Vaidik Mathematics

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04/07/2025

आओ सीखें तेज़ और आसान गणित - वैदिक गणित के साथ! 🌟

🧠 क्या गणित से डर लगता है?
📐 जोड़, घटाव, गुणा, भाग में समय लगता है?
अब नहीं!
"वैदिक गणित" के 16 आसान सूत्रों से गणना होगी फटाफट!

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#वैदिकगणित #गणित

30/06/2025

आइए हम वैदिक गणित के 16 सूत्रों को सरल उदाहरणों के साथ समझते हैं ताकि आप इन्हें दैनिक जीवन में उपयोग कर सकें – विशेष रूप से गणना (गणित) को तेज़ और आसान बनाने में।

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🔢 1. एकाधिकेन पूर्वेण (Ekadhikena Purvena)

अर्थ: "एक अधिक से पूर्व का उपयोग"
📌 उपयोग: 5 जैसे संख्याओं से अंत वाले अंकों का वर्ग निकालने में
🔍 उदाहरण:
105² = ?

100 × (100 + 1) = 100 × 101 = 10100

फिर 5² = 25

अंतिम उत्तर = 10100 + 25 = 11025

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🔢 2. निखिलम् नवत:श्चरमं दशतः (Nikhilam Navatashcaramam Dashatah)

अर्थ: "सब 9 से और अंतिम 10 से घटाओ"
📌 उपयोग: किसी संख्या को 10, 100, 1000 आदि के निकट से घटाकर गुणा करना
🔍 उदाहरण:
98 × 97 = ?

98 → 100 - 2

97 → 100 - 3

98 - 3 = 95

2 × 3 = 6

उत्तर = 9506

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🔢 3. ऊर्ध्वतिर्यग्भ्याम् (Urdhva Tiryagbhyam)

अर्थ: ऊपर और क्रॉस गुणा
📌 उपयोग: किसी भी दो अंकों को तेज़ी से गुणा करने में
🔍 उदाहरण:
23 × 12 = ?

2×1 = 2

(2×2)+(3×1) = 4+3 = 7

3×2 = 6

उत्तर = 276

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🔢 4. परावर्त्य योजयेत् (Paravartya Yojayet)

अर्थ: उल्टा करके जोड़ो
📌 उपयोग: विभाजन में
🔍 उदाहरण:
1 / (1 - x) को सिरीज़ में व्यक्त करें

1 + x + x² + x³ + ... (infinite series)

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🔢 5. शून्यं साम्यसमुच्ये (Shunyam Saamyasamuccaye)

अर्थ: समुच्य समान हो तो उत्तर शून्य
📌 उपयोग: समीकरण हल करने में
🔍 उदाहरण:
(x + 3)(x - 3) = (x + 3)(x - a)
यहाँ (x + 3) समान है
→ तो x - 3 = x - a → a = 3

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🔢 6. (आनुरूप्ये) शून्यमन्यत् (Anurupyena Shunyamanyat)

अर्थ: अनुपात में एक अंश शून्य होने पर अन्य भी शून्य
🔍 उदाहरण:
यदि A/B = 0, तो A = 0

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🔢 7. सञ्चलन सञ्चलनाभ्याम् (Sankalana-Vyavakalanabhyam)

अर्थ: जोड़ और घटाव द्वारा
📌 उपयोग: समीकरणों का हल निकालना
🔍 उदाहरण:
x + y = 10
x - y = 2
→ जोड़ें: 2x = 12 → x = 6
→ घटाएँ: 2y = 8 → y = 4

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🔢 8. पूर्वापर समीकरणे (Purva-Apara Samuccaye)

अर्थ: पहले और बाद का समुच्य बराबर
🔍 उदाहरण:
x / (x + a) = y / (y + a)
→ x(y + a) = y(x + a)

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🔢 9. चालानवलम्बनाभ्याम् (Chalana Valambanabhyam)

अर्थ: सहारे से आगे बढ़ना
📌 उपयोग: जटिल समीकरण हल करने में सहारा लेना

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🔢 10. यावदूनम् (Yavadunam)

अर्थ: जितनी कमी, उतना निकालो
📌 उपयोग: 100 से कम की संख्या के वर्ग में
🔍 उदाहरण:
96² = ?

