ARYAN

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15/12/2025

शिव जी की पौराणिक कथा....
एक चिड़िया जंगल मैं एक पेड़ पर रहती थी। जंगल बिल्कुल सूखा हुआ था। न घास न पेड़ ना भूल न फल। जिस वृक्ष पर चिड़िया रहती थी उस पर भी सिर्फ सुखी टहनीया थी। पत्ते भी नहीं थे चिड़िया वहीं रहकर हर समय शंकर भगवान का जाप और गुणगान करती रहती थी एक बार नारद जी जंगल से होकर जा रहे थे चिड़िया ने देख लिया तुरंत आकर बोली नारद जी आप कहां जा रहे हैं ।नारद ने कहा शंकर जी के पास जा रहा हूं चिड़िया ने कहा भगवान शंकर मेरा बड़ा ध्यान रखते हैं ।मेरे सुखे जंगल के बारे में उन्हें पता नहीं है
शायद ।कृपया उनसे कह दीजिएगा मेरे जंगल को हरा भरा कर दे। नाराद जी शंकर जी के पास जाकर चिड़िया के जंगल की बात की । नारद के कई बार कहने पर शंकर जी ने कहा मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता हूं। नारद चिडिया के भाग्य में सात जन्म ऐसे ही सूखे जंगल में रहना लिखा है । नारद कुछ नहीं बोले कुछ समय बाद नारद जी फिर वहां से निकले तो देखा। जंगल बिल्कुल बदला हुआ था। जंगल हरा भरा हरी घास, फूल, फल लदे हुए थे। चिड़िया का पेड़ फूलों और फलों से लदा था। चिड़िया अभी प्रेम मगन होकर पेड़ पर नाच रही थी। नारद जी ने सोचा शंकर जी ने मुझे से झूठ बोला नारद जी ने शंकर जी से जंगल के हरे भरे तथा चिड़िया के बारे में पूछा तो शंकर जी ने कहा कि मैंने चिड़िया को कभी कुछ नहीं दिया फिर भी मेरा गुणगान करती रहती है ।उसी की भक्ति विश्वास और प्रेम की वजह से मुझे सातों जन्म काट कर। सब चिड़िया को देना पड़ा ऐसे दयालु हे हमारे भोलेनाथ।।।।
#शम्भू

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