Mini Metro Live

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Photos from Aware News 24's post 14/03/2026

पटना,विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर कविवर सुरेन्द्र नाथ सक्सेना की स्मृति में चित्रगुप्त सामाजिक संस्थान, पटना और श्री साहित्य कुंज, राँची के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार 10-01-2025 को पाटलिपुत्र परिषद, चौक, पटना सिटी में एक भव्य काव्य-संध्या और पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
कविवर सुरेन्द्र के ज्येष्ठ सुपुत्र तुषार कांति ने बताया कि इस कार्यक्रम में कविवर सुरेन्द्र के काव्य-ग्रंथ 'विष-बाण', उनकी सुपुत्री मनीषा सहाय सुमन द्वारा साहित्य संवाहक पत्रिका का उन पर आधारित विशेषांक तथा उनके सुपुत्र पीयूष कांति के ग़ज़ल-संग्रह 'तिश्नगी रह गई' का लोकार्पण तथा एक कवि-सम्मलेन का आयोजन किया जाएगा। कवि-सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि भगवती प्रसाद द्विवेदी करेंगे तथा कमलनयन श्रीवास्तव, प्रेम किरण, गोरख प्रसाद मस्ताना, मधुरेश शरण, डा. आरती कुमारी समेत कई प्रख्यात कवि-कवयित्रियां काव्य-पाठ करेंगे।

13/03/2026

कर्तापन का त्याग और ज्ञान का स्वीकार — यही गीता का सार है।

जब मनुष्य यह समझ लेता है कि
“मैं कर्ता नहीं, केवल निमित्त हूँ”
तभी अहंकार और भय दोनों समाप्त हो जाते हैं।

भगवान Krishna का संदेश यही है कि
कर्म करते रहो, पर फल का अहंकार मत लो।

जब ज्ञान जीवन में उतर जाता है तो
कर्म योग बन जाता है,
भाव भक्ति बन जाता है
और समझ ज्ञान योग बन जाती है।

यही गीता का गहरा दर्शन है।

आप क्या सोचते हैं?
अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।

28/02/2026

“आज हर माता-पिता का एक ही सपना होता है —
अपने बच्चों का बेहतर भविष्य।”

“इसी सपने को साकार करने के लिए
आशा – द होप पब्लिक स्कूल
प्रस्तुत करता है
CBSE पाठ्यक्रम पर आधारित
आधुनिक एवं मूल्यपरक शिक्षा।”

“विद्यालय के संस्थापक, श्री अमरेंद्र,
स्वयं एक बोर्डिंग स्कूल में शिक्षित हुए…”

“क्योंकि उस समय उनके क्षेत्र में
कोई उपयुक्त विद्यालय उपलब्ध नहीं था।”

“घर से दूर रहने की चुनौतियाँ,
अनुशासन और संघर्ष —
इन सबका अनुभव उन्होंने स्वयं किया है।”

“इसीलिए, बेंगलुरु से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त करने के बाद
कॉर्पोरेट करियर के बजाय
उन्होंने अपने क्षेत्र खुटौना में
एक आदर्श रेज़िडेंशियल स्कूल स्थापित करने का निर्णय लिया।”

“वे बोर्डिंग जीवन की हर आवश्यकता को भली-भाँति समझते हैं…”

“संतुलित एवं स्वच्छ भोजन,”
“गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई,”
“सुरक्षित एवं अनुशासित वातावरण,”
“और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ।”

“विद्यालय की नई आधुनिक इमारत में उपलब्ध हैं —”

✔ कंप्यूटर लैब
✔ विज्ञान प्रयोगशाला
✔ विशाल खेल मैदान
✔ एवं सभी आवश्यक उन्नत सुविधाएँ

“तो अब देर किस बात की?”

“अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए
आज ही प्रवेश सुनिश्चित करें।”

“नीचे दिए गए नंबरों पर संपर्क करें।”

आशा – द होप पब्लिक स्कूल
खुटौना मधुबनी बिहार

27/02/2026

आम आदमी पार्टी के प्रमुख श्री अरविन्द केजरीवाल भावुक हुए जब कोर्ट ने उनको शराब घोटाले में बड़ी किया

25/02/2026
23/02/2026

Good Morning
अपने में आदमी जब तक खोता नहीं है,
तब तक कुछ भी होता नहीं है
राधे राधे

