Apbhrams Sahitya Academy
अपभ्रंश भाषा एवं साहित्य का व्यवस्थित अध्ययन करने के लिए सर्वप्रथम हम 15 दिन व्याकरण सीखेंगे उसके बाद हम अपभ्रंश सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम में निर्धारित साहित्य के अंश का अध्ययन व्याकरण के माध्यम से करेंगे। अपभ्रंश साहित्य के महत्वपूर्ण काव्यों के कुछ अंशों को यहाँ लिया जाएगा ताकि हम अपभ्रंश साहित्य से परिचित होकर अपनी रुचि के अनुसार आगे समस्त काव्य का स्वतन्त्र रूप से अध्ययन कर सकेंगे। मुझे आशा ही नहीं पूरा विश्वास है अपभ्रंश भाषा एवं साहित्य का ज्ञान आपके लिए सब तरह से उपयोगी सिद्ध होगा।
अपभ्रंश भाषा की व्याकरणात्मक ईकाइयों में हम सर्वप्रथम अपभ्रंश भाषा में प्रयुक्त होनेवाले स्वर व व्यंजन का ज्ञान करेंगे।
1. स्वर - अपभ्रंश में अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ओ स्वर होते हैं। हिन्दी के ऋ, ऐ, औ स्वर यहाँ नहीं होते।
2. व्यंजन- अपभ्रंश में -
क ख ग घ ङ
च छ ज झ ´
ट ठ ड ढ ण
त थ द ध न
प फ ब भ म
य र ल व
स ह
। ं . ॅ व्यंजन होते हैं।
अपभ्रंश में ङ और ´ का प्रयोग नहीं पाया जाता। इनके स्थान पर अनुस्वार (ं ं ) का प्रयोग होता है।
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Malyeey Nagar
Jaipur
302017
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