SSY Poetry
चौहा
सारी दुनिया के खातिर ही, करता मैं प्रभु से फरियाद ।थूक हाथ पर स्वयं ओट ले,सब को ऐसी दे औलाद। मात-पिता का सभी घरों में, रहे सर्वदा पूरा राज।मान तथा सम्मान के लिए, होवे न कोई मोहताज।
चौहा
तीनों भाई आज रात से, न्यारे न्यारे सारे होय।मात खड़ी है चौक बीच में, उसे ना साझे रखे कोय।
तीनों ने फिर हार मान के, राह निकाली अद्भुत एक।दस दिन रखिए बारी बारी, कितना सुंदर नेक विवेक!
मन के अंदर ना रखो, बात करे जो घात।
त्वरित विरेचन कीजिए,स्वस्थ रहे जज्बात।
मन से शीघ्र निकाल दो,बात करे जो घात।
जल्द विरेचन ना हुआ, होगा फिर आघात।
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