Varunark BABA
यह प्राचीन मंदिर हमें इतिहास के तीसरी ईशा शताब्दी पूर्व में ले जाता है जब वंश के शासक बलादित्य राजा थे जो मंदिर के निर्माण के बाद पूजा अर्चना हेतु हजारों बीघे जमीन दान में दिए इसके अलावा मौजूद मंदिरों में अनेकों देवी-देवताओं की मनोहारी रूप में देखने को मिलते हैं या विशाल मंदिर भुवन भास्कर भगवान सूर्यनारायण को समर्पित है इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान सूर्यनारायण सारथी अरुण संयुक्त शब्द अवश्य युक्त रखा रुद्र का दिव्य और पावन बिगरा अत्यंत दर्शनीय मनोहारी तथा अपराध हैगर्भ गृह में भगवान सूर्यनारायण सारथी अरुण संयुक्त शब्द अश्व से युक्त का दिव्य और 52 बीघा अत्यंत दर्शनीय मनोहारी तथा उन्हें पद है गर्भ गृह में भगवान सूर्य सारथी अरुण संयुक्त सप्त अश्व से युक्त रथा रुद्र का दिव्य और पावन विग्रह अत्यंत दर्शनीय मनोहारी तथा पुण्य प्रद है गर्भ ग्रह और प्रांगण में भगवान सूर्य बारहों कला के अलावा अन्य देवी-देवताओं के साथ मौजूद हैं जिसने शंकर पार्वती की संयुक्त मूर्ति से इस स्थल की महत्ता कई गुना बढ़ जाती है लंबोदर गजानन गणेश इस प्रांगण में काफी सुशोभित हो रहे हैं साथ ही यहां देवी अनेक रूपों में मौजूद है प्रकृति भी इस प्रांगण में देवी के रूप में अवस्थित है
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