CYSS Bihar
For the past two years millions of common Indians came out on streets to fight against the biggest evil in our country today - corruption. No political party in India today works for the common man's needs. The Janlokpal Movement was a call to all the politicians of India to listen to the common man's plea. For almost 2 years we tried every single way available to plead our cause to the government
जय हिन्द साथयों सबसे पहले तो आप सभी छात्र-छात्राओँ का दिल से आभार की आपलोगों नें हाज़ारों की संख्या में अपना क़ीमती वोट देकर एक बार फिर से छात्र युवा संधर्ष समीति पर अपना विश्वास जाताया।साथियों उम्मीद है कि पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव-2022 के परिणाम अब तक आपके पास विभ्भिन माध्यम से पँहुच चुके होगें,जिसमें बड़े-बड़े अक्षरों में छात्र जदयू को 5 में से 4 सीट पर जीत दर्ज करने के लिए गुणगान किया गया होगा पर साथियों 19 नवम्बर 2022 का दिन पटना विश्वविद्यालय के चुनावी इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज किया जाएगा,और इसका पुरा श्रेय इसी संस्थान के आंदोलन से निकले पूर्वती छात्र और वर्तमान में सत्ता के सिंहासन पर घमण्ड और अहंकार से विरजमान काल्पनिक सुशासन और उनकीं चुटुकार सेना को दी जाएगी। साथियों जिस तरह से छात्र संघ चुनाव परिणाम को शासन और प्रशासन के इशारों पर बुरी तरह से प्रभावित किया गया है, वह चुनावी लोकतंत्र के लिए एक ख़तरे की घंटी है। सोचने वाली बात यह है कि जिस 2019 के छात्र संघ चुनाव में छात्र जदयू मूँह के बल गिरी थी ,आज कोरोना के दो साल बाद छात्र जदयू के लोंगों ने छात्रों के लिए अचानक ऐसा क्या कर दिया कि रातों-रात छात्र इनके पक्ष में खड़े हो गए। उदहारण के तौर पर यदि 2019 के छात्र संघ चुनाव का ज़िक्र किया जाये तो आप सिर्फ एक उदाहरण से समझ जाएँगें कि छात्र जदयू की पिछले चुनाव में क्या स्थिति थी। 2019 के पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव मे इस संगठन के उपाध्यक्ष प्रत्याशी को महज़ 700 वोट मिले थे जबकि आम आदमी पार्टी के छात्र इकाई छात्र युवा संघर्ष समीति (सी वाई एस एस) को इसी उपाध्यक्ष पद पर लगभग 1500 से अधिक छात्र-छात्राओं का समर्थन मिला और कमोबेश हर सीट पर छात्र जदयू की दुसरी पार्टीयों की तुलना में यही स्थिति थी।
साथियों कल रात पटना विश्वविद्यालय चुनाव में लोकतंत्र का गला घोटा गया है।कई साक्ष्य और बातें यह स्पष्ट इशारा करतीं हैं कि चुनाव में भयंकर धांधली करायी गयी है। सबसे पहली बात यह कि चुनाव परिणाम को चरणबद्ध तरीक़े से न बताकर सबसे अंत में क्यों बताया गया? पटना विमेंस कॉलेज की काउंसलर प्रत्याशी सौम्या पहले चरण से लेकर आख़री चरण तक सबसे आगे चल रहीं थी,उनके परिणाम को दो घण्टे बाद क्यों बताया गया? मतदान ख़त्म होने के बाद भी वहाँ मौजूद अधिकारी ने यह क्यों कहा कि मैं चुनावी परिणाम बताने में असमर्थ हूँ? साथियों सवाल कईं हैं लेकिन जवाब केवल एक है सत्ता के इशारे पर चुनावी लोकतंत्र की हत्या।
दोस्तों हम सभी यह भलीभांति जानते हैं कि नीतीश कुमार 2024 चुनाव में प्रधानमंत्री बनने का ख़्वाब देख रहे हैं और वह इसके लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। बिहार का बच्चा-बच्चा जानता है कि पटना विश्ववीद्यालय चुनाव परिणाम का बिहार के राजनीति में क्या अहमियत है, इसलिए नीतीश कुमार पीयू चुनाव को प्रभावित कर लोगों को यह भ्रमित करने की कोशिश कर रहें हैं कि बिहार के युवा और छात्र उनके तथा जदयू के पक्ष में हैं, पर काल्पनिक सुशासन कुमार की यह चाल और ग़लती कहीं उनकी राजनीति की ताबुत की आख़िरी कील साबित न हो ?
आख़िर में सभी छात्रों से विनम्रता से कहना चाहता हूँ कि आप इसे केवल पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव परिणाम में धांधली के रूप में न देखें,यह पुरे बिहार के छात्र राजनीति को प्रभावित करने वाली घटना है क्योंकि पटना विश्वविद्यालय के राजनीति से ही बिहार के राजनीति के दरवाज़ा खुलता और बंद होता है बाकि तो आपलोग ख़ूद समझदार हैँ।
लोकतंत्र ज़िंदाबाद,छात्र एकता ज़िंदाबाद
आसिफ अली
(प्रदेश अध्यक्ष ,सी वाई एस एस)
08/02/2022
PAT2021 प्री पीएचडी के परीक्षा परिणाम में जमकर हुई धांधली
प्री पीएचडी के परीक्षा परिणाम में हुए धांधली से छात्र काफी परेशान है रोजाना विश्वविद्यालय का चक्कर काट रहे हैं इसी दोनों दौरान आज CYSS & AISA के छात्र नेताओं ने मामले में संज्ञान लेते हुए छात्रों के साथ परीक्षा नियंत्रक, प्रॉक्टर, रजिस्टर से छात्रों की मांग को लेकर मिले दबाव बनाने पर परीक्षा नियंत्रक ने वाइस चांसलर से बात की और प्री पीएचडी में एडमिशन को लेकर होने होने वाले इंटरव्यू को छात्रों की मांग पर तत्काल स्थगित कर दिया, और परीक्षा नियंत्रक ने छात्रों के आवेदन को चांसलर को मेल किया है, CYSS के प्रदेश अध्यक्ष Ashif Ali ने कहा के विश्वविद्यालय दलाली का अड्डा हो चुका है यहां के कण-कण में भ्रष्टाचार व्याप्त है और कुलपति महोदय विश्व विद्यालय के समस्त सिस्टम को मुजफ्फरपुर स्थापित करना चाहते हैं जो किसी भी हाल में होने नहीं देंगे अगर स समय कॉपी के मूल्यांकन में हुई धांधली को समाप्त कर कॉपी का विधिवत मूल्यांकन कर परिणाम प्रकाशित नहीं किया गया तो छात्र लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे मौके पर आयशा के विश्वविद्यालय संयोजक प्रवीण कुशवाहा ने कहा कि अगर कॉपी का पुनर्मूल्यांकन का आदेश अभिलंब नहीं दिया गया तो कल विश्वविद्यालय में तालाबंदी की जाएगी मौके पर प्री पीएचडी के अमित कुमार, रूपेश कुमार, सादिक हुसैन, साइन सुल्ताना, रुकैया, अलका कुमारी, प्रीतम कुमार सहित दर्जनों छात्र उपस्थित थे
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