BAPSA Lucknow
10/01/2025
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जय भीम💙
नमो बुद्धाय✨
30/12/2024
Jai bhim 💙
Bapsa stands in solidarity with BHU students.
24/12/2024
बाबासाहेब द्वारा 25 दिसम्बर 1927 मे मनुस्मृति दहन की गई थी। आज भी मनुस्मृति दहन ब्राह्मणवाद व पितृसत्ता की संरचना को तोडने का प्रतीक है।
जय भीम💙
नमो बुद्धाय ✨
13/10/2024
धम्मचक्रप्रवर्तन दिवस की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ✨
२० वीं सदी के मध्य में बोधिसत्व, भारत रत्न , विश्व ज्ञानपुंज, सिंबल ऑफ नॉलेज डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर ने अशोक विजयादशमी के दिन १४ अक्टूबर १९५६ को नागपुर में अपने ५,००,००० (5 लाख से अधिक) अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था। डॉ॰ आंबेडकर ने जहां बौद्ध धम्म की दीक्षा ली वह भूमि आज दीक्षाभूमि के नाम से जानी जाती है। डॉ॰ आंबेडकर ने जब बौद्ध धर्म अपनाया था तब बुद्धाब्ध (बौद्ध वर्ष) २५०० था। विश्व के कई देशों एवं भारत के हर राज्यों से बौद्ध अनुयाई बहुत बड़ी संख्या में हर साल दीक्षाभूमि, नागपुर आकर धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस १४ अक्टूबर को एक उत्सव के रूप में मनाते हैं साथ ही बौद्ध धम्म ग्रहण भी करते हैं और जीवन को नैतिकता, समानता, बंधुत्व, न्याय को शामिल करने का संकल्प लेते है।यह त्यौहार व्यापक रूप से डॉ॰ आंबेडकर के बौद्ध अनुयायियों द्वारा मनाया जाता है।
डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर ने यह दिन बौद्ध धम्म दीक्षा के लिए चूना क्योंकि इसी दिन ईसा पूर्व ३ री सदी में सम्राट अशोक ने भी बौद्ध धर्म ग्रहण किया था। तब से यह दिवस बौद्ध इतिहास में अशोक विजयादशमी के रूप में जाना जाता था, डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर ने बीसवीं सदीं में बौद्ध धर्म अपनाकर भारत से लुप्त हुए धर्म का भारत में पुनरुत्थान किया।
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