Paropkar

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महर्षि व्यास ने अठारह पुराणों की रचना का सार सिर्फ दो शब्दों में व्यक्त किया परोपकार पुण्य और परपीड़ा पाप अहंकार रहित होकर, निर्मल निश्चल भाव से, निःस्वार्थ, वसुधैव कुटुम्बकम्‌ को ध्यान में रखते हुए मानवमात्र की सेवा ही परोपकार है।
इन्हीं उदात्त भावनाओं से प्रेरित होकर वर्ष १९९८ में श्रद्धेय स्वामी सत्यमित्रानंदजी के शुभाशीष से परोपकार का जन्म हुआ जो आज अपनी सेवा यात्रा के १२ वर्ष तय कर चुकी है। स

10/07/2024

हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा🙏🙏🙏🚩🚩🚩

07/07/2024

गणपति गजानंद महाराज की जय 🙏🙏🙏🚩🚩🚩

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