Bihar Positive
21/01/2025
औरंगाबाद में श्री ने विशाल जनसभा को संबोधित किया। जिसमें उन्होंने बताया कि- “झारखंड यहाँ से बगल में है वहाँ हमारी सरकार है तो पेंशन ज़्यादा है,महिलाओं को प्रतिमाह अनुदान और कई सुविधा है.. बिहार में भी ये सब संभव हो सकेगा जब बिहार में हमारी सरकार बनेगी।”
09/05/2022
बीपीएससी परीक्षा रद्द कर दी गई है। बीपीएससी की तैयारी ही मुश्किल नहीं होता है, सेंटर तक पहुंचकर सफलतापूर्वक इसकी परीक्षा देना भी मानो एक उपलब्धि है। अभ्यर्थियों को बिहार के एक कोने से दूसरे कोने परीक्षा के लिए बुलाया जाता है। जैसे नवादा जिले के छात्र को सीतामढ़ी, मोतिहारी के छात्र को रोहतास सेंटर मिलता है। सैकड़ों किलोमिटर का सफर तय कर लोग सेंटर पर पहुंचते हैं। न ठहरने को रूम मिलता है और न ट्रेन/बसों में बैठने की जगह।
इन सबके के बाद उनके परीक्षा हॉल में पहुंचने से पहले पेपर लीक हो जाता है। मामला दबा दिया गया तो ठीक नही तो हंगामा हुआ तो परीक्षा रद्द। इसको कहते हैं सिस्टम..
सीसी- Aapna Bihar
पीसी- @राहुल पांडे
10/07/2021
लोजपा अपने आप में एक अनोखा ही दल है, एक ऐसा दल जिसका कोई बहुत ही मजबूत जनाधार नही है पर फिर भी इतना जनाधारा जरूर है जो कि कई मौकों पे बेहद प्रभावशाली साबित होता है। एक ऐसा दल जिसके शीर्ष नेतृत्व से कभी जनमानस को कोई खास शिकायत नही रही चुकी अपनी समिति ताकत में उन्होंने हर तबके के लिए आवाज उठाई... लोजपा वो दल रहा है जो destructive न हो कर constructive राजनीति का हिस्सा रहा है जिसने सरकार गिराए नही बल्कि सरकार बनाएं हैं।
चुकी भारत के अन्य राजनैतिक दलों (खास कर क्षेत्रीय दलों) की भाँति लोजपा भी परिवारवाद का पोषक दल है तो जाहिर है इस दल को लग रहे आघातों के पीछे भी मुख्य वजह इस दल का सयोंजक परिवार ही है... पिछले कुछ महीनों से इस दल को एक के बाद एक कई आघात लगे हैं....पहले इस दल के पितामाह रामविलास पासवान जी का दुनिया से चले जाना फिर बिहार में पार्टी का बहुत बुरा प्रदर्शन इसके उपरांत अब रामविलास जी के भाई द्वारा पार्टी को चिराग (रामविलास के पुत्र) से छीन के उसपे कब्जा करने की कोशिस करना अपने आप में इस दल के समर्थकों के लिए बहुत ही पीड़ादायक है।
मैं भाजपा का प्रबल समर्थक हूँ पर संबंध अगर बिहार की राजनीति से है तो अन्य कई लोगो की तरह मेरे मन में भी चिराग और लोजपा के लिए एक सॉफ्ट कार्नर है और अब ऐसी परिस्थिति में जब अपने अस्तित्व को बचाने के लिए चिराग को राजद जैसे दल के साथ जाने की मजबूरी है ऐसे में भी मुझसे उनका विरोध नही हो पायेगा।
खैर इन सभी आघातों पे मरहम का काम ये तश्वीरें कर रही है... रामविलास जी ने दो शादियां की और चिराग उनकी दूसरी पत्नी से प्राप्त पुत्र हैं और कहीं न कहीं उनकी पहली पत्नी और उनकी बच्चियों के साथ अन्याय हुआ है... पारिवारिक मजबूरियों के कारण रामविलास जी जिन्होंने आज तलक राजनीत की कई समस्याओं का समाधान दिया था उनके पास अपने ही परिवार की इस समस्या का समाधान नही था... हालाकिं रामविलास जी की पहली पत्नी और उनकी बेटी ने हमेसा मुखर हो कर उनका साथ दिया (दामाद नाराज हो गयें) और रामविलास जी ने भी अपनी बेटियों के साथ पूरा न्याय करने की कोशिश की पर फिर भी रिश्तों के बीच अगर दूरियां आ जाती है तो मनमुटाव उसकी जगह ले लेता है और इस परिवार के साथ यही हुआ।
अब रामविलास जी नही है और दोनों पत्नियों के बीच विवाद भी रामविलास जी पे एकाधिकार को ले कर था जो कि उनके जाने के साथ खत्म हो गया... देखना ये था कि क्या चिराग अपने इस परिवार को एक साथ ला पायेंगे??
तो मौजूदा तश्वीर इसकी गवाही देता है कि हाँ चिराग ने कर दिखाया... चिराग ने अपनी बड़ी माँ के चरणों में स्थान बना ली, पिछले दिनों अपनी बहन के साथ भी वो इसी तन्मयता से मिले थे तब आज की ही भाँति दोनों के मन में जो वर्षों की पीड़ा थी वो उनके अश्रुओं के साथ बह निकली... ये तश्वीरें मुझ जैसे कई लोगों को भावुक कर देने वाला है जिन्होंने परिवार का महत्व समझा है, जिन्होंने परिवार की ताकत समझी है।
ईश्वर न करे पर गर चिराग राजनीति के अपने इम्तिहान में असफल हो भी जाते हैं तो भी उन्हें अपने परिवार को पूर्ण रूप से पुनः पा लेने के बाद राजनीति से मिले किसी भी पद से कहीं अधिक संतोष होगा।
चिराग को उनके जीवन की इस नई पारी के लिये ढेरो शुभकामनाएं... उनसे हम जैसे लोगों की भी अपेक्षाएं हैं।।
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