Photos from Aware News 24's post 23/02/2026

सामाजिक नियम का सनातन धर्म से कोई लेना-देना नहीं।
जब गीता पढ़ी तो समझ आया — समाज बकवास हो सकता है, पर धर्म उदार, उन्मुक्त और समावेशी है।
चाहे वो कपड़ों की बात हो, चाहे living relationship की बात।
सनातन सबको धारण करता है, मगर समाज नहीं।
इसलिए समाज में रहकर अब सबकी बजाता हूँ — महाभारत और सतयुग तक की कहानी सुनाता हूँ।
जब विवाह हुआ ही नहीं करता था —
स्त्री पुरुष के पास जाती थी, पुरुष स्त्री के पास जाता था, और बच्चे होते थे।
कुंती-पाण्डु संवाद, महाभारत से…
सतयुग में एक ऋषि आश्रम के बाहर थे और उनकी पत्नी पर-पुरुष के साथ यौन-क्रीड़ा में लीन थी।
तभी उनका बेटा आया और पूछता है — “ये क्या हो रहा है?”
ऋषि ने कहा — “स्त्री स्वतंत्र है।”
फिर उसी ऋषि के पुत्र ने स्त्री की स्वतंत्रता पर पहली बार नियम गढ़ा —
कि अब से पुरुष तय करेगा कि स्त्री कहाँ जाए और कहाँ रहे।
साथ ही जब हम सावित्री की कहानी देखते हैं —
उसे एक woodcutter से प्यार हो गया।
राजा की बेटी थी। जिद्द की।
राजा ने कहा — “तुम स्वतंत्र हो।”
ज्योतिष ने कहा — “ये युवक एक साल बाद मर जाएगा।”
सावित्री ने कहा — “I will deal with it।”
और जैसा कि आपको पता है —
उसने यमराज से पति के प्राण तक बचा लिए।
शास्त्र बहुत भयानक हैं गुरु…
समाज में विस्फोट हो जाएगा।
आप महाभारत में गंगा से द्रौपदी तक देखिए —
स्त्री की स्वतंत्रता कैसे निकाली गई।
इसीलिए समाज की दिशा और दशा भारत में ठीक नहीं।
दम घोंटने वाले नियम —
जो स्त्री और पुरुष दोनों को बंधक बनाए हुए हैं।
शास्त्र और समाज, या धर्म और समाज में ज़मीन-आसमान का फर्क है।
पश्चिम ने हमारा कामशास्त्र उठाकर औरतों के शोषण को कम किया,
और इच्छाओं पर भी अंकुश नहीं लगाया — बल्कि समझा।
हालाँकि वो भी अधूरा ही समझा।
अजीब paradox है।
इसलिए जो मुझे ठीक लगता है, करता हूँ।
खुद की सुनता हूँ।
समाज को नया रास्ता दिखलाता हूँ।
अब देखना उसका काम है।
कृष्ण गीता से education दे सकते हैं,
apply करना या न करना — पार्थ के हाथों में है।
बाकी…
किसी को मांस नहीं पसंद तो मांस की फोटो से चिढ़ जाता है।
किसी को वैचारिक स्वतंत्रता पसंद नहीं तो वो चरित्रहीन बोल देता है।
ये गुलामी है, ज्ञान नहीं।
इसलिए हम मस्ती में जीते हैं।
दारू-सिगरेट भी पीते हैं।
मांस अब मुँह में अच्छा नहीं लगता,
लेकिन कोई खाए तो वो तामसिक भोजन है —
उससे वासना भटकती है, सन्यासी को नहीं खाना चाहिए।
गीता-वाचन करने वाले एक साधु मांस बेचा करते थे —
ये भी पाया गया।
स्वामी विवेकानंद भी खाते थे,
सिगार भी पीते थे।
सृष्टि में जो कुछ भी है —
सब मनुष्यों के उपभोग के लिए है।
दोहन करना है या उपयोग —
ये मानव तय करेगा।
Acharya Prashant जैसे पाखंडी नहीं कि
“ये मत खाओ, वो मत करो।”
अरे भाई — जिसका जो दिल करे, वो करे।
Acharya Prashant को सबसे पहले
मछुआरों को वैकल्पिक रोजगार देना चाहिए।
मांस व्यापार का भी विकल्प देना चाहिए।
Vegan जो कह रहे हैं —
पहले सोया मिल्क की उपलब्धता बढ़ाओ,
कीमत मौजूदा दुग्ध उत्पादों से कम करो।
ऐसे कुछ भी बोलना मेरे ख्याल से
अपनी राय और सोच थोपना है।
कल मैंने चिकन ऑर्डर किया —
मुँह में अच्छा नहीं लगा।
साक्ष्य के तौर पर अभी भी पड़ा है।
मुझे अच्छा नहीं लगा ≠
तुझे भी न लगे।
ये कुतर्क है।
बहरहाल…
आज का
ChatGPT संवाद से पूरा हुआ।
बात करते-करते
क्या से क्या लिख गया।
Radhe Radhe ✨
Note:- deal है मेरी और कृष्ण की — झूठ मत बोलना किसी से और धर्म मत छोड़ना।

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