Braj ke Rasik
22/05/2026
जिज्ञासा - क्या भगवान शरणागत भक्त का प्रारब्ध मिटा देते हैं ?
समाधान - शास्त्रों का उत्तर बड़ा संतुलित है —
भगवान हर कर्म को तुरंत समाप्त नहीं करते,
लेकिन अपने शरणागत भक्त के भयंकर दुःख को सहनीय अवश्य बना देते हैं।
श्रीमद्भागवत में भगवान कहते हैं कि —
जिस पर मेरी विशेष कृपा होती है,
मैं उसे संसार से विरक्त कर अपने चरणों की ओर ले आता हूँ।
भगवद्गीता (18.66) में भी श्रीकृष्ण कहते हैं —
“सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज,
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥”
अर्थात —
“तू मेरी शरण में आ जा,
मैं तुझे समस्त पापों से मुक्त कर दूँगा, शोक मत कर।”
संतों ने समझाया है —
पूर्ण शरणागति के बाद भी कुछ प्रारब्ध शरीर से भोगना पड़ सकता है,
किन्तु भगवान उसकी तीव्रता घटा देते हैं,
और भक्त को भीतर से ऐसी शक्ति देते हैं कि वही संकट
भगवत्-कृपा का माध्यम बन जाता है।
जिस दुःख से संसार टूट जाता है,
उसी दुःख में शरणागत भक्त, भगवान के और निकट आ जाता है।
15/05/2026
जिज्ञासा-- प्रभु के पास पहुंचने का सबसे सरल उपाय क्या है?
समाधान -- प्रभु का नाम जपते रहो, प्रेम बढ़ता जाएगा और अंत में वही प्रेम तुम्हें प्रभु के पास ले जाएगा।
श्री राधे राधे 🙏
28/04/2026
हरे कृष्ण ❤️,
हे कमलनयन! आपके श्री चरणों के सानिध्य की अपेक्षा जिसे त्रिभुवन का वैभव मुग्ध करे, मूर्ख है वह।
श्री राधे राधे 🌷
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