PCB Media
06/04/2026
URGENT REQUIREMENT
Qualification:- 10th,12th, ITI,Any Graduate, Any Diploma,
Salary:- -15000 To 20000/- in hand
Location- Jaisalmer (Suzlon)
Facility- PF, ESIC, canteen,Transport, Etc.
Duty:- 8hrs (Sunday off)
Contact :- 9414269331
Department- Production
10/09/2024
शीर्षक:
जंगली सुअरों के आतंक से परेशान किसान, देवेंद्र चौधरी ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल, स्थानीय सांसद, विधायक, कलेक्टर, और शिक्षा मंत्री को भेजे पत्रबाड़मेर:
किसानों की फसलें और जान-माल इस समय जंगली सुअरों के आतंक से बेहद प्रभावित हो रही हैं। बाड़मेर जिले के किसान देवेंद्र चौधरी ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल, स्थानीय सांसद, विधायक, कलेक्टर और शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर इस समस्या के समाधान के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की है।देवेंद्र चौधरी ने अपने पत्र में बताया है कि जंगली सुअरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि वे न केवल फसलों को नष्ट कर रहे हैं, बल्कि मानव जीवन के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं। अकेला व्यक्ति अगर इनके पास चला जाए, तो यह उस पर भी हमला कर देते हैं। बाजरे की फसलों के कारण इन्हें आसानी से देखा भी नहीं जा सकता, जिससे इन पर नियंत्रण पाना बेहद मुश्किल हो गया है।उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि वे तत्काल एक टीम भेजें, जो इस समस्या का समाधान करे। देवेंद्र चौधरी ने सुझाव दिया है कि सुरक्षा दीवारों का निर्माण किया जाए और वन्य जीव विशेषज्ञों की मदद से जंगली सुअरों को नियंत्रित करने के लिए विशेष टीमें गठित की जाएं।इस समस्या के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है, जिससे वे अपने परिवार की दैनिक जरूरतों को भी पूरा करने में असमर्थ हो रहे हैं। देवेंद्र चौधरी ने अपने पत्र में लिखा, "अन्नदाता किसान, जो स्वयं देश की खाद्य सुरक्षा का आधार हैं, आज अपनी आजीविका बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।"देवेंद्र चौधरी ने सरकार से अपील की है कि वे इस मामले पर तुरंत विचार करें और उचित कदम उठाएं, ताकि किसानों को इस समस्या से निजात मिल सके और उनकी फसलें एवं जान-माल सुरक्षित रह सकें।
Er Devendra Choudhary
30/03/2024
#राजस्थानदिवस
#राजस्थान_जय_बहादुर
#गौरवगाथाराजस्थानकी
#राजस्थान_का_गर्व
#राजस्थानकेस्वराज्यदिवस
कैलाश चौधरी, उम्मेदाराम या रविंद्र भाटी...कौन जीतेगा त्रिकोणीय मुकाबला? 'सुपर हॉट' हुई बाड़मेर-जैसलमेर सीट
आवश्यकता
लड़को की
10/12/ITI/डिप्लोमा
सुजलॉन कंपनी जैसलमेर Whatsapp 094142 69331
# हल्दी_रस्म व # फिजूल #खर्ची
अमीरों के चक्कर में कम आय वाले 🤔
आज कल ग्रामीण परिवेश में होने वाली शादियों में एक नई रस्म का जन्म हुआ है # # #हल्दी_रस्म।
हल्दी रस्म के दौरान हजारों रूपये खर्च कर के विशेष डेकोरेशन किया जाता है, उस दिन दूल्हा या दुल्हन विशेष पीत (पीले) वस्त्र धारण करते हैं। साल दो साल पूर्व इस हल्दी रस्म का प्रचलन पश्चिमी राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में तो ना के बराबर था लेकिन पिछले साल दो साल से इसका प्रचलन बढ़ा है।
