IndianReporters

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Welcome to Indian Reporters, the India's largest network dedicated for Indian Reporters / Journalist with 35 States and union territories of India. Indian Reporters is the division of SANS Technologies and SANS Technologies (Company) was founded in2010 by Er. Arpan Jain and Suresh Jain and started out in the living room of founder Er. A.S.Jain (Arpan Jain ) in 2010, and this IR is officially laun

07/08/2022

*मैं राजेन्द्र माथुर हूँ*

हाँ! मैं राजेन्द्र माथुर हूँ।

मालवा भूमि पर 7 अगस्त, 1935 को मध्य प्रदेश के धार जिले में जन्म हुआ,
प्रारंभिक शिक्षा धार, मंदसौर एवं उज्जैन में हुई।

उच्च शिक्षा के लिए इंदौर आ गया,
जहाँ मेरे पत्रकारिता जीवन की शुरुआत हुई।

'नई दुनिया' के संपादक राहुल बारपुते जी से मेरी पहली मुलाक़ात देश के ख़्यात व्यंग्यकार शरद जोशी जी ने करवाई थी।

बाबा से अपनी पहली मुलाक़ात में समाचार पत्र के लिए कुछ लिखने की इच्छा जताई थी।

उसके बाद अगली मुलाक़ात में मैं अपने लेखों का बंडल लेकर ही बारपुते जी से मिला।

बाबा के अग्रलेख के बाद अनुलेख लिखने का सिलसिला लंबे समय तक चला।

सन् 1955 में 'नई दुनिया' की दुनिया से जुड़ने के बाद मैं 27 बरस तक 'नई दुनिया' परिवार का हिस्सा रहा।

मैं अंग्रेज़ी का जानकार रहा पर हिन्दी पत्रकारिता ने मुझे बेहद संजीदगी से स्वीकार कर लिया।

सन् 1965 में बदलाव करते हुए मैंने 'पिछला सप्ताह' नामक लेख लिखना प्रारंभ किया।
मैं गुजराती कॉलेज में अंग्रेज़ी के प्राध्यापक के रूप में कार्यरत था, 1969 में अध्यापकी छोड़ पूरी तन्मयता के साथ 'नई दुनिया' की दुनिया में रम गया।

'पिछला सप्ताह' स्तंभ लिखना मैंने आपातकाल तक जारी रखा।

1975 के आपातकाल के दौरान सरकार ने जब प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का प्रयास किया, तब मैंने ‘शीर्षक’ के नाम से सरकारी प्रतिक्रिया की परवाह किए बिना धारदार आलेख लिखे।

सन् 1980 से मैंने 'कल, आज और कल’ शीर्षक से स्तंभ लिखना शुरु किया।

14 जून, 1980 को मैं प्रेस आयोग का सदस्य चुना गया।

इसके बाद सन् 1981 में मैंने 'नई दुनिया' के प्रधान संपादक के रूप में पदभार संभाला।
प्रेस आयोग का सदस्य बनने के पश्चात मैं टाइम्स ऑफ़ इंडिया के संपादक गिरिलाल जी जैन के संपर्क में आ गया। उन्होंने मुझे दिल्ली आने का सुझाव दिया।
लंबे अरसे तक सोच-विचार करने के पश्चात मैंने दिल्ली का रुख किया।
सन् 1982 में नवभारत टाइम्स का प्रधान संपादक बन कर मैं दिल्ली पहुँच गया।

दिल्ली आने के पश्चात मैंने 'नवभारत टाइम्स' को दिल्ली, मुंबई से निकालकर प्रादेशिक राजधानियों तक पहुँचाने का काम किया।

'नवभारत टाइम्स' को हिन्दी पट्टी के पाठकों तक पहुँचाते हुए लखनऊ, पटना एवं जयपुर संस्करण प्रकाशित किए।

यही समय था, जब मुझे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। और एडिटर्स गिल्ड का प्रधान सचिव भी बनाया गया।
मेरे लेखों के कई संग्रह प्रकाशित हुए हैं, जिनमें प्रमुख हैं- गांधी जी की जेल यात्रा, राजेंद्र माथुर संचयन- दो खण्डों में, नब्ज़ पर हाथ, भारत : एक अंतहीन यात्रा, सपनों में बनता देश, राम नाम से प्रजातंत्र।
9 अप्रैल, 1991 की दोपहर मेरा बुलावा आया गया और मुझे शरीर छोड़कर शब्द देह का रूप धारण करना पड़ा।

डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'
राष्ट्रीय अध्यक्ष, मातृभाषा उन्नयन संस्थान, भारत
सम्पादक, मासिक साहित्य ग्राम

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#इन्दौर

06/07/2022

*आपका सुझाव-हिन्दी का विस्तार*

विगत 4 वर्षों से अधिक समय से हिन्दी भाषा के प्रचार और विस्तार के लिए कार्यरत मातृभाषा उन्नयन संस्थान आपके सहयोग से हिन्दी के प्रचार में नवाचार चाहता है। हमारा ध्येय है कि हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा बने और जन-जन की भाषा बने हिन्दी।
उपरोक्त विषयान्तर्गत आपके हिन्दी आंदोलन के लिए सुझाव आमंत्रित आमंत्रित हैं।
हमें क्या करना चाहिए, कैसे हिन्दी भाषा का अत्यधिक प्रचार होगा? कैसे हिन्दी युवाओं को जोड़ेगी और किस तरह आन्दोलन गतिमान होगा?
इस विषय में आपके सुझाव या तो पोस्ट के कमेन्ट बॉक्स में दे सकते हैं अथवा [email protected] पर मेल कर भी सकते हैं।

https://www.facebook.com/2072681989650249/posts/3187285454856558/

*आपका सुझाव-हिन्दी का विस्तार*

विगत 4 वर्षों से अधिक समय से हिन्दी भाषा के प्रचार और विस्तार के लिए कार्यरत मातृभाषा उन्नयन संस्थान आपके सहयोग से हिन्दी के प्रचार में नवाचार चाहता है। हमारा ध्येय है कि हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा बने और जन-जन की भाषा बने हिन्दी।
उपरोक्त विषयान्तर्गत आपके हिन्दी आंदोलन के लिए सुझाव आमंत्रित हैं।
✍🏻 संस्थान को क्या करना चाहिए?
✍🏻 कैसे हिन्दी भाषा का अत्यधिक प्रचार होगा?
✍🏻 कैसे हिन्दी युवाओं को जोड़ेगी?
✍🏻 किस तरह आन्दोलन गतिमान होगा?

इस विषय में आपके सुझाव या तो पोस्ट के कमेन्ट बॉक्स में दे सकते हैं अथवा [email protected] पर मेल कर भी सकते हैं।

https://www.facebook.com/2072681989650249/posts/3187285454856558/

#हिन्दीग्राम #मातृभाषा #डॉअर्पणजैनअविचल #संस्मय #हिन्दी #इन्दौर

Photos from डॉ. अर्पण जैन 'अविचल''s post 06/06/2022

*मासिक सोच विचार में प्रकाशित आलेख*
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वाराणसी से प्रकाशित मासिक सोच विचार पत्रिका में #डॉअर्पणजैनअविचल का आलेख *'नए दौर में नए तरीके से हो साहित्य पत्रकारिता'* ....

*डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'*
राष्ट्रीय अध्यक्ष, मातृभाषा उन्नयन संस्थान

https://www.facebook.com/109665883858598/posts/576622353829613/

*(डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' के फ़ेसबुक पेज को लाइक करके आप जुड़ सकते हैं)*

#डॉअर्पणजैनअविचल #डॉअर्पणजैन

कैसे ज़्यादा प्रकाशित होगा आपका लेखन 11/12/2020

*कैसे ज़्यादा प्रकाशित होगा आपका लेखन*

कुछ आवश्यक सुझाव, जिन्हें अपनाने से बढ़ेगा लेखक का प्रकाशकीय दायरा और ...

*क्या लिखें? क्यों लिखें? और कैसे भेजें?*

*डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'*

#शब्दग्राम #हिन्दीविमर्श #संस्मय #हिन्दीग्राम #डॉअर्पणजैन #मातृभाषा #हिन्दी #आलेख #हिंदी #ब्रांडिंग #लेखकीयलोकप्रियता

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*डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'* का आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें-
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कैसे ज़्यादा प्रकाशित होगा आपका लेखन कैसे ज़्यादा प्रकाशित होगा आपका लेखन क्या लिखें? क्यों लिखें? और कैसे भेजें? ◆ डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' वर्तमान दौर में हि...

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