Smart Health Solutions
30/09/2025
इन नौ औषधियों में वास है माता नवदुर्गा का
औषधी: सम्प्रवक्ष्यामि महारक्षा विधायिनी ।
महाकाली तथा चण्डी वाराही चेश्वरी तथा ।।
सुदर्शना तथेन्द्रेणी गात्रास्या रक्षयन्ति तम् ।
बला चातिबला भीरूर्मुसली सहदेव्यपि ।।
जाती च मल्लिका यूथी गारुड़ी भृङ्गराजक:।
चक्ररूपा महौषध्यो धारिताविजयादिदा: ।।अग्निपुराण १२५/४३-४५
मां दुर्गा नौ रूपों में अपने भक्तों का कल्याण कर उनके सारे संकट हर लेती हैं।
इस बात का जीता जागता प्रमाण है, संसार में उपलब्ध वे औषधियां,जिन्हें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के रूप में जाना जाता है। नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया। चिकित्सा प्रणाली का यह रहस्य वास्तव में ब्रह्माजी ने दिया था जिसे बारे में दुर्गाकवच में संदर्भ मिल जाता है। ये औषधियां समस्त प्राणियों के रोगों को हरने वाली हैं।
शरीर की रक्षा के लिए कवच समान कार्य करती हैं। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जी सकता है। आइए जानते हैं दिव्य गुणों वाली नौ औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है।
१ प्रथम शैलपुत्री यानि हरड़👉 नवदुर्गा का प्रथम रूप शैलपुत्री माना गया है। कई प्रकारकी समस्याओं में काम आने वाली औषधि हरड़, हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप हैं। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है। इसमें हरीतिका (हरी) भय को हरने वाली है।
पथया - जो हित करने वाली है।
कायस्थ - जो शरीर को बनाए रखने वाली है।
अमृता - अमृत के समान
हेमवती - हिमालय पर होने वाली।
चेतकी -चित्त को प्रसन्न करने वाली है।
श्रेयसी (यशदाता)- शिवा यानी कल्याण करने वाली।
२ द्वितीय ब्रह्मचारिणी यानि ब्राह्मी👉 ब्राह्मी, नवदुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। यह आयु और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली, रूधिर विकारों का नाश करने वालीऔर स्वर को मधुर करने वाली है।
इसलिए ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है। यह मन एवं मस्तिष्क में शक्ति प्रदान करती है और गैस व मूत्र संबंधी रोगों की प्रमुख दवा है। यह मूत्र द्वारा रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ औषधि है। अत: इन रोगों से पीड़ित व्यक्ति को ब्रह्मचारिणी कीआराधना करना चाहिए।
३ तृतीय चंद्रघंटा यानि चन्दुसूर👉 नवदुर्गा का तीसरा रूप है चंद्रघंटा, इसे चन्दुसूर या चमसूर कहा गया है। यह एक ऐसा पौधा है जो धनिये के समान है। इस पौधे की पत्तियों की सब्जी बनाई जाती है, जो लाभदायक होती है।
यह औषधि मोटापा दूर करने में लाभप्रद है, इसलिए इसे चर्महन्ती भी कहते हैं। शक्ति को बढ़ाने वाली, हृदय रोग को ठीक करने वाली चंद्रिका औषधि है। अत: इस बीमारी से संबंधित रोगी को चंद्रघंटा की पूजा करना चाहिए।
४ चतुर्थ कुष्माण्डा यानि पेठा👉 नवदुर्गा का चौथा रूप कुष्माण्डा है। इस औषधि से पेठा मिठाई बनती है, इसलिए इस रूप को पेठा कहते हैं।
इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो पुष्टिकारक, वीर्यवर्धक व रक्त के विकार को ठीक कर पेट को साफ करने में सहायक है। मानसिकरूप से कमजोर व्यक्ति के लिए यह अमृत समान है। यह शरीर के समस्त दोषों को दूर कर हृदय रोग को ठीक करता है। कुम्हड़ा रक्त पित्त एवं गैस को दूर करता है। इन बीमारी से पीड़ितव्यक्ति को पेठा का उपयोग के साथ कुष्माण्डादेवी की आराधना करना चाहिए।
