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28/10/2024

#प्रमुख संगठन एवं मुख्यालय :-

* अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)

वाशिंगटन

*विश्व बैंक

वाशिंगटन

*विश्व व्यापार संगठन (WTO)

जनेवा

*विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)

जनेवा

*गैट (GATT)

जनेवा

*रेडक्रॉस

जनेवा

*अंकटाड़

जनेवा

*अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)

जनेवा

*विश्व मौसम संगठन (wmo)

जनेवा

*अन्तराष्ट्रीय दूर- संचार संघ

जनेवा

*अन्तराष्ट्रीय कैंसर रोधी संगठन

जनेवा

*विश्व वन्य जीव कोष

(ग्लैंड, स्वीटजरलैंड) जनेवा

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAD)

रोम (इटली)

*विश्व खाद्य कार्यक्रम

रोम

*अन्तराष्ट्रीय कृषि विकास कोष

रोम

*संयुक्त राष्ट्र मानव पुनर्वास केन्द्र

नौरोबी

* एशियाई विकाश बैंक (ADB)

मनीला

* दक्षेस SAARC (सार्क)

काठमांडू

* ओपेक (OPEC)

वियना

* इंटरपोल

पेरिस

*अन्तराष्ट्रीय न्यायालय

हेग

* संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO)

न्यूयार्क (मैनहटन)

* यूनेस्को (UNESCO)

पेरिस

*इसरो (ESRO)

पेरिस

*आसियान

जकार्ता

*नाटो (NATO)

ब्रुसेल्स

*अफ्रिकी संघ

अदिस अबाबा

*अरब लीग

ट्यूनिस (काहिरा)

*एमनेस्टी इंटरनेशनल

लंदन

*विश्व पर्यटन संगठन

मैड्रिड (स्पेन)

*विश्व बौध्दिक संपदा संगठन

जिनेवा

*G-8

न्यूयॉर्क

*G-15

जनेवा

*G-24

बेलग्रेड

*G-77

जिनेवा

*अन्त्रराष्ट्रीय सड़क संघ

जिनेवा

*अन्तराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन

जिनेवा

*अन्तराष्ट्रीय समुद्री संगठन

लंदन

*सार्वभौमिक डाक संघ (UPD)

बर्न (स्वीटजरलैंड)

*अन्तराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी

वियना

*(UNIDO) संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन

वियना

*अन्त्रराष्ट्रीय नागरिक उड्‌ड‌यन संगठन

मांड्रियाल

* संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या एजेंसी

न्यूयार्क

* संयुक्तराष्ट्र अन्तराष्ट्रीय बाल संकट कोष

न्यूयार्क

*संयुक्त राष्ट्र विकाश कार्यक्रम

न्यूयार्क

*(UNEP) अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण कार्यक्रम

नौरोबी

*राष्ट्रमण्डत (कामन वेल्थ)

लंदन

*अन्तराष्ट्रीय ओलम्पिक समिति (IOC)

लुसाने

*U.N.

