Sudhir Kumar Rajak
08/10/2025
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के मुख्य न्यायधीश आदरणीय बी० आर० गवई जी के ऊपर जातिवादी अधिवक्ता के द्वारा जो जूता उछाला गया है इसका आज पटना हाइकोर्ट बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के प्रतिमा के पास विरोध प्रदर्शन किया गया।
यह जूता उछालना देश के लोकतंत्र,संविधान और न्यायिक व्यवस्था को धूमिल करता है केंद्र की सरकार ऐसे जातिवादी अपराधी पर देश द्रोह का मुकदमा दायर करे और सीधे फांसी की सजा दे।
दलित समाज के लोग कितने भी बड़े पद पर चले जाते है लेकिन जातिवादी मानसिकता हमेशा अपमानित करते रहता है ऐसे में देश के सभी जनता जो न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास करते है और मानते है उनका घोर अपमान किया गया है इस अपमान का बदला पूरा देश लेकर रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश बी० आर० गवई जी .......का अपमान नहीं सहेगा हिन्दुस्तान
#सुप्रीमकोर्ट
15/09/2025
बाबसाहेब भीमराव अंबेडकर के बारे में सबसे बड़ा झूठ ये है कि वो सिर्फ़ दलितों के नेता थे.
सच तो ये है कि अगर डॉक्टर अंबेडकर दलितों के मसीहा हैं तो महिलाओं के लिए भी भगवान से कम नहीं हैं.
ये डॉक्टर अंबेडकर ही थे जिन्होंने भारत में महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलवाया…वरना स्विट्ज़रलैंड जैसे देश में भी महिलाओं को ये अधिकार 1971 में जाकर मिल पाया.
जिस जमाने में महिलाएँ चारदीवारी में बंद रहा करती थीं, डॉक्टर अंबेडकर ने उस दौर में कामकाजी महिलाओं को मातृत्व अवकाश दिलवाया…वरना अमेरिका जैसे देश में भी महिलाओं को ये अधिकार 1993 में मिला.
महिलाओं को नहीं भूलना चाहिए कि उन्हें संपत्ति में बराबर अधिकार दिलाने की वकालत भी डॉक्टर अंबेडकर ने ही की थी.
ध्यान रहे कि…
बाबासाहेब ने मनुस्मृति को सिर्फ़ इसलिए नहीं जलाया था कि इसमें दलित विरोधी बातें लिखी थीं…बल्कि इसलिए भी जलाया था क्योंकि इसमें महिलाओं को ग़ुलाम बनाने के तरीक़े लिखे थे.
कुल मिलाकर देश की महिलाओं को याद रखना चाहिए कि भारत में महिला अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले योद्धा डॉक्टर अंबेडकर जी ही थे.