100 - 96 = 4

96 - 4 = 92

4² = 16

उत्तर = 9216

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🔢 11. व्यवकलनम् (Vyavakalanam)

अर्थ: घटाना
📌 उपयोग: साधारण घटाव की विधि

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🔢 12. शेषाण्यङ्केन चरमेण (Shesanyankena Charamena)

अर्थ: अंतिम अंक से शेष निकालना
📌 उपयोग: विभाज्यता जाँच
🔍 उदाहरण:
किसी संख्या का अंतिम अंक यदि 0 या 5 हो तो वह 5 से विभाज्य होती है।

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🔢 13. सोपान्त्यद्वयम् अन्त्यम् (Sopantyadvayam Antyam)

अर्थ: अंतिम दो अंकों का उपयोग
📌 उपयोग: बड़े अंकों के जोड़-घटाव में

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🔢 14. एकन्यूनेन पूर्वेण (Ekanunena Purvena)

अर्थ: पूर्व भाग से एक कम
📌 उपयोग: 9 से अंत वाले अंकों का वर्ग
🔍 उदाहरण:
99² = ?

99 - 1 = 98

98 × 100 + 1 = 9801

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🔢 15. गुणितसमुच्चय: समुच्चयगुणित:

अर्थ: गुणा का योग = योग का गुणा
🔍 उदाहरण:
(2 + 3) × (2 + 3) = 25
या
5 × 5 = 25

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🔢 16. प्रश्नं समुच्चय समुच्चय:

अर्थ: प्रश्न और योग दोनों संबंधित
📌 यह सूत्र प्रश्नों के योग से संबंधित परिणाम की ओर इशारा करता है।

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आचार्य दीपक शर्मा
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16/03/2025

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03/03/2025

क्या आप जानते हैं विषैले लोग कौन होते हैं? आपके पास कोई ऐसा व्यक्ति हो सकता है जो बहुत कुछ साथ में लग रहा है, लेकिन अंदर से, वह धीरे-धीरे आपको नष्ट कर रहा है।

विषैले व्यक्ति की उपस्थिति आपके जीवन में जहर के समान काम करती है। शुरू में, आप इसे महसूस नहीं करते, लेकिन समय के साथ, आपको उसके आसपास का बोझ महसूस होने लगता है, और आपका मन थका हुआ महसूस होने लगता है। एक दिन, आपको यह अहसास होगा कि जिस बोझ को आप ढो रहे थे, वह वास्तव में उसी व्यक्ति ने पैदा किया था।

लेकिन आप यह कैसे पहचान सकते हैं कि कोई व्यक्ति विषैले है? कुछ व्यवहार हैं, जो अगर आप ध्यान से देखें तो यह समझने में मदद करेंगे कि वह व्यक्ति आपके लिए कितना हानिकारक है। चलिए, हम विषैले लोगों के व्यवहार का विश्लेषण करते हैं:

1. सब कुछ की आलोचना करना एक विषैले व्यक्ति इस तरह आलोचना करता है कि आपको लगता है कि आप कुछ नहीं जानते या कुछ नहीं कर सकते। वे आपके अच्छे काम में भी दोष निकालते हैं, और उनकी आलोचना कभी भी रचनात्मक नहीं होती, यह केवल आपको नीचा दिखाने के लिए होती है।

2. शब्दों से आपको बांधना वे इस तरह बोलते या व्यवहार करते हैं कि आप खुद पर विश्वास खो बैठते हैं। वे आपको दोषी ठहराते हैं और परिस्थितियों को अपने फायदे के लिए मोड़ते हैं, जिससे आप खुद को उनके खेल का मोहरा महसूस करते हैं।

3. आपको गलत साबित करने की कोशिश करना वे हमेशा आपके निर्णयों या कार्यों पर शक करते हैं। भले ही आप किसी चीज़ के बारे में निश्चित हों, उनके शब्द आपको अपने फैसले पर सवाल उठाने के लिए मजबूर कर देते हैं।

