GIO Rajasthan

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20/03/2026

*The Month of Self Purification ~ Ramadan*
Day - 28

यह दुआ हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) ने उस वक़्त मांगी जब आप समंदर की तारीकियों में मछली के पेट में थे।
मुसलमान किसी तकलीफ़ में सच्चे दिल से यह दुआ मांगे तो अल्लाह उसकी दुआ ज़रूर क़ुबूल करता है।
*उम्मीद*
यह दुआ सिखाती है कि सख़्त मुश्किल हालात में भी अल्लाह से उम्मीद न छोड़ें।
*तौहीद का इक़रार*
मुश्किल दूर करने वाला सिर्फ़ अल्लाह है, उसके सिवा कोई माबूद नहीं।
*अल्लाह की ज़ात पाक है*
बंदा ए मोमिन अपनी कोताही पर शर्मिंदा होकर ख़ुदा की बारगाह में इल्तिजा करता है, ऐ अल्लाह! तू हर नुक़्स और कमी से पाक है, जो हुआ उसमें मेरी ही कमी है।
*मोमिन का रवैया*
मोमिन बहाने नहीं बनाता बल्कि अपनी ग़लती मान लेता है, यही तौबा की असल रूह है।
*मुश्किल से निजात का ज़रिया*
अल्लाह ने इसी दुआ की बरकत से हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) को निजात दी। यह दुआ हर परेशानी, ग़म और तंगी में पढ़ना चाहिए।यह वह दुआ है जो हज़रत मुहम्मद स.ने हज़रत आयशा को ख़ास तौर पर शब ए क़द्र के लिए सिखाई
*अफ़्व अल्लाह की ख़ास सिफ़त*
अल्लाह तआला सिर्फ़ माफ़ ही नहीं करता,वह बंदे के गुनाहों को बिल्कुल मिटा देता है, उनके निशान ख़त्म कर देता है
*अल्लाह माफ़ी को पसंद करता है*
अल्लाह बंदों से बहुत मोहब्बत करता है,उन्हें अज़ाब नहीं देना चाहता बल्कि उनकी तौबा का इंतेज़ार करता है और दिल की तड़प से निकले एक आँसू पर उसकी रहमत बंदे को अपनी आग़ोश में ले लेती है
*इंसान मोहताज है*
हम बहुत अच्छे,बहुत नेक बन जाएँ लेकिन हमें अल्लाह की माफ़ी और रहमत की ज़रूरत हमेशा रहती है
*माफ़ी की सिफ़त*
हम चाहते हैं कि ख़ुदा हमें माफ़ कर दे,तो हमें भी लोगों के साथ माफ़ी और दरगुज़र का रवैया अपनाना चाहिए
*असल कामयाबी*
शब-ए-क़द्र में असल चीज़ बख्शिश माँगना है, कामयाबी यह है कि अल्लाह हमें माफ़ कर दे, इसलिए इस रात में ज़्यादा से ज़्यादा मग़फ़िरत तलब करना चाहिए।

17/03/2026

*The Month of Self Purification ~ Ramadan*
Day - 26
*शुक्र भी अल्लाह की अता है*
हज़रत सुलेमानؑ इतनी बड़ी सल्तनत और ताक़त के बावजूद अल्लाह से शुक्र की तौफ़ीक़ मांगते हैं कि मुझे शुक्र अदा करने की तौफ़ीक़ दे। मोमिन चाहे कितना ही बड़ा मक़ाम क्यों न पा ले, फिर भी वह अल्लाह से यही मांगता है कि ऐ अल्लाह! मुझे शुक्र अदा करने की तौफ़ीक़ दे। क्योंकि शुक्र भी उसी की अता है।
*नेमतों को पहचानने वाला दिल*
इस दुआ में बंदा सिर्फ अपनी नेमतों को नहीं बल्कि वालिदैन पर होने वाली नेमतों को भी याद करता है। गोया एक मोमिन का दिल एहसान-शनास होता है।
*असल कामयाबी अल्लाह की रज़ा है*
बंदा ए मोमिन दुआ मांगता है कि मुझे ऐसे नेक अमल की तौफ़ीक़ दे जिनसे तू राज़ी हो जाए।
*अल्लाह की रहमत और सालिहीन की सफ़ में जगह मिलने की आरज़ू*
यह दुआ हमें सिखाती है कि मोमिन की सबसे बड़ी ख़्वाहिश यह होती है कि अल्लाह उस पर रहम करे और उसे अपने नेक बंदों की सफ़ में शामिल कर ले।

12/03/2026

*The Month of Self Purification ~ Ramadan*
Day - 21



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