न्यूर्याक

*खाड़ी सहयोग संगठन

रियाद

22/06/2022

शिक्षको के लिए अभिशाप बनते मोबाइल, पढ़े इस पोस्ट को

जी हाँ, वहीं मोबाइल जिसे शिक्षकों ने अपनी खुद की कमाई से अपने घर परिवार रिश्तेदार से सम्पर्क साधने, मनोरंजन के साधन के तौर पर प्रयोग करने व बच्चों के बीच कक्षा शिक्षण को रोचक बनाने के लिए अपनी व्यक्तिगत इच्छा से खरीदा व प्रयोग किया। आज वही उनके लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। कभी कभी तो लगता है कि ये व्हाट्सअप के फाउंडर भी हैरान होंगे कि हमने जिस चैटिंग/इंटरटेनमेंट/सोशल प्लेटफॉर्म को बनाया था उसका प्रयोग भविष्य में हर 10 मिनट पर एक आधिकारिक वेतन रोको धमकी/कार्यवाही/सूचना देने के तौर पर होने लगेगा। हो यही रहा है फिलहाल…।कुछ अनसुलझे सवाल हैं जिनका जवाब देने को कोई तैयार नहीं है। सवाल 1- शिक्षकों की अपनी व्यक्तिगत सम्पत्ति है उनका मोबाइल, उनके अपनी खुद की कमाई का हिस्सा है वो, उन्होंने अपनी इच्छा से इसे प्रयोग किया।अगर वे न करें तो क्या कार्यवाही बनती है उनपर! सवाल 2 – शिक्षकों ने अपने व्यक्तिगत विकास के लिए व बच्चों के कक्ष शिक्षण को सरल सुलभ बनाने के लिए इसका कभी कभार परम्परागत शिक्षण में किया वो भी जब उन्हें आवश्यकता महसूस हुई…तो क्या थोपा जा सकता है कि नहीं आप प्रयोग करो ही करो?सवाल 3 – जब उनका खुद का फोन है तो अगर वे रिचार्ज नहीं करा पाते हैं तो क्या कार्यवाही बनती है उनपर ! वेतन इस बात का तो नहीं मिलता और न ही किसी सेवा नियमावली में ऐसा था कि आगे जाकर आपको अपना ही मोबाइल लेना है उसमें परमानैंट रिचार्ज कराकर रखना है। सवाल 4 – दुनिया भर के तमाम एप्स कोई क्यों रखे अपने मोबाइल में ? सवाल 5 – विभाग या व्यवस्थाएं जब इतना ही आवश्यक समझती हैं तो सभी के लिए इंतजाम क्यों नहीं करवातीं ? सवाल 6 – ये विद्यालय समय मे आखिर क्यों विभिन्न सूचनाएं विभागीय ग्रुप्स में भेजी जाती हैं औऱ उन्हें पढ़ने का मानसिक दबाव बनाया जाता है जबकि कहने को वो पढ़ाने का समय है। अभिभावक या अन्य की नजर में शिक्षक मोबाइल चला रहे हैं विद्यालय समय मे ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है या तो एक बकायदा प्रेस नोट जारी क्यों नहीं किया जाता कि शिक्षकों को विद्यालय समय मे मोबाइल समय-समय पर देखना आवश्यक है ऐसा विभाग उनसे करवा रहा है ।कई ऐसे सवाल हैं जो लाजमी हैं । इन सवालों को उठाने का मकसद बस यही है कि चौपट हो रही है पठन पाठन व्यवस्था, शिक्षकों को पढ़ाने नहीं दिया जा रहा विद्यालय समय मे, तमाम सूचनाएं विभिन्न एप्स व लिंक के माध्यम से मांगी जा रही हैं, दबाव है उन पर कि, वे ये सब विद्यालय समय मे ही करें औऱ समाज की नजरों में ये भ्रम भी फैलाया जा रहा है कि वे विद्यालय समय मे मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। इन सबमें जो सबसे बड़ी बात हैं वो ये हैं कि, ये मोबाइल उनके खुद के हैं। विभाग या सरकार द्वारा प्रदत्त नहीं।क्या निजी संपत्ति/साधन विभाग या सरकार का हो सकता है? आज विद्यालय के बाद का समय भी शिक्षकों के खुद के विकास और अगले दिवस की तैयारी या अपने आप को अपडेट रखने के लिए नहीं रह गया है। वे बाध्य कर दिए गए हैं कि वे अब शिक्षण में अपने से नया कुछ न सीखें वो सीखें जो उन्हें बस बताया जा रहा है – जैसे सूचना देना, एप्स पर फीडिंग करना, यूट्यूब सेशन देखना, बिना आवश्यकता ट्रेनिंग करना। एक पहले का समय था जब शिक्षक निश्चिन्त थे विद्यालयों में पठन पाठन को लेकर, विद्यालय समय के बाद का समय उनका खुद का समय था नया सीखने को। तब परिणाम क्या थे और अब क्या हैं कोई सबक नहीं लेना चाहता। इस तरह आँकड़ो की कलाबाजियां लगाकर लगता है कि आप कुछ हासिल कर सकेंगे तो आप भ्रम मे हैं, आप बस मानसिक तनाव ले रहे हैं और दे रहे हैं इसके अलावा कुछ नहीं। ों…..शोसल मिडिया से प्राप्त

Photos from Education knowledge's post 15/01/2017

पदार्थों का पृथक्करण

अनेक पदार्थों को यदि एक दूसरे मे मिला दिया जाये और उनमें कोई रायासनिक क्रिया न हो तो इन पदार्थों का एक मिश्रण बन जाता है। रसायनिक क्रिया होने पर मिश्रण नहीं बनता बल्कि एक नया पदार्थ ही बन जाता है। मिश्रण में जितने भी पदार्थ मिले हुए होते हैं उन सभी के गुण हम अलग-अलग देख सकते हैं। उदाहरण के लिये यदि पानी के एक गिलास मे हम नमक मिलायें और उसे चख कर देखें तो पानी में नमक का स्वाद आयेगा। इसके बाद उसमे चीनी भी मिला दें तो नमक और चीनी दोनो का स्वाद आयेगा। प्रकृति में हमे अनेक मिश्रण दिखाई देते हैं। तालाब के पानी में अनेक पदार्थ मिले हुए होते हैं। इसी प्रकार मिट्टी भी अनेक पदार्थों का मिश्रण है।

किसी मिश्रण मे मिले हुए पदार्थों को अलग करने को ही पदार्थों का पृथक्करण कहा जाता है। इसकी अनेक विधियां हैं: -
बीनना

