Rajasthan Views

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31/12/2025

"मुट्ठी भर बाजरे के लिए मैं आज पूरे हिंदुस्तान की बादशाहत खो देता।" - शेरशाह सूरी
(जनवरी 1544) में मारवाड़ की पावन धरा पर 'गिरी-सुमेल' का वह ऐतिहासिक युद्ध लड़ा गया था, जिसने दिल्ली की सल्तनत को हिला कर रख दिया था।

भले ही छल-कपट से शेरशाह सूरी यह युद्ध जीत गया, लेकिन सेनापति जैता और कुंपा के अदम्य साहस और बलिदान ने इतिहास के पन्नों में अपनी अमिट छाप छोड़ दी।

मारवाड़ के इन वीर सपूतों ने मुट्ठी भर सैनिकों के साथ शेरशाह की विशाल सेना के पसीने छुड़ा दिए थे।
वीर शिरोमणि जैता और कुंपा जी के बलिदान को कोटि-कोटि नमन! 🙏⚔️

JaitaKumpa Rajputana

26/12/2025

इसका इतिहास कुंपाजी के वंशजों से जुड़ा है, जिन्होंने मारवाड़ की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया, खासकर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में ठाकुर शिवनाथ सिंह जैसे योद्धाओं ने अंग्रेज़ों और जोधपुर महाराजा का विरोध कर अपनी शौर्य गाथा लिखी।

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