Vikas Awasthy

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25/07/2021

भारत की छोरिया
छोरो से कम है के...

10/06/2021

एक दौड़ में केन्या का प्रतिनिधित्व कर रहा एथलीट हाबिल मुताई ट्रैक के चिन्हों को ठीक से नहीं समझ पाया और "दौड़ पूरी हो गयी" सोच कर फिनिश लाइन से सिर्फ कुछ ही फ़ीट दूरी पर रुक गया।

उसके पीछे दौड़ रहे स्पेनिश एथलीट इवान फर्नांडीज ने चिल्ला कर उसे रेस जारी रखने के लिए कहा।

लेकिन मुताई को स्पेनिश में कहा गया समझ में नहीं आया। इसके बाद स्पेनिश एथलीट ने उसे जीत के लिए धक्का दे दिया।

पत्रकार ने इवान से पूछा आपने केन्याई को जीत क्यों दिलायी ?

इवान ने जवाब दिया, "मैंने उसे जीत नहीं दिलायी, बल्कि वह जीतने वाला था!"

पत्रकार ने कहा, "लेकिन आप जीत सकते थे !"

इवान ने जवाब दिया, “मेरी इस जीत से क्या होता ?
ऐसी जीत से मिले पदक का सम्मान क्या होगा?
मेरी मां इस बारे में क्या सोचेगी?"

टिप्पणी*::-- आजकल तो लोग टंगड़ी अड़ाकर गिरा देते हैं।
फिर वह कोई सा भी क्षेत्र हो-
व्यापार,समाज या राजनीति

मां क्या सोचेगी ?
यह कोई नहीं सोचता !
हर कोई यही सोचता है।
मां ...... दो

साभार :- अज्ञात

09/06/2021

कड़वा सत्य

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