Vikas Roshan
15/02/2026
📰 सिखरेड़ा गाँव में प्रदूषण की शिकायतें तेज़, DISHA Paper Mill क्षेत्र पर उठे सवाल
मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) से रिपोर्ट
मुज़फ्फरनगर जनपद के सिखरेड़ा गाँव के आसपास रहने वाले ग्रामीणों ने हाल के दिनों में हवा और शोर प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंताएँ व्यक्त की हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 9वें किलोमीटर, जॉली रोड स्थित DISHA Paper Mill क्षेत्र से उठने वाले धुएँ और तेज़ औद्योगिक आवाज़ों के कारण सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई घरों में बदबू और दम घुटने जैसी स्थिति महसूस की जा रही है। कुछ लोगों ने साँस लेने में परेशानी, आँखों में जलन और सिरदर्द की शिकायत भी बताई है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले सुबह 4–5 बजे की हवा शुद्ध और ताज़गी भरी हुआ करती थी, लेकिन अब उस अनुभव में बदलाव महसूस किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से क्षेत्र का निरीक्षण कराने और आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि औद्योगिक ईंधन या RDF (Refuse Derived Fuel) जैसे मिश्रित कचरे का उपयोग किया जा रहा है, तो यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी प्रदूषण नियंत्रण मानकों का सख्ती से पालन हो।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी औद्योगिक इकाई में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण सही ढंग से कार्य न करें, तो उससे निकलने वाले धुएँ और गैसों का प्रभाव मानव स्वास्थ्य, मिट्टी और आसपास के पर्यावरण पर पड़ सकता है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर अभी तक किसी प्रकार के उल्लंघन की पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने संबंधित विभागों से पारदर्शी जांच और सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करने की अपील की है, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके और लोगों की चिंताओं का समाधान हो सके।
यह मामला जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है, और स्थानीय समुदाय साफ़ हवा के अपने अधिकार की बात कर रहा है।
15/02/2026
📰 सिखरेड़ा गाँव में प्रदूषण की शिकायतें तेज़, DISHA Paper Mill क्षेत्र पर उठे सवाल
मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) से रिपोर्ट
मुज़फ्फरनगर जनपद के सिखरेड़ा गाँव के आसपास रहने वाले ग्रामीणों ने हाल के दिनों में हवा और शोर प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंताएँ व्यक्त की हैं। ग्रामीणों का कहना है कि 9वें किलोमीटर, जॉली रोड स्थित DISHA Paper Mill क्षेत्र से उठने वाले धुएँ और तेज़ औद्योगिक आवाज़ों के कारण सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई घरों में बदबू और दम घुटने जैसी स्थिति महसूस की जा रही है। कुछ लोगों ने साँस लेने में परेशानी, आँखों में जलन और सिरदर्द की शिकायत भी बताई है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले सुबह 4–5 बजे की हवा शुद्ध और ताज़गी भरी हुआ करती थी, लेकिन अब उस अनुभव में बदलाव महसूस किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से क्षेत्र का निरीक्षण कराने और आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि औद्योगिक ईंधन या RDF (Refuse Derived Fuel) जैसे मिश्रित कचरे का उपयोग किया जा रहा है, तो यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी प्रदूषण नियंत्रण मानकों का सख्ती से पालन हो।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी औद्योगिक इकाई में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण सही ढंग से कार्य न करें, तो उससे निकलने वाले धुएँ और गैसों का प्रभाव मानव स्वास्थ्य, मिट्टी और आसपास के पर्यावरण पर पड़ सकता है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर अभी तक किसी प्रकार के उल्लंघन की पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने संबंधित विभागों से पारदर्शी जांच और सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करने की अपील की है, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके और लोगों की चिंताओं का समाधान हो सके।
यह मामला जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है, और स्थानीय समुदाय साफ़ हवा के अपने अधिकार की बात कर रहा है।
08/02/2026
Disha Factory ka zehar = Sikhreda ke logon ki saansein khatre mein
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