4. अपने समस्याओं का दोष आप पर डालना वे हमेशा victim होते हैं और कभी अपनी समस्याओं की जिम्मेदारी नहीं लेते। वे कभी अपनी गलतियों को नहीं मानते और इसके बजाय आपको दोषी ठहराते हैं, जिससे आपको अपराधबोध महसूस होता है।

5. लगातार शिकायत करना उनके आसपास सब कुछ गलत लगता है। वे हर चीज़ की शिकायत करते हैं, और यह नकारात्मक मानसिकता धीरे-धीरे आपके जीवन को भी प्रभावित करने लगती है।

6. आपके भावनाओं से खेलना उन्हें आपकी खुशी या दुख से कोई फर्क नहीं पड़ता। चाहे आप दुखी हों या खुश, वे निष्ठुर रहते हैं। जब वे आपको चोट पहुँचाते हैं, तो उन्हें कोई करुणा नहीं होती।

7. आपकी सफलता देख कर असहज महसूस करना जब वे आपकी सफलता देखते हैं, तो वे आपके लिए खुश नहीं होते। इसके बजाय, वे जलते हैं। वे आपकी उपलब्धियों को तुच्छ मानते हैं, मजाक उड़ाते हैं या आपको नीचे गिराने की कोशिश करते हैं।

8. व्यवहार में दोहरे मानक एक दिन वे मीठे होते हैं, और अगले दिन अचानक शत्रुतापूर्ण हो जाते हैं। यह असंगति आपको मानसिक दबाव में रखती है, जिससे यह समझना मुश्किल हो जाता है कि उनके साथ कैसे व्यवहार करें।

9. लेना और देना न जानना एक विषैले व्यक्ति के लिए रिश्ते सिर्फ लेने के बारे में होते हैं। वे आपको इस्तेमाल करते हैं और लाभ उठाते हैं, लेकिन बदले में कुछ नहीं देते।

10. आपके "न" को न मानना वे आपकी व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान नहीं करते। उनका आपके समय, विचारों या आराम से कोई मतलब नहीं होता।

एक विषैले रिश्ते से बाहर निकलना आसान नहीं है, लेकिन यह बेहद महत्वपूर्ण है। आपके जीवन के हर क्षण का मूल्य है। ऐसे लोगों के साथ समय बर्बाद करने के बजाय, अपनी मानसिक शांति और खुशी को प्राथमिकता दें।

याद रखें, जो लोग वास्तव में आपसे प्यार करते हैं, वे आपको मानसिक रूप से दबाव नहीं डालेंगे।

---- “सत्य और ईमानदारी शांति की ओर ले जाती है, झूठ विनाश की ओर।” ----

साभार "Public Author"✒️✒️

01/03/2025

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आचार्य दीपक शर्मा

28/02/2025

ॐ ।। स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ जी महाराज द्वारा रचित वैदिक गणित का एक सूत्र
यावदूनं तावदूनीकृत्य वर्ग च योजयेत्

105 का वर्ग निकलना हो तो आधार से (100)से जितना ज्यादा (5) जोड़ेगे व् उसका वर्ग करके लिख देगे।
105 आधार से 5 ज्यादा 105+5 =110
5 का वर्ग 25 को 110 पर रख देंगे
11025 यही वर्ग हे
105 का वर्ग 11025

12 आधार 10 से 2 ज्यादा
12+2=14&2का वर्ग 4
144

92 का वर्ग आधार से 8 कम 92 से 8 कम करेगे
92 - 8 = 84 & 8 का वर्ग 64 को 84 पर रखेगे
8464
92 का वर्ग 8464 हे
ये है वैदिक गणित सरल और मजेदार।
इसी तरह हमने वैदिक गणित के सूत्रों को सरल करके एक पुस्तक में समाहित किया है। मूल सूत्र स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ जी महाराज के हैं।
इन सूत्रो को सीखकर हम गुणा, भाग, जोड़ , घटा, वर्ग , वर्गमूल, घन आदि के सवाल मन ही मन गणना करके कुछ ही सेकंड में हल कर सकते हैं ।
दीपक शर्मा
जींद
हरियाणा
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