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12/06/2020
राजा बलि की कन्या थी, रत्नमाला । यज्ञशाला मे वामन भगवान को देख कर उसके हृदय मे पुत्र स्नेह का भाव उदय हो आया । वह मन-ही-मन अभिलाषा करने लगी कि यदि मुझे ऐसा बालक हो और मै उसे स्तन पिलाऊ तो मुझे बड़ी प्रसन्नता होगी । जब भगवान ने छल से राजा बलि से दान मे सब कुछ मांग लिया तब रतनमाला ने मन-ही-मन सोचा कि यदि ऐसा पुत्र हो तो मे उसे दूध में जहर मिलाकर पिला दू । वामन भगवान ने अपने भक्त बलि की पुत्री के इस मनोरथ का मन-ही-मन अनुमोदन किया । वही द्वापर मे पूतना हुई और श्री कृष्ण के स्पर्श से उसकी लालसा पूर्ण हुई । [ 102 more words ]
पूतना कौन थी ? Who was Pootna? राजा बलि की कन्या थी, रत्नमाला । यज्ञशाला मे वामन भगवान को देख कर उसके हृदय मे पुत्र स्नेह का भाव उदय हो आया । वह मन-ह.....
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