gaurav zone RBL

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07/10/2024

ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत का माहौल प्रशासन मौन ? चोर बने मिस्टर इंडिया 😂!!
*आवा- आवा- वईसी- निकरिगा*😂😂

12/09/2024

#फ्यूज_बल्ब

लखनऊ शहर में बसे गोमती नगर में एक आईएएस अफसर रहने के लिये आये। जो अभी हाल ही में सेवानिवृत्त हुये थे । ये रिटायर्ड आईएएस अफसर हैरान-परेशान से रोज़ शाम को पास के पार्क में टहलते हुये अन्य लोगों को तिरस्कार भरी नज़रों से देखते थे और किसी से भी बात नहीं करते थे । एक दिन एक बुज़ुर्ग के पास शाम को गुफ़्तगू के लिए बैठे और फिर लगातार उनके पास बैठने लगे , लेकिन उनकी वार्ता का विषय एक ही होता था - मैं भोपाल में इतना बड़ा आईएएस अफ़सर था कि पूछो मत । यहां तो मैं मजबूरी में आ गया हूं । मुझे तो दिल्ली में बसना चाहिए था । और वो बुजुर्ग प्रतिदिन शांतिपूर्वक उनकी बातें सुना करते थे ।
आईएएस अफसर की रोज़ रोज़ घमंड भरी बातों से परेशान होकर एक दिन उस बुजुर्ग ने उनसे पूछा कि - आपने कभी फ्यूज बल्ब देखे हैं ? बल्ब के फ्यूज हो जाने के बाद क्या कोई देखता है‌ कि‌ बल्ब‌ किस कम्पनी का बना‌ हुआ था ? या कितने वाट का था ? या उससे कितनी रोशनी होती थी ? बुजुर्ग ने कहा कि बल्ब के‌ फ्यूज़ होने के बाद इनमें‌‌ से कोई भी‌ बात बिलकुल भी मायने नहीं रखती है । लोग ऐसे‌ बल्ब को‌ कबाड़‌ में डाल देते‌ हैं । मैं सही कह रहा हूं कि नहीं ? फिर जब उन रिटायर्ड‌ आईएएस अधिकारी महोदय ने सहमति‌ में सिर‌ हिलाया तो‌ बुजुर्ग फिर बोले‌ - रिटायरमेंट के बाद हम सबकी स्थिति भी फ्यूज बल्ब जैसी हो‌ जाती है‌ ?
हम‌ कहां‌ काम करते थे‌ ? कितने‌ बड़े‌ पद पर थे‌ ? हमारा क्या रुतबा‌ था ? यह‌ सब‌ कोई मायने‌ नहीं‌ रखता‌ । बुजुर्ग ने बताया कि मैं सोसाइटी में पिछले कई वर्षों से रहता हूं और आज तक किसी को यह नहीं बताया कि मैं दो बार सांसद रह चुका हूं । उन्होंने कहा कि वो जो सामने वर्मा जी बैठे हैं वे रेलवे के महाप्रबंधक थे । और वे जो सामने से आ रहे हैं मीणा साहब वे सेना में ब्रिगेडियर थे । और बैरवा जी इसरो में चीफ थे । लेकिन हममें से किसी भी व्यक्ति ने ये बात किसी को नहीं बताई ?
क्योंकि मैं जानता हूं कि सारे फ्यूज़ बल्ब फ्यूज होने के बाद एक जैसे ही हो जाते हैं । चाहे वह जीरो वाट का हो या 50 वाट का या फिर 100 वाट का हो । कोई रोशनी नहीं‌, तो कोई उपयोगिता नहीं ।
उन्होंने आगे कहा कि आपने देखा होगा कि उगते सूर्य की जल चढ़ाकर सभी पूजा करते हैं , पर डूबते सूरज की कोई पूजा नहीं‌ करता‌ । लेकिन कुछ लोग अपने पद को लेकर इतने वहम में होते‌ हैं‌ कि‌ रिटायरमेंट के बाद भी‌ उनसे‌ अपने अच्छे‌ दिन भुलाये नहीं भूलते। वे अपने घर के आगे‌ नेम प्लेट लगाते‌ हैं - रिटायर्ड आइएएस‌ / रिटायर्ड आईपीएस / रिटायर्ड पीसीएस / रिटायर्ड जज‌ आदि - आदि ।
बुजुर्ग ने आगे कहा कि माना‌ कि‌ आप बहुत बड़े‌ आफिसर थे‌, बहुत काबिल भी थे‌ । पूरे महकमे में आपकी तूती बोलती‌ थी‌ । पर अब क्या ? अब यह बात मायने नहीं रखती है, बल्कि मायने‌ यह रखता है‌ कि पद पर रहते समय आप इंसान कैसे‌ थे, आपने आम लोगों को कितनी तवज्जो दी, समाज को क्या दिया । मित्र - बन्धुओं के कितने काम आये ? समाज में कितने लोगों की मदद की ? या फिर सिर्फ घमंड में ही ऐंठे रहे ?
बुजुर्ग आगे बोले कि अगर पद पर रहते हुये कभी घमंड आये तो बस याद कर लेना कि एक दिन आपको भी फ्यूज होना है ।

*सीख* : यह कहानी उन लोगों के लिये एक आइना है जो पद और सत्ता में रहते हुये कभी अपनी कलम से किसी का हित नहीं करते ? और रिटायरमेंट होने के बाद ऐसे लोगों को समाज की बड़ी चिंता होने लगती है । अभी भी वक्त है हमारी इस कहानी को पढ़िये, चिंतन करिये तथा समाज की यथासंभव मदद कीजिये । अपने पद रूपी बल्ब से समाज व देश को रोशन करिये , तभी रिटायरमेंट के बाद समाज आपको अच्छी नज़रों से देखेगा और आपका सम्मान करेगा
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🌹🌹🙏🙏🌹🌹

