Hindu Unity Movement
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चारो वर्ण के प्रतीक श्रीराम में वैश्यत्व व शूद्रत्व
मित्रों,
भगवान श्रीराम परमात्मस्वरुप से चारो वर्णों के जनक हैं इस कारण उनमें चारो वर्ण बीजरूप से अवश्य थे|उन्होने राम रूप में अवतार लिया,इसलिए उनके अवताररूप में भी चारो वर्ण होना चाहिए|हमने अपनी पिछली पोस्टों में धर्मशास्त्रों के आधार पर यह सिद्ध किया है कि मनुष्य रूप में अवतरित दशरथनन्दन श्रीराम को ब्राह्मण और क्षत्रिय वर्ण का कैसे कहा जा सकता है|
आज की पोस्ट के माध्यम से हम प्रभु श्रीराम में वैश्यत्व और शूद्रत्व कैसे कहा जा सकता है,धर्मशास्त्रों के आधार पर कहने का प्रयास करेंगे|जिन किन्ही सज्जन को यह पोस्ट पढ़कर त्रुटि लगे वे मेरे माता पिता की भांति इसे बालवचन मानकर विनोद स्वरूप ले लेवें |
श्रीमद् भगवतगीता के अनुसार :-
'' कृषि वाणिज्य गोरक्ष्य वैश्य कर्म स्वभावजम ''
अर्थात कृषि,व्यापार ,गाय की रक्षा वैश्य का स्वाभाविक कर्म है|
वैश्य के लिए यह कत्तई आवश्यक नही है कि वह तीनो कर्म को करता हो,यदि इन तीन में से व्यक्ति स्वभावत: कोई एक भी कर्म करता हो तो उसे वैश्य कहा जायेगा|
रामचरितमानस के अनुसार श्रीराम के अवतार के प्रमुख उद्देश्यों में गायों की रक्षा एक प्रमुख उद्देश्य था|यथा:-
''विप्र धेनु सुर सन्त हित लीन्ह मनुज अवतार''
अर्थात श्रीराम ने विप्र,गाय,देवता और सन्त का भला करने( रक्षा) हेतु अवतार लिया|
इस प्रकार यह सिद्ध होता है कि श्रीराम में वैश्यत्व विद्यमान था|
जहाँ तक शूद्रत्व की बात है तो देखिए श्रीराम के शरीर का रंग श्याम(नीला)था|यथा:-
''नीलाम्बुजश्यामल कोमलांगं ''
अथवा
''नील सरोरुह नीलमणि नील नील घनश्याम''
अब जरा हरिवंशपुराण के अनुसार वर्ण व्यवस्था देखिए:-
श्वेतलौहितकैवर्णै: पीतैर्नीलैश्च ब्राह्मणा:|
अभिनिर्वर्तिता वर्णाश्चिन्यमानेन विष्णुना|
ततो वर्णत्वमापन्ना: प्रजालोकचतुर्विधा|
ब्राह्मणा: क्षत्रिया वैश्या: शूद्राश्च महीपते|
साराशंत: हे ब्राह्मण भगवान विष्णु द्वारा चिन्तन करने पर सफेद,लाल,पीले और नीले रंग के चार वर्ण उत्पन्न हुए जो प्रजारूप से क्रमश: ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य और शूद्र कहलाए|
इससे यह स्पष्ट होता है कि शूद्र का रंग नीला हुआ|श्रीराम का रंग भी तो नीला ही था|
एक अन्य दृष्टि से विचार करें|''शूद्र'' शब्द की व्युतपत्ति 'शूँ, धातु से हुयी है|महर्षि पाणिनि के अनुसार 'शूँ,पावने अर्थात जो पावन करता हो|राम को 'पावनं पावनानाम्'कहा गया है|उनके नाम को भी पावन करने वाला कहा गया है,यथा:-
सुमिरि पवनसुत पावन नामू|अपने बस करि राखे रामू||
उपरोक्त प्रकार से यदि देखा जाए तो श्रीराम में वैश्य और शूद्र वर्ण की विद्यमानता से इन्कार नही किया जा सकता है|
धन्यवाद|
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