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Founded and edited by Viplava Awasthi, a senior legal journalist with over 22 years of experience in legal journalism.

02/03/2026

होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, यह समरसता, समानता और सत्य की जीत का प्रतीक भी है।
जिस तरह होली के दिन रंग अमीर-गरीब, जाति-धर्म, ऊँच-नीच का भेद मिटा देते हैं, उसी तरह न्याय भी सबके लिए समान होना चाहिए।

⚖️ न्याय की असली भावना क्या है?
• कानून का समान रूप से पालन
• निर्दोष की रक्षा
• दोषी को उचित दंड
• पीड़ित को समय पर राहत
• बिना भेदभाव के सुनवाई

होली हमें यह संदेश देती है कि
👉 द्वेष की होलिका जलाएं
👉 अन्याय की मानसिकता को समाप्त करें
👉 सत्य, पारदर्शिता और जवाबदेही को अपनाएं

आज आवश्यकता है कि हम न्याय को केवल अदालतों तक सीमित न रखें, बल्कि अपने व्यवहार, प्रशासन और समाज में भी लागू करें।
जब हर व्यक्ति अपने स्तर पर न्यायपूर्ण आचरण करेगा, तभी “सत्यमेव जयते” का वास्तविक अर्थ साकार होगा।

इस होली संकल्प लें —
रंगों के साथ न्याय की भावना भी फैलाएँ।

सत्यमेव जयते 🇮🇳

26/02/2026

सहमत हैं तो कमेंट जरुर करें 👇👇👇

देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब आधे-अधूरे कदम नहीं, ठोस कानून की जरूरत है।

भारत में समय-समय पर सरकारी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। जांच होती है, कार्रवाई भी होती है — लेकिन सवाल यह है कि क्या सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए कोई स्थायी और अनिवार्य व्यवस्था है?

अब समय आ गया है कि संसद में एक ऐसा प्रस्ताव आए जिसमें—

✔️ देश के सभी सरकारी अधिकारियों की
✔️ समय-समय पर अनिवार्य संपत्ति जांच
✔️ आय से अधिक संपत्ति की स्वतः जांच प्रक्रिया
✔️ संपत्ति विवरण का डिजिटल और सार्वजनिक रिकॉर्ड

को कानून के माध्यम से बाध्यकारी बनाया जाए।

जब जनता से टैक्स लिया जाता है, तो जनता को यह जानने का अधिकार भी होना चाहिए कि जिनके हाथ में सत्ता और प्रशासन है, उनकी संपत्ति का स्रोत क्या है।

पारदर्शिता ही लोकतंत्र की असली ताकत है।
ईमानदार अधिकारियों को इससे डरने की जरूरत नहीं, बल्कि उनका सम्मान और बढ़ेगा।

क्या आपको लगता है कि संसद में ऐसा कानून आना चाहिए?
अपनी राय जरूर साझा करें।

Legal Reporter +91-9318428656

16/02/2026

भारत में तलाक के कानूनी आधार क्या हैं?

भारत में तलाक अलग-अलग पर्सनल लॉ (धर्म के आधार पर बने कानून) के अनुसार दिया जाता है। प्रमुख कानूनी आधार इस प्रकार हैं:

🔹 हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act)

(हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध पर लागू)

तलाक के मुख्य आधार:
1. क्रूरता (Cruelty) – शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना
2. व्यभिचार (Adultery)
3. परित्याग (Desertion) – कम से कम 2 वर्ष तक छोड़ देना
4. धर्म परिवर्तन (Conversion)
5. मानसिक विकार (Mental Disorder)
6. असाध्य रोग (Venereal Disease)
7. संन्यास लेना (Renunciation)
8. 7 वर्ष तक जीवित होने की खबर न होना
9. आपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent Divorce)

More Information :

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