यदि आपस में मिले हुए पदार्थों के कण काफी बड़े हैं और अलग-अलग दिखाई पड़ते हैं तो उन्हें हाथ से बीन कर अलग किया जा सकता है। हम कक्षा में गेहूं, चावल आदि से कंकण बीन कर अलग करने की गतिविधि करवा कर बीनने की विधि समझा सकते हैं।
चालना

यदि कण छोटे हैं और उन्हे हाथ से बीनकर अलग नहीं किया जा सकता परंतु मिले हुए पदार्थों के कणो का आकार अलग-अलग है तो उन्हें चलनी से अलग किया जा सकता है। चलनी में एक आकार के छेद होते हैं। जो कण इन छेदों से छोटे आकार के होते हैं वे चलनी के छेदों के पार चले जाते हैं और बड़े आकार के कण चलनी में ही रह जाते हैं। हम चलनी से आटा आदि चालने की गतिविधि करके कक्षा में दिखा सकते हैं।

फटकना

यदि किसी पदार्थ के कण पर बल लगाया जाये तो वह कण अपने भार के अनुसार अपने स्थान से हिलेगा। अत: यदि छोटे और बड़े कणों पर एक समान बल लगाया जाये तो छोटे कण दूर जाकर गिरेंगे परंतु बड़े कण या तो अपने स्थान से हिलेंगे ही नहीं और या फिर पास में ही गिरेंगे। इस बात का उपयोग सूप से फटककर पदार्थों को अलग करने में किया जाता है। इसका उपयोग घरों में गेहूं, चावल आदि से कंकण अलग करने में किया जाता है।

उड़ावनी

उड़ावनी में भी इसी बात का प्रयोग किया जाता है कि छोटे कण बल लगाने पर दूर गिरते हैं परंतु बड़े कण पास ही गिर जाते हैं। इसमें हवा के बल का प्रयोग करके छोटे कणों को दूर उड़ा दिया जाता है। इसका उपयोग अक्सर अनाज को भूसे से अलग करने में किया जाता है।
चुम्बकीय पृथक्करण

चुम्बकीय पदार्थ जैसे लोहा चुम्बक की ओर आकर्षित होते हैं। इसका उपयोग करके किसी मिश्रण से चुम्बकीय पदार्थ को चुम्बक की सहायता से अलग किया जा सकता है। कक्षा में हम रेत और लौह चूर्ण का मिश्रण बनाकर उसे चुम्बक की सहायता से अलग करने की गतिविधि करा सकते हैं।

निथारना

पानी या किसी द्रव में किसी अन्य अविलेय पदार्थ के मिश्रण को निथार कर अलग किया जा सकता है। इसमें गुरुत्वाकर्षण के बल का प्रयोग कणों को अलग करने में होता है। यदि पानी या अन्य द्रव में अविलेय पदार्थ के मिश्रण को कुछ देर तक बिना हिलाये रखा जाये, तो अविलेय पदार्थ के कण भारी होने के कारण नीचे बैठ पायेंगे। अब बर्तन को सावधानी से उठाकर ऊपर के पानी को किसी अन्य बर्तन में डाला जा सकता है। अन्य पदार्थ के भारी कण पहले बर्तन में ही रह जायेंगे। इसे ही निथारना कहते हैं। कक्षा में आसानी से गतिविधि के माध्यम से इसे दिखाया जा सकता है।

दो अविलेय द्रवों को पृथक्कारी कीप से अलग करना

पृथक्कारी कीप बनाने के लि‍ये एक प्लास्टिक की बोतल की तली को काट दें और बोतल के मुंह को किसी कार्क अथवा रबर के ढ़क्कन से इस प्रकार बंद करें कि उसमें से द्रव बाहर न निकल सके। अब पास के अस्पताल से एक पुराना ड्रिप सेट लाकर उसे इस बोतल के मुंह में लगा दें। अब बोतल को किसी खूंटी पर टांग दें और उसमें पानी तथा तेल का मिश्रण भर दें। मिश्रण को अच्छी तरह मिला लें जिससे पानी और तेल आपस में मिल जायें। अब बोतल को कुछ देर बिना हिलाये टंगा रहने दें। तेल पानी से हल्का होने के कारण ऊपर एकत्रित हो जायेगा और पानी नीचे आ जायेगा। अब ड्रिप सेट की टोटी को खोलें। नीचे एकत्रित पानी बाहर आने लगेगा। इसे एक बर्तन में एकत्रित कर लें। पानी पूरा बाहर आने के बाद ड्रिप सेट की टोंटी बंद कर दें। तेल बोतल में ही रह जायेगा। इस प्रकार गुरुत्वाकर्षण बल का उपयोग करके हमने अविलेय द्रवों को पृथक्कारी कीप की सहायता से अलग कर लिया है।

