Library aun
07/12/2025
चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है,
हम को अब तक अशिकी का वो जमाना याद है।
21/02/2025
31/01/2025
30/01/2025
22/12/2024
सुना हैं हर चीज मिल जाती हैं दुआँ से,
इक रोज तुम्हें मांग के देखेंगे ख़ुदा से..! 🌟💫✨
09/06/2024
वक्त का ये परिंदा रुका है कहां,
मैं था पागल जो इसको बुलाता रहा।
चार पैसे कमाने मैं आया शहर,
गांव मेरा मुझे याद आता रहा ।।
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