Singh Kamal Pandey
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