Rawal singh RK
14/09/2024
११ वर्ष की राजपुरोहित जाति की सती जिन्होंने मात्र सगाई होने के उपरांत भी अपने होने वाले पति के पिछे सत किया। कहानी संवत १७२५ की है जब १६ गांवों सहित ओसियां की जागीर महारावल मालदेवजी के पुत्र राज श्री सहसमल जी के वंशजों के पास थी।सहसमल जी महाराजा सूर सिंह जी के ससुर थे।
इन राज श्री सहसमल जी के पुत्र थे केशवदासजी और केशवदासजी के पुत्र थे रुघनाथ जी इन्हीं रुघनाथ जी के समय एक घटना ऐसी हुई जिसे उस वक्त जमर करना कहते थे।जमर अकसर ब्राह्मण, राजपुरोहित व चारणों द्वारा जागीर दार द्वारा उन पर कोई गलत निर्णय लेने पर विरोध स्वरूप अपने स्वयं के प्राण हरण कर किया जाता था। गांव बासनी के राजगुरु द्वारकादास जी की पुत्री भणदे की सगाई बड़ाबास में की हुई थी देवली पर लेख अनुसार संभवतः युवक का नाम धर्मानंद था इनके द्वारा जागीर दार के विरुद्ध जमर करने पर भण दे ने भी सत किया और जागीरदारों को शाप दिया जिससे उनकी वंशवृद्धि कम हो गई और कालांतर में जागीर भी जब्त हो गई।
इन्हीं सती माता जी की छतरी ओसियां सच्चियाय माताजी मंदिर गेट के पास दाहिनी तरफ बनी हुई है।
लेख पठन का प्रयास किया है जो लगभग इस प्रकार है थोड़ी बहुत त्रुटी हो सकती है लेख अनुसार छतरी इन्हीं ठाकुर साहब रुघनाथ जी द्वारा बनवाई गई उनके पिछे खेत वग़ैरह भी दिया पर उसे स्वीकारा नहीं गया -
१-श्री समत १७२५ व
२- र्षे मती भादवा सुदी २
३- वार सुकर प्रोहत धरमै
४- द अमजी सुत नं गल
५-घत नै भण दे सत हुई
६- राजगुरु दवारका दा
७- स री बेटी बरसे ११ सत
८- हुई भाटी रुघनाथ
९-केसवदसत उपर
१०- षेत वावड वल छ
११-टी दवण तंलकषद पा
१२-वे कोही नहीं
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