IATV Educational Academy
26/02/2026
स्कूली छात्रों ने बनाये होली के रंग जनक दीदी के संग
आज आई.ए.टी.वी स्कूली छात्रों और उनके शिक्षको ने गांव सनावादिया में जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की निदेशिका पद्मश्री जनक पलटा मगिलिगन से होली के लिए नेचुरल व केमिकल-फ्री रंग बनाने का प्रशिक्षण लेने कक्षा पाँचवीं से आठवीं तक के लगभग 50 छात्र अपने शिक्षकों सुनील कुमार पटेल तथा राजेन्द्र लशकरी के साथ आए । टेकरी पर पहुचते ही एक विंडमिल घूमता हुआ बिजली बना रहा था , दूसरी तरफ़ पेराबोलिक सोलर कुकरों पर पानी उबल रहा था ,चारो तरफ फलदार फूलों से भरे पेड़ , एक मेज़ पर पलाश / टेसू , पोई, अम्बाडी के लाल, ताजे चुकंदर के टुकड़े ,पारिजात ,सिन्दूर और बोगनविलिया के जामुनी फूलों की पंखुडिया ,पत्तिओ को सजे हुए देख कर खुशी से हैरान हो गए । छात्रों ने बोगनवेलिया पुष्प गुच्छ भेंट कर जनक दीदी का अभिवादन किया और जनक दीदी ने सभी का सस्नेह स्वागत किया और उन्हें अपना जैविक फार्म दिखाया जो आत्मनिर्भर और प्रदुषणमुक्त है, पानी और खाद्य पदार्थों की बर्बादी नहीं करती हैं, और यह जगह मनुष्यों और अन्य जीवित प्रजातियों के लिए अनुकूल है।
कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों और जनक दीदी की प्रार्थना के बाद हुई जिससे वातावरण शांत, सकारात्मक और आनंदमय बन गया। दीदी ने इस के बाद बहुत ही सरल तकनीकों से व्यावहारिक सत्र शुरू किया वे पोई का गीला चमारिया रंग 7 मिनट में बना पाए (मालवा में चमारिया ) टेसू और अम्बाडी 2 मिनट में, पोई के फलो के जामुनी और टेसू के केसरिया फूलों को गर्म पानी में मिलाया गया, वे तुरंत रंगों को देख कर ख़ुशी से फूले नहीं समाये ! अगला रंग पोई को मुह पर मलने था, उन्होंने बस पोई को अपने हाथों से मसल दिया और हाथो पे लग गया होली का असली रंग । यह उन सभी के लिए एक जादुई अनुभव था। मेहदी की तरेह अपने दोनों हाथों पर इन प्राकृतिक रंगों को देख उत्साहित थे। जनक दीदी ने एक-दूसरे के चेहरे पर लगा कर दिखाया और बताया इससे चमड़ी नरम और चमकदार हो जाएगी और ये रंग बिना किसी साबुन लगाये बहुत कम पानी से धुल जायेंगे यह भी बताया कि रासायनिक रंगों बहुत महंगे है हानिकारक है साथ ही उन के प्लास्टिक पैकेटों से बहुत प्रदूषण होता है, इन रंगों से त्वचा की एलर्जी होती है, आंखों और गले के लिए हानिकारक है, हमारे पास पीने के लिए आवशयक पानी नहीं है रासायनिक रंगों से छुटकारा पाने के लिए कपड़े धोने में 10 गुना पानी कहा से लायेंगे ? रासायनिक रंग बीमारी, समय की बर्बादी, ऊर्जा और पर्यावरण, मानसिक तनाव देता है। रासायनिक रंग हिंसा का कारण बनते हैं ,जबकि प्राकृतिक रंग प्रेम बढ़ाते हैं और हम प्रकृति और त्योहार की सराहना करते हैं । बच्चों ने फाग गाए, गीत गाए और प्राकृतिक रंगों के साथ होली का आनंद उल्लासपूर्वक मनाया । सभी सहभागिओं ने इस होली को प्राकृतिक बनाने का संकल्प लिया कार्यक्रम की थीम को सुंदर पंक्तियों के साथ व्यक्त किया—“खुश रहो, खुशियाँ बाँटो — आज होली है!” “मुस्कुराओ, रंगों में घुल जाओ — आज होली है!” “खुशियाँ फैलाओ, प्यार बरसाओ — आज होली है!” “प्रकृति का प्यार, होली का सार — लगाओ सिर्फ़ ऑर्गेनिक रंग इस बार!” स्कूल के शिक्षक सुनील पटेल ने आभार प्रकट करते हुए कहा हम सभी बहुत प्रेरित होकर जा रहे है दूसरों को भी सिखाएयंगे ।
यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, पर्यावरण–अनुकूल व स्वास्थ्यप्रद होली मनाने का संदेश देने वाला अत्यंत सफल और प्रभावी आयोजन साबित हुई
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