Surendra Nirmal
19/05/2026
लालटेन – हमारे बचपन की सुनहरी यादें....
धीमी-धीमी रोशनी में टिमटिमाती यह लालटेन सिर्फ एक साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे बचपन की यादों का उजाला है। आज बिजली के बल्ब और ट्यूब लाइट्स हमारे घरों पर अपना अधिपत्य जमा लिया है, लेकिन कभी यही लालटेन हमारी रातों की साथी हुआ करती थी। गाँव में जब शाम ढलती थी, तब यही लालटेन हमारे घर के आँगन को पीली रोशनी से रौशन करती थी। उसके चारों ओर परिवार के सदस्य बैठकर बातें करते, दादी-नानी किस्से कहानी सुनातीं और बच्चे वही सुनते-सुनते नींद की गोद में चले जाते।
हमारी पढ़ाई-लिखाई भी इसी रोशनी में होती थी। टिमटिमाती लौ के सामने किताब खोलना आज भले कठिन लगे, लेकिन उस समय यही लालटेन हमारी लगन और धैर्य को मजबूत करती थी। लालटेन की रोशनी में छिपा था अपनापन। बिजली के जाने पर अंधेरा डरावना नहीं लगता था, क्योंकि लालटेन हमारे साथ होती थी। गाँव के खेतों की पगडंडी पर जाते समय भी यही रास्ता दिखाती थी। यह सिर्फ रोशनी देने वाला साधन नहीं था, बल्कि हमारे जीवन का हिस्सा थी।
आज फिर इस लालटेन ने साथ निभाया है।
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