५ पंचम स्कंदमाता यानि अलसी👉 नवदुर्गा का पांचवा रूप स्कंदमाता है जिन्हें पार्वती एवं उमा भी कहते हैं। यह औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं। यह वात, पित्त, कफ, रोगों की नाशक औषधि है।
"अलसी नीलपुष्पी पावर्तती स्यादुमा क्षुमा।
अलसी मधुरा तिक्ता स्त्रिग्धापाके कदुर्गरु:।।
उष्णा दृष शुकवातन्धी कफ पित्त विनाशिनी।"
इस रोग से पीड़ित व्यक्ति ने स्कंदमाता की आराधना करना चाहिए।
६ षष्ठम कात्यायनी यानि मोइया👉 नवदुर्गा का छठा रूप कात्यायनी है। इसे आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है जैसे अम्बा, अम्बालिका, अम्बिका। इसके अलावा इसे मोइया अर्थात माचिका भी कहते हैं। यह कफ, पित्त, अधिक विकार एवं कंठ के रोग का नाश करती है।
इससे पीड़ित रोगी को इसका सेवन व कात्यायनी की आराधना करनी चाहिए।
७ सप्तम कालरात्रि यानि नागदौन👉 दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि है जिसे महायोगिनी, महायोगीश्वरी कहा गया है।
यह नागदौन औषधि केरूप में जानी जाती है। सभी प्रकार के रोगों की नाशक सर्वत्र विजय दिलाने वाली मन एवं मस्तिष्क के समस्त विकारों को दूर करने वाली औषधि है। इस पौधे को व्यक्ति अपने घर में लगाने पर घर के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यह सुख देने वाली एवं सभी विषों का नाश करने वाली औषधि है। इस कालरात्रि की आराधना प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को करना चाहिए।
८ अष्टम महागौरी यानि तुलसी👉 नवदुर्गा का अष्टम रूप महागौरी है, जिसे प्रत्येक व्यक्ति औषधि के रूप में जानता है क्योंकि इसका औषधि नाम तुलसी है जो प्रत्येक घर में लगाई जाती है। तुलसी सात प्रकार की होती है- सफेद तुलसी, काली तुलसी, मरुता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र।
ये सभी प्रकार की तुलसी रक्त को साफ करती है एवं हृदय रोग का नाश करती है।
"तुलसी सुरसा ग्राम्या सुलभा बहुमंजरी।
अपेतराक्षसी महागौरी शूलघ्नी देवदुन्दुभि:
तुलसी कटुका तिक्ता हुध उष्णाहाहपित्तकृत् ।
मरुदनिप्रदो हध तीक्षणाष्ण: पित्तलो लघु:।"
इस देवी की आराधना हर सामान्य एवं रोगी व्यक्ति को करना चाहिए।
९ नवम सिद्धिदात्री यानि शतावरी👉 नवदुर्गा का नवम रूप सिद्धिदात्री है, जिसे नारायणी याशतावरी कहते हैं। शतावरी बुद्धि बल एवं वीर्य के लिए उत्तम औषधि है। यह रक्त विकार एवं वात पित्त शोध नाशक और हृदय को बल देने वाली महाऔषधि है।
सिद्धिदात्री का जो मनुष्य नियमपूर्वक सेवन करता है। उसके सभी कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति को सिद्धिदात्री देवी की आराधना करना चाहिए। इस प्रकार प्रत्येक देवी आयुर्वेद की भाषा में मार्कण्डेय पुराण के अनुसार नौ औषधि के रूप में मनुष्य की प्रत्येक बीमारी को ठीक कर रक्त का संचालन उचित एवं साफ कर मनुष्य को स्वस्थ करती है। अत: मनुष्य को इनकी आराधना एवं सेवन करना चाहिए।
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
सर्व मंगलम मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।
शरण्ये त्रयम्ब्के गौरी नारायणी नमो स्तुते।।
19/08/2025
हाईवे पर किसी सस्ते ढाबे में खाना खाइये, menu में कम से कम 6 आइटम पनीर के होंगे। 5 स्टार होटल में जाइये, वेजीटेरियन सेक्शन में 60% डिशेज़ पनीर की होती है।
30 रु में 6 पनीर मोमोज मिलते हैं?
50 रु में पनीर पिज़्ज़ा?
100 रु में बटर पनीर ?
40 रु मे पनीर कुलचा?
