VIPUL RAJ

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27/04/2024

मत की कीमत
किसी भी लोकतंत्र के तहत होने वाले चुनाव में एक-एक मत अतिमहत्वपूर्ण होता है। इसके बावजूद बहुत से लोग सोचते हैं कि उनके एक मत से वास्तव में कोई फर्क पड़ने वाला नहीं। जबकि इतिहास गवाह है कि महज एक मत की हार से तख्तापलट हो गया।मसलन, 1923 में सिर्फ एक मत ज्यादा मिलने से हिटलर नाजी पार्टी के प्रमुख बना और हिटलर युग की शुरुआत हुई। 1977 में निक्सन अपने प्रतिद्वंदी रॉबर्ट एमांड से 572 के मुकाबले 571 मत प्राप्त करके हार गए थे । 17 अप्रैल 1999 को सिर्फ एक मत से अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार गिर गई थी। इस तरह से कई अन्य उदाहरण है। इसलिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में चाहे देश चलाने या किसी भी तरह की संस्था चलाने के लिए, मतदान द्वारा दायित्व सौंपा जाता है। मतदान शक्ति को नियंत्रण में रखने में मदद करता है। मतदान जिम्मेदार और उत्तरदायी व्यवस्था को बढ़ावा देता है। इसलिए मतदान मतदाताओं का एक कारगर अधिकार है।

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