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14/08/2024
https://youtu.be/NlZH9-EewNw?si=kn8LihbvsZoi02TN
कौन था जो कहता था उसने एक स्टेनोग्राफर की मदद से पाकिस्तान बना दिया
11/09/2021
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बैताल रानी लांजी राज की राजकुमारी थी। वह बड़ी सुंदर और रूपवती थी। उसका विवाह धमधा के राजा से हुआ था। तब गोंड़वाना राज्य था। धमधा, ठाकुरटोला, गंडई और लांजी के राजा गोंड ही थे। धमधा के राजा अपनी रानी के साथ वन भ्रमण के लिए आते थे। लांजी आते-जाते वे ठाकुरटोला राजा के यहाँ कुछ दिन विश्राम करते फिर अपने गंतव्य को निकल जाते।
इस बीच बैताल रानी एक चरवाहे की बांसुरी सुन कर सम्मोहित हो गई और उससे प्रेम करने लगे। प्रेम कहाँ जाति-पाति या अमीर-गरीब देखता है। चरवाहा भी रानी पर आसक्त हो गया। दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा। वन भ्रमण के बहाने रानी चरवाहा से मिलती। चरवाहा गाय चराता, बांसुरी बजाता।उसकी बांसुरी की धुन सुन रानी अपनी सुध-बुध बिसर जाती। राजा के गुप्त चरों ने जब बताया कि रानी चरवाहा से प्रेम करती है और जंगल में चोरी-छिपे उससे मिलने जाती है। तब राजा आग बबूला हो गया। तब तक बैताल रानी और चरवाहा भाग कर जंगल में छुप गए थे।
इधर राजा हाथ में तलवार लेकर घोड़े पर सवार हुआ और रानी को ढूढंते हुए बसंत पुर जंगल की ओर गया। पहाड़ी में आहट हुई तो राजा रूक गया। देखा तो बैताल रानी चरवाहे के साथ थी। राजा का खून खौल गया। उसने उसी स्थान पर रानी को तलवार से तीन टुकड़ों में काट दिया। चरवाहे को भी मार डाला।
तब से यह किवदंती लोक में प्रचलित है कि बैताल रानी पत्थर बन गई और आज भी तीन टुकड़ों में पड़ी हुई है। हमारी बड़ी भौजी ने यह भी बताया था कि ‘चल रानी लांजी जाबो ’ कहने पर मूर्ति के टुकडे अपने स्थान से हट जाते हैं। और ‘चल रानी धमधा जाबो’ कहने पर मूर्ति के टुकड़े अपने स्थान से नहीं हिलते। (वैसे ये सच नही है)
बेतालरानी घाट में 15-16 मोड़ है जो पर्यटकों को आकर्षित करता है ।
26/08/2021
#बस्तर 😍
26/08/2021
पचराही कवर्धा
फणिनाग वंश की निशानियां मिलती है जहाँ कदम कदम पर
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