आइये जानते है की पनीर का अर्थशास्त्र
70 रु में 1 लीटर अमूल का full क्रीम दूध आता है, जिसमे से करीब 200 ग्राम पनीर मिलता है। इस हिसाब से यदि 1किलो पनीर बनाना हो तो आपको 5 लीटर दूध की आवश्यकता पड़ेगी जिसकी कीमत 350 रु होगी। यानी अगर असली दूघ का पनीर बनाया जाए तो उसकी लागत कम से कम 350 रु तो होगी ही, फुटकर रूप में यदि ये मान लिया जाते कि दूध का फैक्ट्री मूल्य 50 रु प्रति लीटर भी हो तो भी 250 रु सिर्फ दूध की लागत होगी। अब यदि इसमें लेबर cost, गैस, ईंधन जोड़ लिया जाए तो ये लागत 60 रु पहुंच जायेगी। अब यदि इसमें सप्लाई chain, लॉजिस्टिक भी जोड़ लिया जाए तो ये लागत 63 रु पहुंच जाती है।
यानी कि कम से कम 315 रु का एक किलो पनीर अब यदि कोई दुकानदार इसे 10% प्रॉफिट पर भी बेचे जो कि इससे कहीं ज्यादा पर बेचता है तो ग्राहक को ये लागत कम से कम 345 से 350 रु प्रति किलो पड़नी चाहिए। अब यदि आप कोई पनीर 200 रु किलो या 250 रु किलो के भाव से खरीदते हैं तो क्या दुकानदार ने दानखाता खोल रखा है जो लागत से भी 25% कम पर आपको पनीर बेचेगा? असली पनीर की कीमत और मात्रा जाननी है तो घर पर पनीर बना कर देखिए अंदाज़ा हो जायेगा। फिर आता है एनालॉग पनीर ...यानी पनीर जैसा दिखने वाला और पनीर के टेक्सचर जैसा पदार्थ जिसके मूल इंग्रेडिएंट्स पाउडर का दूध, वनस्पति फैट, पाम आयल, अरारोट, स्टेबलाइजर और डेवलपिंग एजेंट्स होते हैं। अब चूंकि पाउडर मिल्क में फैट नही होता तो उसके लिए डालडा और पाम आयल मिलाया जाता है जिससे घनत्व बढ़ जाये। ये वही तेल हैं तो आर्टरी में जम जाते हैं ।
ये एनालॉग पनीर आपको बड़े बड़े 5 star होटल में भी मिलता है चाहे आप पनीर टिक्का खा रहे हों या पनीर दो प्याजा.. उससे भी निचली श्रेणी में आता है यूरिया, डिटर्जेंट और मैदे के घोल से बना पनीर.. यानी वो पनीर जिसे आप 30 रु के 6 मोमोज़ में स्वाद लेकर खाते है या फिर 50 रु में पनीर लोडेड पिज़्ज़ा बर्गर में खाते हैं। ये यूरिया सीधे आपकी किडनी और लीवर पर घात लगाता है साथ ही लंबे समय तक खाने पर जानलेवा भी सिद्ध हो सकता है। भारत मे प्रति दिन दूध का उत्पादन 64 करोड़ लीटर होता है। इस सारे दूध को फाड़कर यदि पनीर बना दिया जाए तो करीब 1 करोड़ 20 लाख किलो पनीर बन सकता है। लेकिन प्रति दिन पनीर की खपत करीब करीब 15000 टन है। क्या ये संभब है कि 1 करोड़ 50 लाख किलो पनीर 64 करोड़ लीटर दूध से बन पाए?
बाजार में मिलने वाला 80% से भी ज्यादा पनीर नकली है।
इसने रोड साइड से लेकर 5 स्टार होटल भी नकली पनीर खिला रहे हैं। क्या वजह है कि पिछले 30 सालों मे लीवर और किडनी की बीमारी में तेज़ी से इज़ाफ़ा हुआ है?
कभी जाकर देखिए छोटी छोटी गलियों के भीतर उबलते हुए उन भगोनों को जिनमे यूरिया उबल रहा है। जो लोग उसे बना रहे हैं उनसे कहिये की अपने बने पनीर को खाकर दिखाएं।
अगली बार जब आप किसी होटल में पनीर की डिश आर्डर करें तो कहिएगा एक टुकड़ा कच्चा पनीर लाकर आपको दिखाएं।
शर्त लगा सकता हूँ कि वो हज़ार बहाने बनाएंगे। इसे मैं आज़मा कर देख चुका हूँ। एक रेस्टोरेन्ट वाले ने तो ये भी कह दिया कि आपको खाना है तो खाओ वरना जाओ..लेकिन हम सैंपल नही दिखाएंगे।
मिल्क प्रोडक्ट सबसे बड़े scam हैं आज की तारिख़ में दुर्भाग्य से सरकार भी कुछ नही कर पा रही। नकली प्रोडक्ट हर दिन पकड़े जाते हैं लेकिन हमारे कानून में उसके लिए कुछ जुर्माना या छोटी मोटी सज़ा होती है। उनसे होने वाली लाखों इनडाइरेक्ट मौतों का जिम्मेदार उन्हें नही माना जाता। सिर्फ एक ही उपाय है जागरूकता और इन्फॉर्मेशन शेयरिंग वरना इंसान कीड़े मकोड़ों की तरह मरेंगे ओर कीड़े मकोड़े लंबे जिएंगे।साभार
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Contact the business
Telephone
Address
Mumbai
400001