OM AstroInfo

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23/06/2026

जब सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, जिससे वर्ष के 'मेघाधिपति' (वर्षा के स्वामी) का निर्धारण होता है।

इस वर्ष के मेघाधिपति चंद्रमा हैं, जिसके कारण भारत में असमान और सामान्य से थोड़ी कम बारिश होगी। मांग और आपूर्ति में असंतुलन के कारण साल 2026 में कृषि उत्पादों का प्रदर्शन बेहतर रहेगा।

​ज्योतिष और कृषि विज्ञान (विशेषकर मेदिनी ज्योतिष) के अनुसार, आर्द्रा प्रवेश का बहुत बड़ा महत्व है। आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं:
​आर्द्रा प्रवेश और मेघाधिपति: जब सूर्य देव आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो उस समय की ग्रहों की स्थिति से उस साल के 'मेघाधिपति' (बादलों के राजा या वर्षा के देवता) का फैसला होता है। इस साल यह जिम्मेदारी चंद्रमा के पास है।

​कम और असमान बारिश (Uneven Rainfall): चंद्रमा को शीतलता और जल का कारक तो माना जाता है, लेकिन इस वर्ष की ग्रहों की स्थिति दर्शाती है कि मानसून देश में एक समान नहीं रहेगा। कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है, तो कुछ इलाके सूखे रह सकते हैं, जिससे कुल मिलाकर वर्षा सामान्य से कम दर्ज होगी।

​कम और असमान बारिश का सीधा असर फसलों की पैदावार पर पड़ेगा।
​मांग और आपूर्ति का अंतर: पैदावार घटने से बाजारों में कृषि उत्पादों (जैसे अनाज, दलहन, तिलहन) की सप्लाई कम होगी, जबकि मांग (Demand) वैसी ही बनी रहेगी।
​मुनाफा: इस असंतुलन (Imbalance) के कारण साल 2026 में कृषि उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे कमोडिटी मार्केट में एग्रो-सेक्टर का प्रदर्शन काफी मजबूत और तेजी वाला रहेगा।

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