BAPSA BBAU

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22/08/2023

साथियों, जैसा कि हम जानते हैं विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के द्वारा "रामचरितमानस में लोक संवाद" विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया है। रामचरितमानस जो कि मनुवादी व ब्राह्मणवादी विचारधारा को मजबूत करने वाला समताविरोधी ग्रंथ है जिसमें दलितों, आदिवासियों ,पिछड़ों एवं महिलाओं के खिलाफ अभद्र एवं नीचा दिखाने वाली टिप्पणियां की गई है। आज ब्राह्मणवादी हिंदुत्व फासीवाद के दौर में जहां मीडिया निरंतर शासन सत्ता एवं व्यवस्था की कठपुतली बनकर प्रचार का साधन बनते जा रही है ,के दौर में रामचरितमानस के ऊपर सेमिनार का आयोजन करना इसी ब्राह्मणवादी फासीवाद को मजबूत करने की एक सोची-समझी चाल है।
रामचरितमानस ब्राह्मणवादी विचारों से ओतप्रोत ग्रंथ है। जो महिलाओं को दोयम दर्जे के रूप में देखते हुए उन्हें पुरुषों की अधीनता के तौर पर स्वीकृति प्रदान कर एक पितृसत्तावादी मानदंड को प्रस्थापित करता है। यह ग्रंथ शूद्रों व अतिशूद्रों को शिक्षा से वंचित रखते हुए द्विज (उच्चवर्णीय) जातियों के शिक्षा पर एकाधिकार को समाज में स्वीकृति दिलाता है। रामचरितमानस हर तरीके से उच्चवर्णीय जातियों के शूद्रों पर शासन को मान्यता दिलाता है और असमान भेदभावपूर्ण समाज की कल्पना करता है।
इस दौर में जहां अकादमी डिस्कोर्स के तौर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों में कई आधुनिक एवं समकालीन विषयों पर परिचर्चाए हो रही है वही हमारे विश्वविद्यालय में रामचरितमानस के ऊपर सेमिनार का आयोजन करना इस विश्वविद्यालय में धार्मिकता को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। विश्वविद्यालयीन सेमिनारों में तर्क पूर्ण एवं वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने वाले विषयों पर परिचय होनी चाहिए लेकिन वही हमारे विश्वविद्यालय में रामचरितमानस पर चर्चा करना मानसिक मूढ़ता का परिचय है।
एक तरफ जहां देशभर के संजीदा लोगों ने रामचरितमानस को जनविरोधी करार देते हुए इसकी आलोचना की है वही विश्वविद्यालय द्वारा रामचरितमानस के विषय पर सेमिनार का आयोजन करना कई प्रश्नों को खड़ा करता है। आज के दौर में रामचरितमानस पर चर्चा करना विश्वविद्यालय में मनुवादी विचारों को बढ़ावा देना है। देश की हिंदुत्व ताकते 2024 के चुनाव को मध्य नजर रखते हुए देश भर में धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने की तमाम कोशिशें कर रही है और हम (BAPSA-BBAU) इस सेमिनार को भी इसी साजिश का एक हिस्से के रूप में देखते हैं।
"बिरसा-अंबेडकर-फूले स्टूडेंट एसोसिएशन" (BAPSA-BBA) रामचरितमानस पर होने वाले इस सेमिनार का पुरजोर विरोध करता है और साथ में विश्वविद्यालय के तमाम संजीदा जनवादी छात्रों से आवाहन करता है कि वे भी इस तरह के अतार्किक, और अवैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम के विरोध में हमारे साथ शामिल हो।

03/07/2023

बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर विश्विद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्र UG (स्नातक स्तर ) पर विश्वविद्यालय मे प्रवेश प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रेशन शुरु हो गया है, ससमय अपना -अपना रजिस्ट्रेशन करवा लें जिसमे SC/ST छात्र/ छात्राओं को 50% आरक्षण की व्यवस्था है , जिससे केटेगरी के छात्रों का प्रवेश पाने में आसानी हो जाती अधिक से अधिक छात्र आवेदन करें जिससे कि विश्विद्यालय के समस्त सीट भरी जा सके नही तो कुंठित मानसिकता के लोग आवेदन कम होने पर आनाकानी करते है , अधिक से अधिक शेयर करे और SC/ST छात्रों को प्रेरित करे BBAU में प्रवेश लेने के लिए BAPSA संगठन आप के सहयोग के लिए हमेशा साथ है।
जरूरत पड़ने पर ...9956123596 सम्पर्क कर सकते हैl जिम्मेदार साथी अपना अपना no add कर मैसेज अधिक से अधिक शेयर करे जिससे कि समाज के छात्रों का सहयोग हो सके और BAPSA से लोग जुड़ सके
Dhanyavaad 🙏🙏

23/05/2023

बीबीएयू में बिजली गुल,छात्र हुए आक्रोशित

अंतिम सेमेस्टर परीक्षा तैयारी में बिजली बनी बाधा

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय परिसर में बिजली काटे जाने से छात्र काफी आक्रोशित है।अंतिम सेमेस्टर परीक्षा तैयारी में बिजली कटौती बाधा बनी हुई है।छात्रों का कहना है कि 1996 में बनी यूनिवर्सिटी में इतने वर्ष बीतने के बाद भी कोई बैकअप की व्यवस्था नहीं है।दरअसल मंगलवार देर शाम से विवि परिसर में बिजली काटी गयी है।हॉस्टल और लाइब्रेरी में विद्युत कटौती की गयी है।जिसके कारण छात्रों में विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ गुस्सा व्याप्त हो गया।गौतम बुद्ध केंद्रीय पुस्तकालय के सैकड़ों छात्रों ने कुलपति आवास धरना दिया,जिसके बाद प्रॉक्टर संजय कुमार ने छात्रों फुसला कर पुस्तकालय लेकर आ गए।लेकिन फिर भी बिजली का कोई समाधान नहीं हुआ।बताते चलें विवि में अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं चल रही हैं।छात्रों का कहना है विश्वविद्यालय प्रशासन जानबूझकर बिजली कटौती कर रहा है।बिना बिजली के कैसे परीक्षा की तैयारी कैसे करेंगे।विद्युत इंजिनियर लगभग दो घंटे से इधर-उधर कर रहें हैं। ऐसे छात्र क्या करें।

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