Sanam
26/09/2022
तलब उठती है बार-बार तेरे दीदार की
,
ना जाने देखते-देखते कब तुम लत बन गये।
22/10/2020
नुमाइश जिस्म की बे-इज्जती करती है इश्क़ की,
मैं सादगी का कायल हूँ, पूरे लिबास में आना..!
22/10/2020
तुम एक चिराग़ की ख़ैरात दे रहे हो मुझे ,
मैं आफ़ताब से दामन छुड़ा कर आया हूँ ....
16/10/2020
वफा की तलाश थी #सनम
कुत्ता ले आया हूं
15/10/2020
बदनाम तो बहुत हुं मैं इस जमाने में
तु बता तेरे सुनने में कोनसा किस्सा आया है..!!
14/10/2020
वह मेरी माँ को अम्मी बोलती है....!!
फिर मेरी माँ ने भी कभी बहू नही कहा उसे....!!
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