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24/10/2015

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क्या केंद्रीय मंत्री वी के सिंह का "कुत्ता" बयान दुर्भावना से दिया गया बयान है ?

23/10/2015

पेट तो सांसदों, पूर्व सांसदों, विधायकों और पूर्व विधायकों का भी नहीं भर रहा है। वे भी महंगाई का रोना-रोकर अपने वेतन और भत्तों में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। कभी वे भी चना-चबैना मुंह का स्वाद सुधारने के लिए करते थे। फिर केवल शिक्षकों और शासकीय कर्मचारियों के पेट को ही निशाना क्यों बना रहे हैं। भारी-भरकम वेतन और भत्तों के बाद भी सांसद संतुष्ट नहीं हैं तो शिक्षकों और शासकीय कर्मचारियों पर ही ऐसी ओछी टिप्पणी क्यों कर रहे हैं। उनका वक्तव्य घोर आपत्तिजनक है और सत्तारूढ़ दल के प्रदेश अध्यक्ष तथा सांसद की गरिमा के अनुकूल नहीं है, निंदनीय है। जिन्हें मांगें पूरी करना है, उनकी भाषा मर्यादित रहती है और वे हमेशा संयमित प्रतिक्रिया देते हैं- अपनी मजबूरी बतलाते हैं किन्तु अमर्यादित टिप्पणी नहीं करते। उन्होंने सीमा लांघी है और न जाने किस मानसिकता का परिचय दिया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी से अनुरोध करेंगे कि अपनी पार्टी के सांसदों को मर्यादित बयान देने के आदेश दें। बयानों की लक्ष्मण रेखा न लांघें।

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