17/08/2024

गिराने के लिए लोग धक्का ही नहीं देते

“सहारा” भी देते हैं……

15/08/2024

पांच बुरी ख़बरें देखकर, आज की परिस्थितीयो मे, सभी ढलती उम्र के व्यक्तियों को अपने जीवन पर विचार करना ही चाहिये। 🧐🧐🧐*

{1} 12000 करोड़ की रेमण्ड कम्पनी का मालिक, आज बेटे की बेरुखी के कारण किराये के घर में रह रहा है।

{2} एक अरबपति महिला, मुम्बई के पॉश इलाके के अपने करोड़ो के फ्लैट में, पूरी तरह गल कर कंकाल बन गयी! विदेश में बहुत बड़ी नौकरी करने वाले, करोड़पति बेटे को पता ही नहीं? माँ कब मर गयी।

(3) राकेश झुनझुनवाला, 43 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति छोड़कर,असमय चला गया क्योंकि 24 घण्टे में 20 घण्टे कुर्सी पर बैठ कर काम करता था।

(4) सायरस मिस्त्री,90 हज़ार करोड़ की संपत्ति छोड़ गया।
हवा में उड़ता था, कार एक्सीडेंट में गुज़र गया।

{5} सपने सच कर आई. ए. एस. का पद पाये, बक्सर के क्लेक्टर ने तनाव के कारण आत्महत्या की।

ये पांच घटनायें बताती हैं, जीवन में पद पैसा प्रतिष्ठा, ये सब कुछ काम का नहीं। यदि आपके जीवन में खुशी संतुष्टी और अपने नहीं हैं तो कुछ भी मायने नहीं रखता।

खुशियाँ, पैसो से नहीं मिलती अपनों से मिलती है।

पैसा बहुत कुछ है, लेकिन सब कुछ नही

08/08/2024

विपक्षियों कृपया ध्यान दो :-
देश में जातीय गणना की नहीं 🙄

घुसपैठियों के गणना की जरूरत है🧐

23/07/2024

उपवास करना है तो विचारों का करें

भूखे रहने से भगवान खुश होते तो गरीब सबसे सुखी होते
🤷🏻‍♂️🤷🏻

23/07/2024

जरा सा पैर फिसला तो इल्जाम उसी चप्पल पर लगाया सबने महीनो तपती जमीन और कांटों से बचाया जिसने

17/07/2024

सियारों के एक झुंड को गाय का माँस खाने की इच्छा हुई। उन्हें एक गाय नजर आयी। उन्होंने गाय पर चारों तरफ से हम ला कर दिया।

पर गाय ने अपनी आत्मरक्षा में अपने लंबे तीखे सींग 4 - 6 सियारों के पेट मे घौंप दिए। भीषण प्रतिरोध देखकर उन्होंने हु-आँ हु-आँ करते हुए यह शोर मचाना शुरू कर दिया कि...

"देखो, हमारे इतने भाइयों के पेट चीर दिए, ये गायें तो एक हिंसक जीव होती हैं।"

गाय ने जब यह बात सुनी तो उसे बड़ा दुःख हुआ, उसने जोर से चिल्लाते हुए कहा कि इतने दिनों से मेरी हत्या की जा रही है,
मुझ पर आघात किये जा रहे हैं, मुझे मार कर खाया जा रहा है, तो क्या मैं स्वयं की रक्षा के लिए प्रतिरोध भी ना करूँ...!!!"

सियारों के सरदार ने फिर हु-आँ, हु-आँ करते हुए कहा, "झूठ-झूठ-झूठ.... असत्य-असत्य-असत्य..., नफरत-नफरत-नफरत...!!!

सारी गायों को नफरती बनाया जा रहा है अब तो गायें बहुत ही हिंसक और नफरती हो गयी हैं।"

गाय सियारों के मनोवैज्ञानिक खेल में फँस गयी, उसने खुद को अहिंसक साबित करने के लिए प्रतिरोध करना बंद कर दिया और चुपचाप एक जगह शांत होकर बैठ गयी।

सियारों ने गाय को नोंचना शुरू किया पर गाय ने कोई प्रतिरोध नहीं किया, लेकिन फिर भी सियारों का सरदार गाय को तब तक नफरती, हिंसक कहता गया जब तक कि उसके साथियों ने गाय को पूरी तरह से चट नहीं कर दिया....

अब भूमि पर गाय की हड्डियों का सिर्फ ढांचा बचा हुआ था जबकि सियारों के सरदार के मुख पर *कुटिल मुस्कान* नाच रही थी..जबकि गायों को बचाने का जिम्मा लिए भेड़िए (भेड़ बनकर) उन्हें संगठित होकर अपने पक्ष वोट करने की अपील कर रहे थे।

और कुछ *जातिवादी महान स्वाभिमानी गायें* दूर खड़ी बहुत खुश हो रही थी, कि सियारों की शिकार हुई गाय उनकी जाति की नहीं थी॥
C/p

24/06/2024

घमंड इस बात का है लोग #गोवा जाने का सपना देखते है।
हमारा तो 12 ज्योतिर्लिंग का सपना है।
हर हर महादेव।।

22/05/2024

जहाज से सीखो
ऊंचाई पर जाने के लिए
जमीन पर दौड़ना पड़ता हैं

13/05/2024

खेलने,कूदने और घूमने की उम्र में जो लड़का पैसा कमाने लग जाए तो वो कभी गलत आदतें नही सीखता

12/05/2024

शहर में कोई पहचानता नहीं है दुकानदार उधार नहीं दे रहा है और लड़का कह रहा है दबदबा था दबदबा है दबदबा बना रहेगा
साले गधे

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