भारण -
इसका उपयोग किसी कोलाइडल सोल के पदार्थों को अलग करने में किया जाता है। कोलाइडल सोल में पदार्थ के कण पर बिजली का चार्ज रहता है जिसके कारण वे एक दूसरे से दूर रहते हैं और उनमे इतना भार नहीं होता कि वे द्रव में नीचे बैठ सकें। तालाब आदि का गंदला पानी और दूध आदि इसके उदाहरण हैं। इस सोल में यदि कोई ऐसी वस्तु मिलाई जाये जिससे कोलाइड के कणों से बिजली का चार्ज समाप्त हो सके तो यह कण एक दूसरे से मिलकर भारी हो जाते हैं और नीचे बैठ जाते हैं। गंदले पानी में फिटकरी मिलाने से कुछ देर बाद गंदगी नीचे बैठ जाती है और ऊपर साफ पानी रह जाता है। इसका उपयोग पेयजल की सफाई में किया जाता है। इसी प्रकार दूध में नीबू का रस मिला देने पर दूध के ठोस पदार्थ अलग होकर पनीर के रूप में नीचे बैठ जाते हैं और पानी मात्र ऊपर रह जाता है। इसका उपयोग दूध से पनीर बनाने मे किया जाता है।
अपकेंद्रण -
यदि किसी वस्तु को गोल घुमाया जाये तो उसमें एक बल उत्पन्न होता है जो उसे बाहर की ओर फेंकता है। इसे अपकेंद्री बल कहते हैं। किसी पत्थर या अन्य भारी वस्तु को एक रस्सी से बांधकर गोल घुमाने की गति‍विधि करके बच्चों को कक्षा में अपकेंद्री बल समझाया जा सकता है। अपकेंद्री बल का प्रयोग करके कणों को एक दूसरे से अलग करने को अपकेंद्रण कहते हैं।
प्लास्टिक की बोतल का सेन्ट्रिफ्यूज़ बनाने का एक वीडियो arvindgupta.com से साभार।

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छानना

जैसे चालने में अलग-अलग आकार के कणों को अलग किया जाता है वैसे ही छानने में भी बहुत छोटे आकार के कणों को छन्नी की सहायता से अलग किया जाता है। छन्नी अथवा फिल्टर में बहुत बारीक छेद होते हैं जिससे छोटे कण भी छन्नी में से बाहर नहीं जा सकते और पानी या अन्य द्रव ही बाहर जा सकता है। इसका उदाहरण देने के लिये हम फिल्टर पेपर की सहायता से अशुध्द पानी को छानकर दिखा सकते हैं। फिल्टर पेपर न होने पर अखबार के कागज का उपयोग फिल्टर पेपर के रूप में किया जा सकता है।

वाष्पीकरण

इसका उपयोग विलेय पदार्थों के प्रथक्करण में किया जाता है। कक्षा में गतिविधि कराने के लिये एक बर्तन में नमक मिला हुआ पानी लें और उसे गर्म करके पूरा पानी वाष्प बनकर उड़ जाने दें। बर्तन की तली में नमक बच जायेगा।

आसवन

इसमे हम वष्पीकरण करके किसी द्रव को गैस में परिवर्तित करते हैं और फिर उस गैस को ठंडा करके पुन: द्रव में परिवर्तित कर लेते हैं। नमक मिले पानी के प्रयोग में यदि हम वाष्प को किसी ठंडी स्टील की प्लेट से टकराने दें तो यह वाष्प वापस पानी बन जायेगी और पानी की बूंदों के रूप में प्लेट पर एकत्रित हो जायेगी। पानी की इन बूंदों को हम किसी अन्य बर्तन में भी एकत्रित कर सकते हैं। इस प्रकार हमने नमक मिले पानी से नमक और पानी को अलग- अलग प्राप्त कर लिया है।

क्रि‍स्टलीकरण

किसी कांच के बर्तन में पानी को गर्म करें और उसमे नीला थोथा तब तक मिलायें तब तक और अधिक नीला थोथा उसमे घुलना बंद न हो जाये। अब पानी को ठंडा करें। बर्तन की तली पर लीले थोथे के क्रिस्टसल दिखाई देंगे।

ऊर्घ्वपातन

यह ऐसे ठोस पदार्थों को पृथक करने के लिये प्रयोग किया जाता है जो गर्म करने पर ठोस से सीधे गैस में बदल जाते हैं, जैसे नौसादर, कपूर आदि। एक कांच के बर्तन में नमक और नौसादर का मिश्रण लेकर उस बर्तन के मुंह को रुई से बंद कर लें और फिर बर्तन को गर्म करें। नौसादर की सफेद वाष्प ऊपर उठेगी। अब इसे ठंडा होने दें। नौसादर की वाष्प बर्तन की दीवारों पर वापस ठोस बनकर जम जायेगी और तली में केवल नमक रह जायेगा। इसे ऊर्घ्वपातन कहते हैं।

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