जय भीम जय भारत…
#संविधान_निर्माता_बाबा_साहब
15/09/2025
#कोलकाता से पूर्णिया के बीच IndiGo ने विमान सेवा की बुकिंग शुरू की 3115 रुपए किराया 17.09.25 को पहले फ्लाइट।
कोलकाता प्रस्थान - 12.30
पूर्णिया आगमन - 13.40
पूर्णिया प्रस्थान - 14.30
कोलकाता आगमन - 15.40
परिचालन दिन - सोमवार, बुधवार, शुक्रवार
इस टिकट को IndiGo के Website पे जाकर बुक करना पड़ेगा
11/07/2025
बथानी टोला नरसंहार की बरसी : जनसंहार और न्याय का उपहास
रणबीर सेना द्वारा बथानी टोला (भोजपुर जिला) जघन्य जनसंहार को 11 जुलाई 1996 को अंजाम दिया गया था, जिसमें 6 बच्चे एवं 11 महिलायें समेत कुल 21 लोग मारे गए थे। मृतकों में गांवों में घूम-घूम कर चूड़ी बेचने वाले गरीब नइमुद्दीन अंसारी के परिवार के 6 सदस्य भी शामिल थे। उनकी 3 माह की दुधमुंही बच्ची को दरिन्दों ने हवा में उछाल कर तलवार से काट दिया था, जिसकी मीडिया में काफी चर्चा भी हुई थी।
इस हत्याकांड से सम्बन्धित एफ.आई.आर. में कुल 33 हमलावरों को नामजद किया गया था। इन अभियुक्तों के खिलाफ सेशन कोर्ट, आरा में करीब 14 सालों तक सुनवाई चलती रही। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया, जिसमें 3 को फांसी एवं 20 अन्य को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी।
लेकिन जब सजायाफ्ता लोगों की ओर से पटना हाई कोर्ट में अपील की गई तो सारा मामला पलट गया। अन्ततः 16 अप्रैल, 2012 को हाई कोर्ट की एक बेंच (जिसमें जस्टिस नवनीत प्रसाद सिंह एवं जस्टिस अश्विनी कुमार सिंह शामिल थे) ने ‘त्रुटिपूर्ण साक्ष्य’ को आधार बनाते हुए इस जनसंहार के सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया।
उपरोक्त विवरण भारतीय न्यायपालिका का कोई नया चेहरा प्रस्तुत नहीं करते हैं। पहले भी सेशन कोर्ट एवं हाई कोर्ट के न्यायाधीश महोदय विभिन्न निजी गुण्डावाहिनियों द्वारा किये गए जनसंहारों के मामलों में आमतौर पर इसी प्रकार के पक्षपातपूर्ण फैसले करते रहे हैं। 1980 एवं 1990 के दशकों में बिहार के विभिन्न जिलों में भूमि सेना, लोरिक सेना, ब्रह्मर्षि सेना, सवर्ण लिबरेशन फ्रंट, सनलाईट सेना और रणवीर सेना द्वारा दर्जनों जनसंहार किये गए, जिनमें सैकड़ों की तादाद में गरीब, दलित एवं अति पिछड़े समुदायों के लोग मारे गए।
ब्रह्मेश्वर सिंह के नेतृत्व में अकेले रणवीर सेना ने भोजपुर, जहानाबाद, गया एवं औरंगाबाद में करीब दो़ दर्जन जनसंहारों को अंजाम दिया। उसने अपनी इस हत्यारी भूमिका को मीडिया एवं पुलिस के सामने स्वीकार भी किया। लेकिन इसके बावजूद उसे जुलाई 2011 में जेल से रिहा कर दिया गया। इसी तरह सावन विगहा एवं मेन-बरसिम्हा जैसे जनसंहारों को अंजाम देने वाली निजी सेना ‘सवर्ण लिबरेशन फ्रंट’ के सरगना रामाधार सिंह उर्फ डायमण्ड को भी कोर्ट ने जेल से मुक्त कर दिया था।
विभिन्न जनसंहारों में पहले तो पुलिस की आधी अधूरी जांच रहती है। सबूतों को छिपाने, नष्ट करने या लापरवाही से इकट्ठा किया जाता है।जिस कारण मुकदमा कमजोर हो जाता है। पुलिस का ऐसा करने में उसके अपराधियों से गहरे रिश्ते और अपराधियों के राजनयिक पहुंच आदि कारण होते हैं। बिहार की राज्य सरकारों (चाहे वह किसी भी दल या गठबंधन की हों) ने इन जनसंहारी ताकतों को शह ही दिया है। नीतिश सरकार ने तो रणबीर सेना के राजनैतिक रिश्तों की जांच कर रही अमीर दास आयोग को भी भंग कर दिया।
अपराधी-पुलिस-राजनीतिक गठजोड़ का कुल जमा परिणाम यह होता है कोर्ट की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अपराधी कानून के शिकंजे से बाहर आ जाते है। पीड़ित पक्ष हार जाता है अन्याय जीत जाता है।
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