पुराने समय में जरूर दूल्हे दुल्हन के चेहरे व शरीर की मृत त्वचा हटाने, मुलायम करने व चेहरे को गोरा और चमकदार बनाने के लिए हल्दी, चंदन, आटे, दूध आदि का उबटन बनाकर शरीर पर लगाया जाता था। पुराने समय में ना तो आज की तरह साबुन व शैम्पू थे ना ही ब्यूटी पार्लर। हल्दी के उबटन से घिसघिस कर दूल्हे दुल्हन को गोरा किया जाता था। वो रस्म साधारण तरीके से शादी वाले दिन ज़रूर निभाई जाती रही है। बुजुर्ग तो कहते है कि नाडी पर भेड़ों को धुलाने के लिए मिट्टी का बाथ टब बनाया जाता था भेड़ों को धोने के बाद उसके पानी से दूल्हे को उससे नहाया जाता था जिससे दूल्हे के रंग में निखार आ जाता था। लेकिन आजकल की हल्दी रस्म मोडिफाइड हो गई है। जिसमें हजारों रूपये खर्च कर डेकोरेशन किया जाता है। महंगे पीले वस्त्र पहने जाते है। और यह पीला ड्रामा किया जाता है।
आजकल देखने में आ रहा है कि आर्थिक रूप से असक्षम परिवार के लड़के भी इस लोक दिखावा में शामिल होकर परिवार पर आर्थिक बोझ कर रहे है। क्योंकि उन्हें अपने छुट भईए नेताओं, वन साइड हेयर कटिंग वाले दोस्तों को अपना ठरका दिखाना होता है। Insta, फेसबुक, आदि के लिए रील बनानी होती है। बेटे के रील बनाने के चक्कर में बाप रेल बन जाता है।.... ऐसे घरों में फिजूल खर्ची में पैसा पानी की तरह बहाया जाता है जिन बाप ने पसीने की पाई पाई जोड़ कर मकान का ढांचा खड़ा किया लेकिन 10 वीं 12 वीं मरते डूबते पास करने वाले छिछोरे मां बाप की हैसियत से विपरीत जाकर अनावश्यक खर्चा जरूर करते हैं।
ऐसे लड़के 1 रुपए की मजदूरी करना नहीं चाहते और सूखे दिखावे के चक्कर में मां बाप को कर्ज में धकेल देते हैं। ऐसे लड़कों के सैकड़ों ऐसे ही लूखे दोस्त होते हैं जिन्हें ये लोग प्यार से #ब्रो कहते है। शादी विवाह में अपना स्टेटस बनाने के लिए जिसको ढंग से जानते भी नहीं उन्हें भी शादी में इन्वाइट करेंगे। किसी से सिफारिश लगाकर प्रधान, विधायक और नेताओं को बुलाते हैं ताकि गांव में इनका ठरका जमे। बहुत सारी गाडियां घर के आगे खड़ी देखने की उत्कंठा रखते हैं उसको दिखाने हेतु महंगे ड्रोन कैमरे की व्यवस्था करते है।
किसी को बुलाए कोई आपत्ति नहीं लेकिन उन बड़े लोगों के साथ फोटो सेल्फी लेने में और उनके आगे पीछे घूमने में इतने मशगूल हो जाते है कि घर आए जीजा, फूफा, नाना, नानी, बहन , बुआ अड़ोसी पड़ोसी को चाय पानी का भी पूछना उचित नहीं समझते। अपने रिश्तेदारों की इस तरह की नाकद्री ठीक नहीं है। जरूरत पड़ने पर यही लोग सबसे आगे खड़े होते हैं जिन्हें आप हाशिए पर धकेल देते हो।
अन्य बहुत सारी फिजूलखर्ची जैसे डीजे बुक करवाना, लाइट डेकोरेशन करना, वीडियो शूट व ड्रोन कैमरा मंगाना, 5- 7 जोड़ी ड्रेस मंगवाना, 3-4 साफे ,शेरवानी, घोड़ी, पाइप पांडाल, स्टेज, पटाखे , एक वो झाग वाला डबिया (नाम तो मुझे आता नहीं ।)
जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हो उन परिवारों के बच्चों को मां बाप से जिद्द करके इस तरह की फिजूल खर्ची नहीं करवानी चाहिए। आजकल काफी जगह यह भी देखने को मिलता है कि बेटे मां - बाप से कहते है आप कुछ नहीं समझते। उन्हें उपनाम देते हैं 'घोना, धण।' मैं जब भी यह सुनता हूं पांवों के नीचे जमीन खिसक जाती हैं। बड़ी चिंता होती हैं कि हमारा समाज किस दिशा में जा रहा है।
.......पड़ोसी गांव और जिलों में इस पर रोक के समाचार पढ़ कर खुशी जाहिर करते है लेकिन अपने गांव और समाज में इसमें सरीक होकर लुत्फ उठा रहे है फिर तो यही सोच जाहिर कर रहे हो #तुझे रोकना तो चाह रहे है मगर तू रुकना नही हमे महफिल में शरीक जो होना है यानी कथनी और करनी में फर्क
क्यों ना इसे रोकने हेतु एक मुहिम चलाई जाए 🙏
11/02/2024
डट जाओ लड़ जाओ भीड़ जाओ पर असत्य के सामने अपना सर ना झुकाओ !
Prakash Chand Bhurt Prakash Chand Bhurt
एक तो अपनी भी फरमाइश बनती है
#धन्यवाद
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